रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला था। पूरे गाँव में उत्साह का माहौल था। बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सजा हुआ था। हर बहन अपने भाई के लिए सबसे सुंदर राखी चुन रही थी। लेकिन गाँव के किनारे रहने वाली बारह वर्ष की अनन्या के चेहरे पर उदासी थी। उसका बड़ा भाई अर्जुन पिछले दो वर्षों से सेना में तैनात था और इस बार भी छुट्टी नहीं मिल पाई थी।
अनन्या हर साल अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती थी। अर्जुन भी उसे हमेशा यह कहकर हँसाता था, “राखी का धागा मुझे हर मुश्किल में हिम्मत देता है।” इस बार वह घर नहीं आ सका, इसलिए अनन्या ने राखी डाक से भेज दी। उसने राखी के साथ एक छोटा-सा पत्र भी रखा—”भैया, आप जहाँ भी रहें, सुरक्षित रहें। मेरे लिए यही सबसे बड़ा उपहार है।”
रक्षाबंधन के दिन अनन्या सुबह से ही घर के आँगन में बैठी भाई की यादों में खोई थी। तभी गाँव के प्रधान के घर से सूचना आई कि सीमा पर तनाव बढ़ गया है और कई सैनिक लगातार ड्यूटी पर हैं। यह सुनकर अनन्या की चिंता और बढ़ गई। उसने भगवान से अपने भाई और सभी सैनिकों की सुरक्षा की प्रार्थना की।
कुछ दिनों बाद अर्जुन का पत्र आया। उसमें लिखा था, “प्यारी बहन, तुम्हारी भेजी राखी मुझे समय पर मिल गई। जब मैंने उसे अपनी कलाई पर बाँधा, तो ऐसा लगा जैसे तुम मेरे सामने खड़ी हो। उस धागे ने मुझे अपने परिवार, अपने गाँव और अपने देश के प्रति जिम्मेदारी का एहसास और मजबूत कर दिया।”
पत्र पढ़ते-पढ़ते अनन्या की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन इस बार वे खुशी और गर्व के आँसू थे।
कुछ महीनों बाद अर्जुन छुट्टी लेकर घर लौटा। पूरे गाँव ने उसका स्वागत किया। रक्षाबंधन तो बीत चुका था, लेकिन अनन्या ने थाली सजाई और मुस्कुराते हुए बोली, “भैया, मेरी राखी तो अधूरी रह गई थी।”
अर्जुन ने अपनी कलाई आगे बढ़ा दी। अनन्या ने प्रेम से राखी बाँधी। अर्जुन ने कहा, “बहन, यह धागा भले ही कच्चा हो, लेकिन इसकी ताकत दुनिया की सबसे मजबूत जंजीर से भी अधिक है। यही धागा मुझे हर कठिन परिस्थिति में साहस देता है।”
पास खड़े गाँव के बच्चों ने यह बात सुनी तो उनमें से एक ने पूछा, “क्या सचमुच एक धागा इतना मजबूत हो सकता है?”
अर्जुन मुस्कुराया और बोला, “हाँ, क्योंकि इसकी मजबूती धागे में नहीं, बल्कि बहन के प्यार, विश्वास और आशीर्वाद में होती है।”
उस दिन गाँव के सभी लोगों ने महसूस किया कि रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और सुरक्षा का प्रतीक है। राखी का धागा देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन उसमें अनगिनत भावनाएँ बसी होती हैं। वह भाई को केवल बहन की रक्षा का वचन ही नहीं दिलाता, बल्कि उसे अपने परिवार, समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों की भी याद दिलाता है।
तभी अनन्या ने मुस्कुराकर कहा, “अब मैं समझ गई हूँ कि वो बंधन सिर्फ कच्चे धागों का नहीं है, बल्कि अटूट विश्वास, निस्वार्थ प्रेम, सम्मान और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प का बंधन है। यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
लेखिका:डॉ आभा माहेश्वरी अलीगढ