नीता ओ नीता अवनि और आकाश आ गए क्या, उनसे कह दो थोड़ी देर मेरे पास आकर बैठे। और तुम भी नहीं बैठती मेरे पास बस दिनभर काम का बहाना बना कर मुझसे दूर दूर रहती हो, अमित आवाजें दे रहा था, लेकिन कोई सुन नहीं रहा था। ये रोज का हो गया था अमित बस आवाजें देता रहता है कि कोई तो बैठो मेरे पास थोड़ी देर को लेकिन कोई नहीं आता।
नीता और उसके दोनों बच्चे अवनि और आकाश तीनों लोग बैठकर गपशप करते और साथ साथ खाना खाते और इधर अमित अकेले अकेले बिस्तर पर पड़ा रहता। , और उन सबकी हंसी ठिठोली और बातचीत सुनता रहता। पर उसके पास कोई न बैठता था।
अमित लेटे लेटे सोच रहा था मैंने भी तो ऐसा ही किया है इन लोगों के साथ। जब इनको जरूरत थी मेरी तो मै भी तो इनको समय नहीं देता था। नीता कहती रहती बच्चों को समय दिया करो अमित नहीं तो एक दिन ए भी तुमसे दूर हो जाएगें। लेकिन अमित नहीं सुनता था आखिर हम जो बोते है जीवन मे वही तो काटते है ं ।
आज अवनि का छठवां जनमदिन था। घर पर थोडे लोगों की पार्टी रखी हुई थी। ज्यादा लोग नहीं पाचं छै फैमिली और कुछ कालोनी के आसपास के बच्चों की इन्वाईट किया था।
केक भी सज गया था सारी तैयारी हो चुकी थी। अवनि सुंदर सी फ्राक पहने इधरउधर घूम रही थी। हल्के से म्यूजिक मे सभी बच्चे मस्ती कर रहे थे। साढे़ आठ बजे गए थे नीता अमित को बार बार फोन कर रही थी, लेकिन अमित फोन नहीं उठा रहा था। बाहर आकर बर्थ डे र्गल अवनि मां से पूछ रही थी मम्मी पापा कब आएगें। आते होगे बेटा नीता परेशान थी
अंदर गई तो सभी पूछने लगे भाभी जी केक कब कटेगा देर हो रही है सुबह बच्चों को स्कूल भी जाना है। अब नीता क्या जवाब दे समझ नहीं आ रहा था।
बस थोड़ी देर और थोड़ा सा इंतजार और कहकर सबको रोके हुए थी। नीता ने सोचा एक बार और कोशिश कर लेती हू अमित को फोन करके शायद उठा ले। और इस बार अमित का फोन उठ गया।
अमित कब आओगे सब लोग इंतजार कर रहे है देर हो रही है। बार बार अवनि पूछ रही ह कि पापा कब आएगें। देखो नीता अभी मै बहुत व्यस्त हूँ अभी नहीं आ सकता तुम किसी तरह मैनेज करो। अवनि को समझा बुझा कर केक काट दो मै कोशिश करता हूँ जल्दी आने की और फोन कट हो गया।
अंदर जाकर नीता ने अवनि से कहा बेटा चलो केक काटते है लेकिन मम्मी पापा तो आए नहीं वो थोड़ी देर में आएगें बेटा, नहीं मै पापा के बिना केक नहीं काटूगीं। फिर बहुत समझाकर नीता ने केक काटा और फिर पार्टी शुरू हुई। पार्टी निपट गई और सब लोग अपने घर भी चले गए और अमित नहीं आए।
पर, नीता को पता था कि अमित नहीं आएगा, एक बार उसने मना कर दिया तो मुश्किल ही है आना। बहुत समझाने बुझाने के बाद अवनि तैयार हुई केक काटने को, और माँ से बोल रही थी मम्मी आप पापा से कह देना अवनि कट्टी है पापा से।
केक कट गया सब खा पीकर अपने अपने घर चले गए। अवनि और आकाश भी सो गए। अब अमित ने घर मे प्रवेश
किया तो रात के दो बज रहे थे। नीता ने पूछा खाने को तो अमित बोला खाकर आया हूँ बहुत थक गया हूँ बस सोना चाहता हूँ। अमित तुमने अच्छा नहीं किया घर मे सबको बुलाकर तुम गायब हो गए ऐसे अच्छा थोडे ही लगता है। अवनि कितनी नाराज हो रही थी इस तरह से बच्चों को नाउम्मीद करना ठीक नहीं है
अमित फिर बच्चे भी मां बाप से दूर हो जाते है। अच्छा अच्छा ठीक है यार इतना लेक्चर मत दो काम मे उलझा हुआ था सो नही आ पाया। अब काम ज्यादा जरूरी है कि बर्थडे । मै बहुत थक गया हूँ सोने दो मुझे परेशान न करो।
अमित का मोटर पार्ट्स का होलसेल का बिजनेस चलता है इसी में व्यस्त रहता है। हां बिजनेस में तो व्यस्त रहता है लेकिन कुछ समय पहले उसके संग पढ़ने वाली एक लड़की अनीता किसी रेस्टोरेंट में मिल गई थी तब से खूब बातें होने लगी थी अमित की।
और एक बार तो अमित ने अमित को अनीता के साथ घूमते हुए भी देख लिया था नीता और बच्चों को समय नहीं देता कहीं ना जाने का बहाना बना देता।
काम में व्यस्त है इतनी व्यस्तता नहीं थी पहले आ भी जाते थे घर बच्चों की फरमाइश पर। पर इधर कुछ दिनों से कुछ ज्यादा ही व्यस्त हो गया है अब अब घर और बच्चों को बिल्कुल भी समय नहीं देते अपना बचा हुआ समय अनीता के साथ बिताने लगे हैं।
अमित के दो बच्चे हैं अवनी 6 साल की और आकाश 4 साल का है अवनी और आकाश के स्कूल में पेरेंट्स टीचर मीटिंग में भी अमित नहीं जाता नीता ने जब भी अमित से पूछा चलने को तो उसने साफ मना कर दिया अब की तो यह सब काम तुम्हारा है अभी तुम ही निपटारा करो मेरे पास समय नहीं है इन छोटे-छोटे कामों का, हां मैं जानती हूं
तुम कहां व्यस्त हो अमित क्या मतलब तुम्हारा मैं जानती हूं अमित इस तरह जब भी कहीं जाना होता है या बच्चों को कोई काम होता है अमित टाल देता था पहले ऐसा नहीं होता था।
लेकिन इधर कुछ दिन से कुछ ज्यादा ही व्यस्त होता दिखने लगा है बच्चे भी हर वक्त पूछते रहते हैं मम्मी पापा हमारे स्कूल क्यों नहीं आते बच्चों को टीचर भी कह रही थी कि बच्चों के पापा को स्कूल बच्चों के स्कूल आना चाहिए उन्हें भी तो पता होना चाहिए क्योंकि बच्चे क्या एक्टिविटीज कर रहे हैं।
नीता के छोटी बहन की शादी थी और उसी की सगाई में जाना था नीता ने अमित से पहले ही बता दी थी अमित जाने का वादा भी किया था लेकिन नीता को इंतजार करते-करते बहुत देर हो गई फिर नेता अकेले ही चली गई कैब लेकर अमित फंक्शन में देर से भी नहीं पहुंचा।।घर वापस आने पर अमित और नीता में कहा सुनी हो गई
अमित अब तुम हम लोगों को इग्नोर करने लगे हैं इतनी व्यस्तता दिखते हो बहन की शादी के फंक्शन में भी नहीं आए हां तो काम था तो नहीं आया, हां हां मैं जानती हूं
अमित तुम किस काम में व्यस्त हो क्या मतलब है तुम्हारा, तुम अपनी पुरानी क्लासमेट अनीता के साथ व्यस्त होना अरे नहीं ऐसी बात कर रही हो तुम दिमाग नहीं खराब हो गया है मेरा दिमाग नहीं खराब हो गया है मेरा । उसे दिन जब अवनी के बर्थडे का सामान लेने में बाजार गई थी
तो मैं तुम्हें और अनीता को एक रेस्टोरेंट में कॉफी पीते हुए देखा था बहुत दिनों बाद मिले थे हम दोनों तो काफी पीने बैठ गए इसमें बुराई क्या है बिजनेस से व्यस्त हो तो ठीक है मुझे मंजूर नहीं है अमित।
नीता के मना करने के बाद भी अमित और अनीता की नजदीकियां कम नहीं हो रही थी नीता बहन की शादी में व्यस्त हो गई थी अपनी चोरी पकड़ी जाने की वजह से अमित साली की शादी एक दो फंक्शन अटेंड कर लिए थे लेकिन अब घर की शादी जिम्मेदारी नीता को ही करनी पढ़ती थी और बच्चों की
अब धीरे-धीरे आदत पड़ गई थी बिना पापा के, क्योंकि हर काम नीता ही करती थी पापा बच्चों के स्कूल में कभी किसी काम में साथ नहीं होते थे। बच्चों ने भी पापा को पूछना बंद कर दिया जो भी काम होता है वह अपनी मम्मी से पूछते या खुद कर लेते हैं।
बच्चे अब बड़े हो गए थे उनका क्या पढ़ाई करनी है किसने कर दिया बनाना है सब कुछ खुद ही देखते थे और पापा के परवह नहीं करते थे कभी पूछते भी नहीं थे तभी अचानक से अमित को बिजनेस में ऐसा घाटा लगा कि वह जमीन पर आ गया बिजनेस टूट गया घर में आर्थिक परेशानी आ गई।
यह झटका अमित को बर्दाश्त नहीं कर सका और उसको पैरालिसिस का अटैक आ गया और बिस्तर पर आ गया। अब घर में बड़ी परेशानी हो गई तो अवनी और आकाश दोनों नौकरी करने लगे थे घर में सपोर्ट हो गया था। अब अमित बिस्तर पर पड़े रहते थे
बच्चों को आते जाते देखते रहत देखते रहते थे की अवनी और आकाश कहां है मेरे पास आते नहीं है मेरे पास बैठे नहीं है मेरा हाल-चाल नहीं पूछते तो । क नीता को कहते तो क्या है तो क्या इतना भी समय नहीं है उनके पास एक बीमार बाप का हाल-चाल पूछ सके और नीता तुम भी मेरे पास कमी बैठी हो बच्चों के संग बैठकर हस्ती बोलती रहती हो
उनके संग बैठकर खाना खाती हो बस तुम कमरे में दवा और खाना देने मुझे आती हो मैं अकेला पड़ा रहता हूं पास तो तुम भी नहीं बैठती मेरी परवाह नहीं है किसी को नीता मन ही मन सोचने लगी अभी तुमने जो बोया है वही तो काट रहे हो
याद करो जब बच्चों को तुम्हारी जरूरत थी पापा पापा करते थे और मैं तुम्हें हर समय पूछती रहती थी तुम समय नहीं देते थे। अब बच्चों की मन मे भी ये बातें घरकर गई है बच्चे तुम्हें पूछे जैसे तुम उन्हें समय नहीं तुम उनके पास नहीं होते थे और मैं भी तो अपना मन में सोच कर रहती थी
और तुम तुम अपने काम और उसने अनीता के संग व्यस्त रहते थे अब सबकुछ याद आ रहा है। क्या सोच रही हो नीता नीता हां कुछ नहीं देखों अमित इंसान जो बोता है वही काटता है तुमने जैसा किया है उसी का फल तो मिल रहा है जैसा बोया है वैसे ही तो काटोगे।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
21 मई