*भगवान के घर देर है पर अंधेर नही* – तोषिका

“क्या हुआ बेटा, ऐसे रो क्यों रहा है?” सुनीता ने अपने बेटे अंश से पूछा। अंश ने बोला “कुछ नहीं मा, बस ऐसा लग रहा है कि जिंदगी साथ नहीं दे रही है।”

“ऑफिस में कुछ ठीक नहीं चल रहा है क्या?” उसकी मां ने अंश के सिर पर हाथ फेरते हुए बोला।

नहीं मा वो तो चलता रहता है, पर “जिस प्रोजेक्ट में मैं काम कर रहा हू, उसमें कुछ भी अच्छा परिणाम नहीं मिल रहा है।” अंश अपने दोनों हाथ सिर पर रखते हुए बोला।

अपनी बात को आगे पूरा करते हुए बोला कुछ महीनों से मैं एक प्रोजेक्ट पर बहुत मन लगा कर काम कर रहा था और मुझे पूरी उम्मीद थी कि वो काम हो जाएगा पर आज जब मैंने उसको अपनी बॉस को दिखाया उन्होंने मुझे इस प्रोजेक्ट पर और काम करने को कहा, वरना मुझसे ये प्रोजेक्ट लेकर किसी और को दे दिया जाएगा।

सुनीता बोली “तू फिक्र मत कर बेटा सब बढ़िया होगा *भगवान के घर देर है पर अंधेर नही*। चल अब कुछ खा ले फिर आराम कर लेना।

उधर अंश का मन तो नहीं था पर उसने फिर भी खाया और आराम करने चला गया।

रात में वो इधर से उधर होता रहा लेकिन उसको नींद नहीं आई।

फिर उसने अपनी वो फाइल खोली, उसको बार बार पढ़ा पर फिर भी कोई गलती उसको नहीं समझ आ रही थी।

अगला दिन हुआ वो भी वैसे ही गया।

ऐसे करते करते दिन गुजरे और समय कब निकला पता ही नहीं चला, और अंश ने अपनी प्रोजेक्ट का भी सब कुछ बदल दिया और जब उसने अपनी बॉस को दिखाया तो उसने फिर भी मना कर दिया और उसे बहुत दुख हुआ।

उसने आ कर अपनी मां को सब बताया और तब उसकी मां ने बोला “सब बढ़िया होगा, मुझे भगवान पर भरोसा है, तेरे लिए कुछ अच्छा ही लिखा होगा।”

एक दो महीना ऐसे ही निकला फिर अचानक से उसको एक बहुत बड़ी कंपनी से कॉल आया और वो उसको बहुत अच्छी सैलरी दे रहे और साथ में विदेश के आने जाने का खर्चा भी दे रहे थे और काफी आराम भी था। सबसे पहले उसने ये खबर अपनी मां को बताई और मां ने सुनते ही बोला “बेटा सबसे पहले भगवान को धन्यवाद करो, जो भी हुआ है सब उनकी वजह से ही हुआ है।”

अंश उधर अपनी मां को हा बोला और जैसे ही उनको धन्यवाद किया और प्रभु के दर्शन लिए तभी उसको खबर मिली कि जिस प्रोजेक्ट पर वो काम कर रहा था और उस से वो ले लिया गया है, उसकी वजह से बहुत बड़ा नुकसान हुआ है कंपनी को और इसी के चलते कॉम0अन्य काफी लोगों को निकाल रही है।

अंश ने उसको बोला “भगवान जो भी करते है अच्छे के लिए ही करते है और करते रहेंगे।”

*१ महीने बाद*

अंश अब अपनी नई कंपनी में काम कर रहा था और उसको और भी काफी अच्छे प्रस्ताव आ रहे थे उस कंपनी के प्रोजेक्ट्स को लीड करने के लिए। साथ ही में अब वो अपनी मां का भी ध्यान बड़े आराम से रख पा रहा था और पहले से कई ज्यादा खुश भी था।

लेखिका

तोषिका

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