चटाक एक जोर का थप्पड़ नन्हे गोलू पर पड़ा, और सोनल जोर से चिल्लाने लगी ये क्या किया तुमने, मेरी पूरी लिपस्टिक खराब कर दी। निकलो मेरे कमरे से बाहर। और गोलू रोता हुआ कमरे से बाहर आकर माँ से लिपट गया। क्या हो गया बेटा मामी ने मारा, मामी ने मारा मगर क्यों, चलो अभी पूछती हूँ मामी से। भाभी वो भाभी आपने गोलू को क्यों मारा, अरे दीदी इसने मेरी लिपस्टिक खराब कर दी अरे वो तो बच्चा है उसे क्या पता अपनी चीजे संभाल कर रखो न।
संभाल कर ही रखी थी दीदी, आप अपने बच्चे को संभालिये उसे मेरे कमरे से दूर रखिये। अरे वो तो बच्चा है उसको क्या समझ सास पुष्पा जी बोली। मेरी चीजे खराब करता है कमरे मे आकर मै ये बरदाश्त नहीं कर सकती आप अपने बच्चे को संभालिये। पता नहीं दीदी रोज ही ससुराल से यहाँ आ जाती है सोनल बडबडाती हुई कमरे मे चली गई।
पुष्पा जी और रामकिशोर के परिवार मे तीन बेटे और एक बेटी थी। सभी का संयुक्त परिवार था। बड़ी बहू रचना के दो बेटियां थी। और वह बहुत सुशील और मृदुभाषी थी। सारा घर अच्छे से संभाल रखा था। घर मे सास ससुर को भी पूरा सम्मान देती थी। दूसरी बहू निशा उसके भी एक बेटा था पांच साल का।
और सबसे छोटी बहू सोनल थी, जिसकी अभी सात महीने पहले शादी हुई है। पुष्पा जी की बेटी नैना अपनी ससुराल मे थी। सोनल थोड़ी नकचढ़ी थी और पैसे वाले घर की थी। जब सोनल को परिवार देखने गया था तो पहली नजर मे ही सोनल रजत को पसंद आ गई थी।
सोनल इस घर मे सबके साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही थी। उसे तो इतने बड़े परिवार के साथ असल मे रहना ही नहीं था। उसने तो सोचा था कि शादी के बाद रजत से कहकर कंपनी से तबादला लेकर कहीं और अलग रहैगे परिवार से। लेकिन शादी के बाद ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। रजत सोनल का पति अपने परिवार के साथ बहुत खुश था।
हालांकि घर में बड़ी बहू सब कुछ संभाल लेती थी साथ में पुष्पा जी भी मदद कर देती थी। अभी तक सोनल को घर की बहुत जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी ।।उससे कहा गया था कि तुम ऊपर का काम करो, जैसे नाश्ता लगा दिया खाना परोस दिया फ्रिज वगैरा देख लिया। और ऊपर की जो छोटा मोटा काम है वो करना है।
लेकिन सोनल काम से जी चुराती थी और कमरे में ही बैठी रहती थी। उसे बस तैयार होकर इधर-उधर घूमने का शौक था। वह अपने मेकअप का सामान अपने कमरे में ड्रेसिंग टेबल पर सजाकर रखे रहती थी। जिससे वह सामानों को देखकर छोटे बच्चे आकर्षित होते थे । नंद नैना अक्सर घर आया करती थी उसका 3 साल का बेटा था ।
और नानी के घर आते ही बस दौड़कर सोनल के कमरे में पहुंच जाता था। क्योंकि उसको वहां पर बहुत सारा समान दिखता था। 2 दिन से नैना आई हुई थी ।।
उसका बेटा सोनल के कमरे में पहुंच जाता है। उसका बेटा सोनल के कमरे में जाकर उसका लिपस्टिक खराब कर आया। प्यार से समझने की बजाय सोनल ने उस बच्चे को थप्पड़ मार दिया। दूसरी जेठानी के बेटा भी सोनल के कमरे में जाता था लेकिन वह डर के मारे कुछ सामान नहीं उठाता क्योंकि उसको भी सोनल ने पहले से डांट रखा था।
गोलू को थप्पड़ मार देने से घर में पुष्पा जी और नैना बहुत नाराज थे , वह सोनल को भला बुरा कह रहे थे। इससे सोनल गुस्सा होकर कमरे में बैठी थी। जब रजत ऑफिस से आया और उसने पूछा कि क्या हुआ सोनल क्यों लेटी हो ,जाओ बाहर देखो दोनों भाभी काम कर रही है उनकी मदद करवाओ
। मैं नहीं जाऊंगी मुझे यहां सबके साथ नहीं रहना मुझे अकेले रहना है । तुम अलग मकान लो मैं इतने लोगों के बीच में परिवार में नहीं रह सकती । अपनी पूरी भडास निकाल दी रजत के ऊपर। सोनल ने सारी बात बता दी तो तुमने गलत किया है ना सोनल इतने छोटे बच्चों को मारते हैं क्या,
जो मेरी इतनी महंगी लिपस्टिक खराब कर दी उसका क्या। लिपस्टिक तो और आ जाएगी लेकिन तुम्हें मारना नहीं चाहिए बच्चे को ।
अच्छा अब तुम भी मुझे ही गलत बता रहे हो। देखो सोनम यह हमारा परिवार है और यहां हम सब मिलकर रहते हैं। एक दूसरे की भावनाओं का ख्याल रखते हैं, अकेले तो हम कुछ भी नहीं है ,बिना परिवार के हमारा कोई अस्तित्व नहीं है । सोनल चुपचाप सुनती रही लेकिन उसने मन में अब ठान लिया कि वह किसी तरह अलग रहने के लिए रजत को तैयार करेगी
। आज बड़ी बहू रचना की पिताजी नहीं रहे तो वह अपनी दोनों बेटियों को छोड़कर पति के संग मायके चली गई ।। दोनों बेटियों की देखभाल दूसरी दूसरी बहू निशा कर रही थी ।
निशा का 5 साल का बेटा भी अब स्कूल जाने लगा था ।आज उसकी बस नहीं आई थी । तो निशा ने सोनल से कह दिया सुनो तुम दोनों बच्चियों का लंच बॉक्स तैयार कर देना मैं जरा आसू को स्कूल छोड़ने जा रही हूं। उसकी बस नहीं आई है आज। इधर दोनों बच्चों के बस के आने का समय हो गया और सोनल ने टिफिन तैयार नहीं किया।
देर से कमरे से बाहर निकाल कर आई। टिफिन तैयार न होने की वजह से दोनों बच्चियों बिना टिफिन लिए स्कूल चली गई । अब निशा लौटकर आई तो देखा टिफिन वैसे ही पड़े हैं । उसने सोनल से पूछ लिया सोनल टिफिन नहीं दिया बच्चियों को क्या ,बनाने तो जा रही थी तब तक वह चली गई अरे बस आ गई होगी तो चली गई।
समय से बनाना चाहिए था ना । अरे भाभी मुझसे नहीं होता यह सब काम आप बनाकर जाती ना। मेरे पास समय नहीं था इसलिए तो मैं तुमसे बोला था । भाभी को बच्चियों को यहां छोड़कर जाना नहीं चाहिए था । अपने साथ ले जाना चाहिए था। अब कौन उनकी जिम्मेदारी उठाएगा।
जब शाम को ऑफिस से रजत आया पुष्पा जी ने सोनल की शिकायत रजत से कर दी । रजत गुस्से में गया और सोनल के ऊपर चिल्लाने लगा ,सोनल भी कहने लगी रजत अब मैं सबके साथ नहीं रहना चाहती तुम कहीं बाहर ट्रांसफर ले लो । और वहां चलकर रहो ।
रजत भी घर मे इस तरह से रोज रोज के कहा सुनी से तंग आ गया था।सोचने लगा जब तक सोनल नहीं आई थी तब तक तो सबकुछ अच्छे से चल रहा था। दोनों भाभियों अच्छे से सब कुछ संभाल लेती थी। समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें।
इधर सोनम रोज रजत के पीछे पड़ी थी कि कहीं और पर ट्रांसफर ले लो।। रजत ने भी यही सोचा कि कहीं ट्रांसफर ही ले लूं या कोई दूसरी कंपनी देख लूं। कोशिश करते-करते किसी दूसरी कंपनी में नौकरी में मिल गई । और उसने अपने शहर से दूर भी था । यह सुनकर सोनम बहुत खुश हुई चलो हम अकेले रहेंगे इतने सारे लोगों के साथ रहने से छुट्टी मिलेगी।
कल सोनम रजत अपने नए आशियाने में परिवार से दूर आ गए रहने के लिए। सोनल बहुत खुश थी। कुछ दिनों बाद सोनल प्रेग्नेंट हो गई अब घर में वह अकेली पड़ी रहती थी रजत तो ऑफिस चला जाता था। शुरू के कुछ दिन परेशानी के थे ,कभी उल्टियां आ रही थी तो कभी चक्कर आते थे घर में खाना नहीं बन पाता था।
रजत को बाहर खाना पड़ता था । यहां घर पर भी सोनल को देखने वाला कोई नहीं था। इसी तरह समय व्यतीत होता रहा और फिर डिलीवरी का समय नजदीक आने लगा तब रजत ने घर पर फोन किया । माँ तुम आ जाओ यहां पर सोनल की डिलीवरी होने वाली है। मां ने कहा मैं बेटा अकेली नहीं संभाल पाऊंगी तुम सोनल की मां को बुला लो।
सोनल की मम्मी को डिलीवरी के समय आना था। डिलीवरी डेट की कुछ दिन पहले सोनल की मम्मी को सोनल के यहां जिस दिन आना था वह स्टेशन पहुंच गई थी।
और गाड़ी प्लेटफार्म पर लग रही थी । जल्दी-जल्दी गाड़ी पकड़ने के चक्कर में वह चलते चलते जाने कैसे स्लिप हुई और वहां प्लेटफार्म पर गिर पडी और उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया हड्डी टूट गई । अब उनका कैंसिल हो गया आना। अब रजत परेशान हो गया कि क्या करें।
इतनी जल्दी कोई व्यवस्था न होने पर रजत सोनम को लेकर अस्पताल के लिए निकल रहा था, तभी जाने कैसे सोनम को चक्कर आया और वह गिर पड़ी और उसके पेट में असहनीय दर्द हो गया। किसी तरह रजत सोनल को अस्पताल लेकर पहुंचा । डॉक्टर उसको ऑपरेशन थिएटर में ले गए। रजत अकेले ही परेशान हो रहा था । ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने बताया कि गिरने की वजह से बच्चों के सिर में चोट लग गई है बच्चे का बचना मुश्किल है ।
परेशान होकर रजत ने घर में फोन किया मां को ,तो मां भी परेशान हो गई । फिर रजत की बड़ी भाभी और भैया आए रजत के पास । बच्चा नहीं बच सका उसका बड़ा अफसोस रहा। फिर उन्हें कुछ दिन तक उसको उनको संभालना था।
अस्पताल से छुट्टी होने के बाद सोनल को रचना घर ले आई ।और फिर घर मे सबका अपनापन पाकर ठीक होने लगी सोनल । सोनल रो रही थी अब पुष्पा जी उसे समझा रही थी देखो परिवार के साथ रहने में बड़ी ताकत है। परिवार के हाथ पकड़ कर रहोगे तो किसी के पैर पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।
तुमने परिवार के महत्व को नहीं समझा है । यहां तुमको सबके साथ रहने में परेशानी थी । तुम अलग रहने चली गई और अपना बच्चा खो दिया। यहां रहती सबके साथ तो कुछ नहीं होता हम सब मिलकर तुम्हारा ख्याल रखते तो तुम्हे कुछ न होता।
मुझसे गलती हो गई मम्मी जी, मुझे माफ कर दे। अब मुझे समझ आया परिवार का महत्व। मैं आप सबसे माफी मांगती हूँ अब मै यही रहूगीं सबके साथ कहीं नहीं जाऊंगी। पुष्पा ने सोनल को गले से लगा लिया।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
22 जून