आशीर्वाद

अंजलि अपना सूटकेस पैक कर रही थी। शादी के बाद यह उसका पहला सावन था और मायके जाने की खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी। पूरे एक महीने के लिए वह अपने बचपन की सखियों, माँ के हाथ के खाने और उस पुराने झूले के पास जाने वाली थी, जहाँ उसने अपनी ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत पल बिताए थे। लेकिन, कपड़ों की तह बनाते-बनाते अचानक अंजलि के हाथ रुक गए और उसकी नज़र खिड़की के पास खड़े अपने पति, विहान पर जाकर टिक गई। मायके जाने की खुशी तो बहुत थी, लेकिन सावन के इस सुहावने मौसम में विहान से पूरे एक महीने दूर रहने का खयाल उसके मन में एक अजीब सी उदासी घोल रहा था।

विहान ने अंजलि की खामोशी को पढ़ लिया। वह मुस्कुराते हुए उसके पास आया और धीरे से बोला, “कल सुबह रोहन (अंजलि का भाई) तुम्हें लेने आ रहा है ना? तुम्हारी पैकिंग तो ऐसे चल रही है जैसे एक महीने के लिए नहीं, बल्कि हमेशा के लिए मायके जा रही हो।”

अंजलि ने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “मायके जाने की खुशी तो है विहान, लेकिन अभी तो हमारी शादी को कुछ ही महीने हुए हैं। ऐसे मौसम में आपको यहाँ अकेले छोड़कर जाने का बिल्कुल मन नहीं कर रहा। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि आप भी मेरे साथ चलें?”

विहान ने हँसते हुए कहा, “पागल हो गई हो क्या? हमारी परंपराओं में पहला सावन लड़कियां अपने मायके में बिताती हैं और दामाद सिर्फ उन्हें विदा कराने या त्योहार के आखिरी दिन लेने जाते हैं। और वैसे भी, अगर मैं तुम्हारे साथ चला गया, तो माँ-पिताजी क्या सोचेंगे?”

अंजलि ने मायूस होकर अपना सिर झुका लिया। वह जानती थी कि समाज के कुछ दस्तूर होते हैं, जिन्हें निभाना पड़ता है। लेकिन विहान के मन में कुछ और ही चल रहा था। उसका काम आजकल लैपटॉप से ही होता था, और वह कहीं से भी अपनी ऑफिस की मीटिंग्स अटेंड कर सकता था। उसने मन ही मन एक फैसला कर लिया था।

रात के खाने के समय, पूरा परिवार डाइनिंग टेबल पर बैठा था। बाहर बारिश की तेज़ बूंदें खिड़की के शीशे से टकरा रही थीं। विहान ने अचानक चुप्पी तोड़ते हुए कहा, “माँ, मैं सोच रहा था कि कल जब अंजलि मायके जाए, तो मैं भी उसके साथ ही चला जाऊं। मेरा ‘वर्क फ्रॉम होम’ चल रहा है, तो काम में भी कोई दिक्कत नहीं आएगी।”

यह सुनते ही अंजलि की सास, कावेरी जी के हाथ का निवाला वहीं रुक गया। उन्होंने थोड़ी हैरानी से कहा, “बेटा, सावन में तो बहुएं अपनी सहेलियों और मायके वालों के साथ वक्त बिताती हैं। दामाद का इतने दिन वहां जाकर रहना क्या ठीक लगेगा? लोग क्या कहेंगे कि शादी के कुछ दिन बाद ही जोरू के पीछे-पीछे मायके पहुंच गया। दस्तूर तो यही है कि तुम सावन के अंत में उसे लेने जाना।”

अंजलि का दिल बैठ गया। उसे लगा कि अब विहान का जाना नामुमकिन है। लेकिन तभी विहान के पिता, प्रकाश जी ने अपनी चाय का कप नीचे रखते हुए एक गहरी और सुकून भरी हंसी हँसी।

“अरे कावेरी! तुम भी किन पुरानी बातों को लेकर बैठ गई,” प्रकाश जी ने अपनी पत्नी को समझाते हुए कहा। “ज़माना बहुत बदल गया है। बच्चे अभी नई-नई ज़िंदगी शुरू कर रहे हैं। सावन का यह रिमझिम मौसम, यह खुशियां, यह सब इनके लिए ही तो है। अगर दूरियों के कारण इनका मन उदास रहेगा, तो क्या वो दस्तूर किसी काम का है? जब विहान का काम प्रभावित नहीं हो रहा है, तो उसे अपनी पत्नी के साथ जाने दो। मुझे तो इस बात की खुशी है कि हमारा बेटा अपनी पत्नी की भावनाओं को समझता है।”

कावेरी जी ने अंजलि के खिले हुए चेहरे को देखा और उनके होठों पर भी एक प्यारी सी मुस्कान आ गई। “मैं तो बस दुनियादारी की बात कर रही थी। मुझे क्या ऐतराज़ होगा? जा बेटा विहान, अपनी अंजलि के साथ जा। मैंने समधन जी के लिए कुछ खास मिठाइयां और सावन के कपड़े भी निकाल कर रखे हैं, वो भी साथ लेते जाना।”

अंजलि ने दौड़कर अपनी सास के गले लग गई। उसकी आँखों में खुशी के आंसू थे। एक ऐसे परिवार का हिस्सा बनकर वह खुद को दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की मान रही थी, जहां परंपराओं से ज़्यादा भावनाओं की कद्र की जाती थी।

अगले दिन सुबह-सुबह रोहन अपनी बहन को लेने आ गया। घर में चाय-नाश्ते और हंसी-मज़ाक का दौर चला। जब निकलने का समय हुआ, तो विहान ने रोहन के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “साले साहब, ऐसा है कि आप अपनी गाड़ी से आराम से घर पहुंचिए। मैं और अंजलि एक दूसरी गाड़ी से आ रहे हैं। रास्ते में एक-दो खूबसूरत जगहें हैं, हम वहां मौसम का मज़ा लेते हुए कल शाम तक पहुंचेंगे।”

रोहन मुस्कुराया और अपनी गाड़ी से निकल गया। विहान और अंजलि ने भी अपना सफर शुरू किया। बारिश की फुहारें उनके चेहरे को छू रही थीं और गाड़ी में उनका पसंदीदा संगीत बज रहा था। उन्होंने रास्ते में एक खूबसूरत हिल रिसॉर्ट में रुककर एक दिन बिताया। हरे-भरे पहाड़, झरनों की आवाज़ और विहान का साथ—अंजलि को लग रहा था जैसे वह कोई सपना देख रही हो।

अगले दिन शाम को जब वे दोनों अंजलि के मायके पहुंचे, तो दरवाजे पर अंजलि के माता-पिता और छोटी बहन उनका इंतज़ार कर रहे थे। विहान को अंजलि के साथ देखकर उनके चेहरे की खुशी दोगुनी हो गई। पूरे घर में एक अलग ही रौनक छा गई। रात को जब सब आंगन में बैठे थे और हल्की-हल्की बारिश हो रही थी, तब अंजलि ने विहान के कंधे पर सिर रखते हुए धीरे से कहा, “मेरा यह पहला सावन हमेशा के लिए यादगार बन गया। मुझे पुरानी परंपराओं की कमी नहीं खल रही, क्योंकि आपने और आपके परिवार ने प्यार की एक नई रीत शुरू कर दी है।”

बारिश की वो बूंदें जैसे उनके इस नए रिश्ते को अपना आशीर्वाद दे रही थीं, और सावन की वह रात उनके जीवन की सबसे हसीन रात बन गई।

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