भरोसा – विनीता सिंह

गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था, जहाँ 14 साल की अनाया अपनी माँ के साथ रहती थी। उसके पिता कई साल पहले शहर कमाने गए थे,  फिर कभी लौटकर नहीं आए। माँ सिलाई करके घर चलाती थीं और अनाया पास के सरकारी स्कूल में पढ़ती थी। , माँ-बेटी के बीच बहुत प्यार और भरोसा था।

अनाया की माँ हमेशा कहती थीं, “बेटा, इंसान की सबसे बड़ी दौलत भरोसा होता है। अगर कोई तुम पर भरोसा करे, तो उसे कभी टूटने मत देना।”

अनाया अपनी मां की  बातों को दिल से मानती थी।

एक दिन स्कूल में वार्षिक परीक्षा का परिणाम आने वाला था। अनाया पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और पूरे स्कूल को उम्मीद थी कि वह फिर से प्रथम आएगी। उसकी सबसे अच्छी दोस्त रिया भी उसी कक्षा में पढ़ती थी। दोनों साथ बैठतीं, साथ खेलतीं और हर बात एक-दूसरे से साझा करती थीं।

परिणाम वाले दिन कक्षा में हलचल थी। अध्यापिका ने जैसे ही घोषणा की कि इस बार अनाया प्रथम आई है, पूरा कमरा तालियों से गूँज उठा। लेकिन रिया चुप थी। उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी। वह इस बार बहुत पीछे रह गई 

उस दिन के बाद रिया धीरे-धीरे अनाया से दूर रहने लगी। अनाया को समझ नहीं आ रहा था कि उसकी दोस्त अचानक इतनी बदल क्यों गई।

कुछ दिनों बाद स्कूल में एक घटना हुई। प्रधानाचार्य के कमरे से कुछ पैसे गायब हो गए। पूरे स्कूल में हड़कंप मच गया। जाँच शुरू हुई। तभी किसी ने कहा कि घटना के समय अनाया को वहाँ के पास देखा  था।

यह सुनते ही सबकी नज़रें अनाया पर टिक गईं। अध्यापकों को भी विश्वास नहीं हो रहा था। अनाया रोते हुए बार-बार कहती रही, “मैंने कुछ नहीं किया।”

लेकिन सबसे बड़ा झटका उसे तब लगा, जब रिया ने भी कहा, “, मैंने भी अनाया को वहाँ जाते देखा था।”

यह सुनकर अनाया का दिल टूट गया। जिस दोस्त पर उसने सबसे ज्यादा भरोसा किया था, वही उसके खिलाफ खड़ी थी।

घर पहुँचकर अनाया बहुत रोई। माँ ने उसे गले लगाकर पूछा, “क्या हुआ बेटा?”

अनाया ने सारी बात बता दी। माँ ने उसके आँसू पोंछे और शांत आवाज़ में बोलीं, “अगर तुम सच्ची हो, तो डरने की जरूरत नहीं। सच्चाई पर भरोसा रखो।”

अगले दिन स्कूल में फिर जाँच हुई। प्रधानाचार्य ने सभी बच्चों के बैग चेक करवाए। तभी एक बच्चे के बैग से पैसे मिल गए। वह बच्चा डर के मारे रोने लगा और बोला, “मैंने ही पैसे लिए थे… मुझे लगा कोई पकड़ नहीं पाएगा।”

पूरा सच सामने आ गया। सभी को अपनी गलती का एहसास हुआ। अध्यापिका ने अनाया से माफी माँगी। लेकिन रिया सबसे ज्यादा शर्मिंदा थी।

स्कूल की छुट्टी के बाद रिया रोती हुई अनाया के पास आई और बोली, “मुझे माफ कर दो। मैं तुमसे जलने लगी थी। जब सब तुम्हारी तारीफ करते थे, तो मुझे लगता था कि मैं तुम्हारे सामने कुछ नहीं हूँ। गुस्से में मैंने तुम्हारे खिलाफ झूठ बोल दिया।”

अनाया की आँखों में आँसू आ गए। उसने धीरे से कहा, “रिया, गलती पैसे चुराने वाले बच्चे से ज्यादा तुम्हारी थी। क्योंकि उसने पैसे चुराए थे, लेकिन तुमने भरोसा तोड़ा था।”

रिया सिर झुकाकर खड़ी रही।

कुछ देर बाद अनाया ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली, “अगर इंसान अपनी गलती मान ले, तो उसे दूसरा मौका मिलना चाहिए।”

रिया फूट-फूटकर रोने लगी।

 उस दिन दोनों सहेलियाँ फिर से साथ घर लौटीं, अब उनके रिश्ते की नींव पहले से ज्यादा मजबूत थी।

उस रात अनाया अपनी माँ के पास बैठी थी। माँ ने मुस्कुराकर पूछा, “अब समझ आया भरोसे की कीमत क्या होती है?”

अनाया ने धीरे से सिर हिलाया और कहा, “हाँ माँ, भरोसा टूट जाए तो बहुत दर्द होता है… लेकिन सच्चा भरोसा वही होता है, जो मुश्किल समय में भी साथ न छोड़े।”

माँ ने उसे गले लगा लिया। बाहर आसमान में चाँद चमक रहा था, जैसे वह भी इस बात का गवाह हो कि दुनिया में सबसे कीमती चीज़ अगर कुछ है, तो वह है — भरोसा।

विनीता सिंह

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