“आपका ये *दोहरे चेहरे* के बारे में मुझे सब पता है अब अच्छा बनने का नाटक मत कीजिए आप।” सीमा ने अपनी सास लता से बोला।
“ये क्या बोल रही हो तुम बहु?” गुस्से में लता ने बोला।
“अब झूठ बोलने से कुछ नहीं होगा, मुझे सब दिख भी रहा है और अच्छे से समझ भी आ रहा है।” सीमा ने बोला।
“आने दे नवीन को फिर बताती हू कि तूने आज क्या किया।” लता अपना मुंह फेरती हुई बोली।
ऐसे उनकी बहस कुछ देर और चली फिर दोनों अपने कमरे में चले गए।
शाम होने को चली थी और नवीन के आने का भी समय हो गया था।
कुछ देर बाद घर की घंटी बजी और आज दरवाजा एक दम से खुला और वो भी लता ने खोला ये देख कर नवीन बोला “क्या बात है आज दरवाजा इतनी जल्दी खुल गया और आज सीमा ने नहीं खोला दरवाजा?”
तभी लता बोली “खोलेगी भी कैसे, उसको अपनी सास की बुराई करने से फुर्सत मिले तब ना आएगी दरवाजा खोलने।”
नवीन ने हैरानी में पूछा “क्या हुआ मां? आप ऐसा क्यों बोल रही है?”
लता बोली “तुझे पता नहीं है पर तेरी पत्नी ने मुझे दोहरे चेहरे वाला इंसान कहा और पता नहीं क्या क्या कह रही थी, तू खुद ही जाके संभाल ले पता नहीं आज मेरे बारे में कह रही है कल तेरी बहन के लिए कुछ बोलेगी और कही आगे तुझे भी छोड़कर ना चली जाए। सच बोलूं तो मुझे तो बहुत….
इससे पहले लता अपनी बात पूरी करे उससे पहले ही नवीन बोला “मां आप फिकरत करो मैं जाकर बात करता हू।”
ये कहते हुए वो अपने कमरे में जा ही रहा था कि पीछे से लता बोली “बेटा उसने ये भी बोला था कि आपको तो नर्क में भी जगह नहीं मिलेगी”। नवीन ने सर झुकाया और बोला “मां मैं आता हू, आम अपने कमरे में जा कर आराम कीजिए”।
उधर नवीन ने कमरे का दरवाज़ा खोला और देखा कि सीमा बेड के पास रखे सोफे पर बैठ कर फोन चला रही थी। नवीन ने कमरे का दरवाज़ा बंद करते हुए सीमा की तरफ मुड़ा और बोला “सीमा, मैं ये सब क्या सुन रहा हू?” सीमा ने उधर से बोला “क्या, सुन रहे हो?”
नवीन की आवाज़ हल्की सी तेज़ हुई और वो फिर बोला “तुम्हे भी पता है, सीमा मैं किसकी बात कर रहा हू। लेकिन अगर तुम्हे उसको भी नहीं मान ना तो मैं ही बोल देता हू, ये तुमने दिन में मां को क्या बोला है? कि उनको नर्क में भी जगह नहीं मिलेगी? और वो कैसे इंसान है और पता नहीं क्या क्या बोला।”
सीमा हल्का सा मुस्कुराई और बोली “तो उन्होंने आपको ये सब बोला है कि मैने उनको बोला कि वो नर्क में चले जाए?”
अपनी बात को पूरा करते हुए सीमा बोली “मैने ऐसा कुछ नहीं बोला था उनको।”
नवीन ने बोला “लेकिन तुमने उनको दोहरे चेहरे वाला इंसान भी बोला”।
तभी सीमा ने बोला कि “क्योंकि वो है ही वोही और वो काम भी वैसे ही करती है और आज मुझे मेरी बात साबित करने का सामान है।”
उसने अपना फोन निकाला और बोला “लीजिए सुनिये, मैने क्या बोला था और उन्होंने आपको क्या क्या बताया है।”
नवीन वो सारी फोन की रिकॉर्डिंग सुन कर हैरान रह गया क्योंकि उसमें सीमा ने इतना ही बोला था कि उसकी सास सामने कुछ और होती है और पीछे कुछ और वो सीमा की हमेशा अपनी बेटी के साथ बुराई करती रहती है, नर्क वाली बात कही भी दूर दूर तक नहीं सुनाई दी उसको सीमा के मुंह से बल्कि वो तो लता ने बोला था सीमा को।
नवीन ने दरवाजा खोला और अपनी मां के कमरे में गया और उसने रिकॉर्डिंग सुनाते हुए बोला “मां, ये सब क्या है? आप ऐसे कब सी हो गई? इतना बड़ा झूठ?” अपनी ही आवाज सुन कर लता हैरान हो गई
और सीमा की तरफ घबरा कर देखने लगी तभी सीमा हल्का सा मुस्कुराई और सोच में चली गई जब कुछ घंटे पहले उसने लता को उसकी बुराई करते सुना था और वो उसको सुना रही थी तभी उसने अपने फोन में ये सब रिकॉर्ड कर लिया था।
अपनी सोच से वापिस आती हुई सीमा बोली “नवीन अब, ये आपका फैसला है आपको क्या करना है, मेरा काम सच बाहर लाना था जो मैं ले आई।”
नवीन का सर शर्म से झुक गया था और उसने बोला “सीमा, मुझे माफ करदो और अपनी मां की तरफ मुड़कर बोला “मां, आप को मैं कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।” ये बोलते ही वो वहां से चला गया और लता उधर बस अपने कमरे में रोती रही जैसे अब उसको पछतावा हो रहा है कि उसकी एक गलती की वजह से आज उसका बेटा उस से दूर हो गया है।
लेखिका
तोषिका