विवेक मुझे ₹200 दे देना ऑफिस जाने से पहले इतना कह के काजल विवेक का खाना पैक करने लगी । और जब विवेक का ऑफिस जाने के लिए कमरे से बाहर आया तो काजल ने उसका टिफिन देते हुए बोली विवेक वह ₹200 दे दो मुझे जाने से पहले। अरे क्या है यह रोज तुम पैसे मांगती रहती हो ,कभी 500
कभी 200 रुपए क्या है यह कितनी जरूरत पड़ती रहती है तुम्हें पैसों की। जब तब तुम्हें पैसे ही चाहिए होते हैं। अभी परसों ही तो ₹500 दे दिया था तुम्हें। परेशान हो गया हूं मैं विवेक झल्ला कर बोला।अरे तो कुछ जरूरत होगी तो तुमसे तो पैसे मांगूंगी ना, अब मैं कोई नौकरी तो करती नहीं हूं जो मेरे पास पैसे होंगे। घर के लिए कुछ सामान चाहिए था लाने के लिए पैसे तो चाहिए ना काजल बोली ।
अभी परसों तुम्हें ₹500 दिए थे वह उसका क्या हुआ । अरे विवेक आजकल ₹500 होते क्या है सब्जी ली और थोड़े फल खरीदे ब्रेड बटर ले आए और बस खत्म हो गए । आज फिर 200,,200 ही तो मांगे हैं कोई 2 लाख तो नहीं मांगी है कि इतना भड़क रहे हो । काजल इसलिए चाहिए सोच रही थी कि आज पार्लर जाकर थ्रेडिंग करा लूं और कुछ आगे से बच भी जाएंगे तो आते समय ऑटो वगैरह में जरूरत पड़ सकती है ।
कुछ पैसे तो पास में होने चाहिए ना जब घर से बाहर जा रही हूं । पता नहीं की कब कुछ जरूरत पड़ जाए। ऐसे खाली हाथ घर से बाहर थोड़ी चली जाऊंगी। और घरों की औरतों को देखो कितना पैसा पार्लर में उड़ती रहती है। मैं तो वह भी नहीं करती । बस र्थेडिगं ही कराती हूँ।पैसा रुपए के लिए विवेक किच किच करता ।
और हाथ फैलाना रोज रोज अच्छा नहीं लगता है । यह तो तुम अपने आप महीने का खर्चा मेरे को दे दिया करो या तुम मेरे अकाउंट में पैसे डलवाओ जिससे मैं रोज की बहस ना हो ।
मुझे भी अच्छा नहीं लगता। आत्मसम्मान से जीना चाहती हूं इस तरह से तुम्हारे सामने अपना सामान गिरा कर तो मैं नहीं रह सकती । देना हो तो दो नहीं तो मैं ही कुछ दूसरा जुगाड़ करती हूं । आज काजल बहुत गुस्से में थी जब भी वह विवेक से कुछ पैसे की मांग करती थी यही नाटक होता था घर में।
काजल चाय का कप लेकर बैठी उसे आज बहुत गुस्सा आ रहा था । विवेक के इस व्यवहार से। आखिर पत्नी हूं मै उनकी उनके घर की जरूरत है और मेरी ज़रूरतें पूरी करना फर्ज है उनका । भले ही चाहे तो घर का सारा सामान लाकर घर में रख दें तब भी कुछ पैसे पास में होना तो बहुत जरूरी है ना पता नहीं कब क्या जरूरत पड़ जाए।
मैं तो खाली हाथ ही रहती हूं मेरे पास कोई पैसे नहीं रहते। काजल सोचने लगी मेरा भी आत्मसम्मान है ऐसी बातों से मन बहुत आहत होता है। क्या मैं भी कुछ कर सकती हूं, कोई छोटा-मोटा काम कुछ भी कुछ भी जिससे मुझे कुछ पैसे मिलेंगे । सोचते सोचते उसको याद आया कि पिछली मैरिज एनिवर्सरी पर उसने अपने हाथों से केक बनाया था। उस समय विवेक के दो दोस्त और उनकी पत्नियों भी आई थी घर पर ।
तब विवेक के दोस्त अनुज और उनकी पत्नी रीमा ने कितनी तारीफ की थी की भाभी जी केक तो बहुत अच्छा है, कहां से मंगवाया। मैंने घर में ही बनाया है। अच्छा बहुत अच्छा बना है ।
आप तो अपना बिजनेस स्टार्ट कर सकती हैं वह कैसे काजल बोली। अरे बैठे ही बैठे घर में केक बनाने का आर्डर लो और बेचो।आपके हाथ पैसे भी आएंगे और आपकी हुनर को एक नई पहचान भी मिलेगी। अच्छा फिर से बात आई गई हो गई थी।
आज काजल का मन बहुत आहत हुआ था विवेक के इस बात से। काजल उठी और अपने आपको थोड़ा ठीक किया, कपड़े बदले और घर मे इधर उधर पडे कुछ पैसे चिल्लर ढूंढ ढूंढ कर निकालने लगी। कहीं से दस रूपये तो कहीं से बीस रूपये और कहीं से पांच के सिक्के मिले।
सब इकट्ठे किये और गिने तो सिर्फ 150 रूपये ही थे। मात्र डेढ़ सौ रूपये इतने मे तो केक बनाने का सामान नहीं आ पाएगा। और फिर अचानक से उसको याद आया कि अबकी बार माँ से मिलने गई थी तो माँ ने पांच सौ रूपये दिए थे कितना संभाल कर रखा था उसको
और वह एक आखरी 500 का नोट अंदर से निकाला और कुछ 6:50 सो रुपए लेकर निकल गई बाजार और केक का सामान लेकर आ गई। थोड़ा थोड़ा और 50 रूपया बच भी गए ।
घर जाकर काजल नीचे फ्लैट गई और एक दरवाजे पर नाक किया दरवाजा खुला, जी नमस्ते मैं काजल हूं सेकंड फ्लोर पर रहती हूं मैं केक बनाती हूं आपकी चाहिए तो आप आर्डर कर सकती है मेरा नंबर यह है । और पहली बार ऑर्डर पर डिस्काउंट भी मिलेगा । ऐसे करके काजल चार पांच घर में गई और फिर घर आ गई।
घर जाकर काजल बेसब्री से इंतजार करने लगी आर्डर का। बार-बार फोन उठा कर देखती की कोई फोन तो नहीं आया जो मैं रिसीव न कर पाई हूं ।।दो दिन निकल गए कोई फोन नहीं फिर तीसरे दिन में फोन आया हेलो काजल जी, जी मुझे एक केक चाहिए मेरे बेटे का जन्मदिन है। शाम तक मिल जाएगा हां हां मिल जाएगा ।
अच्छा होगा ना आप बिल्कुल निश्चिंत रहिए केक बढ़िया होगा। खुशी के मारे पागल हुई जा रही थी । काजल ने जल्दी-जल्दी केक तैयारी किया और शाम के 5:00 बजे का इंतजार करने लगी। आर्डर लेने पड़ोसी आई कितने दे दूं 6:30 लेकिन आपने तो कहा था की पहली बार डिस्काउंट देंगे।
ठीक है अच्छा आप 5:30 दें दें। दरवाजा बंद करके जाकर सोफे पर बैठ गई उस 500 के नोट को लेकर सोचने लगी मैं भी तो कुछ कर सकती हूं। अपने सम्मान से जी सकती हूं । हर दिन विवेक के सामने छोटी-छोटी चीज खरीदने के लिए हाथ फैलाना पड़ता है। अब मैं अपने काम को आगे बढ़ाऊंगी।
खुशी से दोहरी हो रही थी काजल। तभी विवेक ऑफिस से आया और काजल को खुश देखकर पूछा क्या बात है काजल बड़ी खुश नजर आ रही हो।हां विवेक आज मैं बहुत खुश हूं क्यों क्या हुआ। पता है आज यह 500 का नोट मेरे हाथ में देख रहे हो हां, लेकिन मैं तो तुम्हें दिए नहीं यह कहां से आए।
यह मेरी पहली कमाई है विवेक, पहली कमाई हां मैंने केक बनाने का बिजनेस स्टार्ट किया है । आज मैंने पहले केक बना कर दिया उसी से मुझे यह 550 रुपए मिले है।पता है तुमसे पैसे मांगती थी और तुम मुझे इनकार कर देते थे तो मुझे बहुत बुरा लगता था। मेरा आत्म सम्मान कितना टूटता था कि मैं इस लायक भी नहीं हूं कि कुछ पैसे खुद कमा सकूं।
तो मेरे ख्याल आया कि मैं भी कुछ करूं मुझे पता है कि मैं केक बहुत अच्छा बनाती थी।शादी से पहले घर में किसी का भी बर्थडे हो मै ही केक बनाती थी । तो कुछ अपने इसी हुनर का मै इस्तेमाल करने की सूची और देखो आज मुझे पहली कमाई के रूप में यह 500 का नोट मिला है ।
यदि तुम्हारा यह काम चल निकलता है वह तुम्हें मुझसे पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी विवेक बोला हां मुझे बहुत खराब लगता था विवेक जब तुम छोटी छोटी जरूरतों के लिए भी पैसे देने से मना कर देते थे।
आज काजल के पास फिर एक केक बनाने का आर्डर आया है। काजल बहुत खुश थी, उसकी आत्म सम्मान बढता जा रहा था। मैं भी कुछ कर सकती हूं बहुत खुश हो रही थी । सच है पाठकों जिस घर की औरते की नौकरी नहीं करती ,छोटी-छोटी जरूरत के लिए पति पर निर्भर रहती है।
पैसे मांगने पर कभी तो पतिदेव दे देते हैं कभी झुझंलाकर मना कर देते हैं। पता नहीं तुम्हें कितने पैसों की जरूरत पड़ती रहती है । तुम्हें तो रोज पैसे चाहिए होते हैं। तब एक औरत को कितना बुरा लगता है यह तो जिसके साथ होता है वही जानता है । इसलिए यदि आपके पास कोई हुनर है तो उसका से सदुपयोग करने में कोई बुराई नहीं है । ऐसे कार्य आपकी आत्मसम्मान को बढ़ावा देते हैं और आप पहले से ज्यादा खुश और आत्मनिर्भर होती है।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
16 जुलाई