छोटा भाई है तो भाई ही रह बाप न बन मेरा – मंजू ओमर   

कहाँ से आ रहे हो तुम इतनी रात को, क्यों तू मुझसे सवाल जवाब कर रहा है, देख तू छोटा है मुझसे तो छोटे की तरह रह मेरा बाप बनने की कोशिश न कर। जब से अनिल जी गए है इस दुनिया से तब से रोज का ही किस्सा हो गया है इस घर मे रोज दोनों भाइयों में कहा सुनी और तू तू मैं मैं होती रहती है। ऐसे माहौल से मम्मी सुमन परेशान हो गई थी।

बहुत समझाती थी क्यो लडते रहते हो ऐसे तुम दोनों। लेकिन नहीं ये तो रोज का  ही माहौल बन गया था घर का। बडा बेटा विकास और छोटा आकाश दोनों तू तू मैं मै करने से बाज नही आते थे। रोज ही सुमन को दोनों के बीच मे पडकर बीच बचाव करना पड़ता था।

सुमन छोटे भाई आकाश को समझाती रहती देख बेटा विकास तुम्हारा बड़ा भाई है तू हर समय उसको टोकेगा तो उसे कैसे अच्छा लगेगा। माँ मै ऐसे ही नहीं टोकता विकास भइया को। वो बड़े जरूर है हमसे लेकिन अपनी जिम्मेदारी यो का जरा भी अहसास नहीं है।

और उनकी आदतें भी सही नहीं है, उनके दोस्त भी सही नहीं है। मैने उनको कुछ गलत करते हुए देख लिया था इसी लिए टोक रहा था। माँ यदि हम छोटे हुए तो क्या बडे कुछ गलत करे तो उन्हें रोक तो सकते है। तो इसमें कौन सी बड़ी बात है कि यदि छोटे ने बड़े को किसी गलत काम के लिए टोक दिया तो व़ बाप बन गया।

वो कौन सा पापा की भी बात सुन लेते थे। माँ आप ही समझाइये मुझसे तो न देखा जाता है मै तो टोकूगां। ऐसी हरकते क्या आपको शोभा देती है, कितनी बदनामी होती है कि देखो मास्टर जी का बेटा है और कितनी ओछी हरकत कर रहा है। 

        अनिल और सुमन के परिवार मे दो बेटे विकास और आकाश थे। सुमन एक गृहणी और अनिल जी स्कूल में मास्टर थे। तनख्वाह कम थी लेकिन सुमन को सिलाई कढ़ाई अच्छी आती थी तो वो आसपास के लोगों के कपड़े सी लेती थी तो सब मिलाकर घर चल जाता था। बहुत ज्यादा की इच्छा भी नहीं थी।

अनिल जी सोचते थे घर मे पैसा तो ज्यादा नहीं है लेकिन लक्ष्मी से ज्यादा सरस्वती की जरूरत है। क्योंकि पैसा कम हो तो चल जाता है लेकिन यदि पढाई लिखाई ढंग से नहीं हो तो फिर कुछ नहीं हो सकता। भविष्य अंधकार मय हो जाता है। इसलिए अनिल जी विकास और आकाश के पढाई लिखाई पर बहुत ध्यान देते थे। पढ़ लिख जाए दोनों बेटे तो कुछ न कुछ तो कर ही लेगें अपने जिविकोपार्जन के लिए।

लेकिन विकास का मन न लगता था पढाई लिखाई में। विकास अब सत्रह साल का हो गया था, इंटर की परीक्षा मे वो इस बार फेल हो गया। घर मे सब लोग उसे बहुत समझाते थे पर वो सुनता ही न था। उसकी दोस्ती भी कुछ अच्छे लडको के साथ न थी। वो ज्यादा समय अपने उन्ही दोस्तों के संग बिताया करता था। 

      छोटा आकाश भी अब पंदरह साल का ह़ गया था। वो स्कूल आते जाते देखा करता था अपने भाई को आवारा गर्दी करते हुए उसे अच्छा नहीं लगता था। विकास ज्यादा तर स्कूल आते जाते लडकियों को छेडा करता था, या लडकियों के स्कूल के सामने खडा़ रहता था और उन पर फब्तियां कसता था।

इसकी शिकायत घर पर अपने माता पिता से भी आकाश कर चुका था। लेकिन विकास सुधरने का नाम ही न ले रहा था। व़ पढाई लिखाई से दूर होता जा रहा था और इस तरह के गंदे कामों मे ही अपना समय बर्बाद कर रहा था। 

      पिता अनिल बहुत चिंतित रहते थे विकास के भविष्य को लेकर क्योंकि वो रस्ते पर नहीं आ रहा था। अनिल ने तय किया कि विकास के दोस्तों से कल मिल कर उन्हें ही समझाएगें कि ये सब गंदे काम छोडो और अपने पढाई लिखाई पर ध्यान दो आगे कुछ काम धंधा करना है।

अच्छी नौकरी करो अपना भविष्य सुधारों नहीं तो जीवन भर भटकते रहोगे। और इस तरह से किसी के घर की बेटियों से छेड़छाड़ करना अच्छे घर के लडकों को शोभा नही देता। ऐसे संस्कार तो नहीं है घर के। ये हमारी सभ्यता नहीं है। ये अच्छी बात नहीं है। रात मे पत्नी सुमन से कहकर सोए कि कल जाऊंगा विकास के दोस्तों के पास समझांऊगा सबको। लेकिन अनिल जी रात को सोए तो सोते ही रह गए।

सुबह जब देर तक सोकर नहीं उठे तो पत्नी सुमन ने उनको जगाने की कोशिश की लेकिन उनका सिर तो एक तरफ लुढक कर रह गया। डाक्टर को बुलाया गया जिसने उन्हें मृत घोषित कर दिया और बताया कि सुबह सुबह साढ़े तीन चार बजे ह्रदय आघात हुआ और उसी मे उनकी मृत्यु हो गई। 

          पिता की मृत्यु के बाद भी विकास की आदतें नहीं बदली और आकाश ग्रेजुएशन करके उसी पिता के स्कूल मे पढाने लगा और पढने मे भी होशियार था तो 10,12 के बच्चों को कोचिंग भी देने लगा। इस तरह से आकाश ने पिता के ं रहने पर भी अपनी पढाई लिखाई के भरोसे घर की आर्थिक स्थिति को संभाल लिया था। विकास अब भी रास्ते पर नहीं आ रहा था। इसी बीच विकास के कुछ दोस्तों की शादी हो गई और वो घर और पत्नी और परिवार के 

 दबाव मे आकर बाहर जो गलत और फालतू के काम करते थे उसमें कमी आ गई। अब वो घर जाने और पत्नी और घर के प्रति जिम्मेदार होने लगे। यहाँ घर पर भी आकाश के अच्छे स्वभाव और काम को देखकर रिश्ते आने लगे। अब विकास को अपनी गलती समझ आने लगी। उसको बहुत गुस्सा आने लगा कि बड़ा तो

मै हूँ और शादी के लिए रिश्ते छोटे के आ रहे है। उसने ये बात एक दिन मा सै कही तो सुमन ने कहा जब तू सुधरता नहीं है, गलत कामों मे पडा हुआ है। पढाई लिखाई मे तेरा मन नहीं लगा। तेरे पापा तूझे कितना समझाते रहे और छोटा आकाश भी कितना मना करता रहा लेकिन तू नहीं माना। तू छोटे को तो डाटं देता था कि छोटा है तो छोटा रह मेरा बाप बनने की कोशिश न कर। तो परेशान होकर सबने तुझसे कुछ कहना सुनना बंद कर दिया‌

कि तूझे जैसा दिखे वैसा कर। तूझे अपनी जिंदगी बर्बाद करनी है तो कर अब मै क्या कर सकती हूँ। अब तो तेरे पापा भी नहीं रहे बड़ा होने के नाते घर की जिम्मेदारी तूझे निभानी चाहीए थी तो तूने तो मुंह मोड लिया है। अब सारी जिम्मेदारी आकाश उठा रहा है। जा तूझे जैसे जीना है जी अपनी जिंदगी मै कुछ नहीं कर सकती। 

           माँ की ऐसी बातें सुनकर विकास रात भर सोचता रहा। नींद नहीं आई उसे रातभर। सोचता रहा यार धीरे धीरे दोस्त भी सारे समझ गए। सबकी शादी हो  रही है परिवार बस रहा है। एक मै ही आवारा की तरह घूम रहा हूँ। दोस्तों से कहा विकास ने क्या यार मेरा साथ छोड़ दिया तो दोस्त कहने लगे यार ये सब जो हम लोग कर रहे थे आवारा गर्दियां यै सब तो नई नई उम्र का तकाजा था। अब जिंदगी को पटरी पर लाना है तो सब गलत काम छोडने पडेगे तभी परिवार बनेगा और परिवार मै इज्जत बनेगी। कबतक सब फालतू काम करते रहेगें‌। समय  निकल जाने पर बस पछताना पडेगा‌। फिर कुछ नहीं हो सकता। 

           विकास कई रातों तक जाग कर मंथन करता रहा और सोचता रहा क्यों अपनी जिंदगी को यू ही बर्बाद करना सब अपने अपने काम पर लग गए। मुझे भी कुछ करना चाहिए। कबतक घर मे बोझ बना रहूँगा। फिर आज सुबह दृढ निश्चय करके विकास काम की तलाश में निकल पडा। पढा लिखा तो था नहीं ज्यादा बस इंटर ही था तो कहाँ से कोई अच्छी नौकरी मिलती। वही काम कर सकता था जहाँ पढाई लिखाई की जयादा जरूरत न हो। 

         कई दिनों की मेहनत के बाद एक आफिस में चौकीदार की नौकरी मिली। वही ले लिया। जब मन मे दृढ संकल्प हो तो इंसान कोई भी काम कर सकता है बस काम होना चाहिए। 

           आज एक महीने के बाद आठ हजार रूपये लाकर विकास ने माँ के साथ मे रख दिया तो माँ दंग रह गई। कहाँ से लाया ये पैसे किसी गलत काम के तो नहीं है। नहीं माँ अब मैने सारे गलत काम छोड दिया है मै अब सुधर गया हूँ। तेरा बेटा नौकरी करने लगा है उसी से पेसे लाया हूँ। सुमन ने बेटे को गले से लगा लिया। विकास तू रास्ते पर आ गया है बहुत बहुत शुक्रगुज़ार हूँ ऊपर वाले का। आज तेरे पिता जिंदा होते तो कितना खुश होते तूझे इस हालत मे देखकर। इतने मे छोटा आकाश भी आ गया ये क्या सुन रहा हूँ मै भइया, तू सही सुन रहा है छोटे। यदि तू मुझे दिनरात न टोकता और मै तूझे पूरे घर की जिम्मेदारी उठाते न देखता तो मै कभी भी रास्ते पर श्रन्गार आता। मै तूझे हमेशा डांट देता था कि तू छोटा है तो छोटा बन कर रह मेरा बाप बनने की जरूरत नहीं है। मुझे माफ कर दे छोटे मे नै तुझे गलत समझा। तू और पापा मुझे सही रासते पर लाना चाहते थे लेकिन मै भटक गया था। आज मै समझा कभी कभी छोटे भी बडो को सही रास्ता दिखा जाते है, जैसे तू और सब गले लगकर हंस पडे। घर मे खुशियाँ फैल गई। 

मंजू ओमर 

झांसी उत्तर प्रदेश

, 9 मई 

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