कमलेश, कुछ भी करके भाभी के मायके वालों से बातचीत करवा दे वरना घर बिगड़ जाएगा मेरे भाई का।
अब मैं कैसे बात करवा दूँ जब तेरी माँ ने बहू के साथ मारपीट करके घर से निकाला था तब इस बात का ख्याल नहीं आया था कि बेटे का घर बिगड़ जाएगा। उन्होंने तो बड़े घमंड से कहा था कि चार दिन में बेटे का ब्याह करके दिखा देगी, अब तुम क्यों मेरे सामने गिड़गिड़ा रही हो?
कमलेश, तुझे तो पता है कि माँ पुराने जमाने की है, थोड़ी गुस्से वाली है…..
थोड़ी गुस्से वाली? उन्हें तो बोलने की तमीज तक नहीं। मैंने तो तुझे देखकर रिश्ता करवा दिया था पर मुझे क्या पता था कि तेरी माँ निपट गंवार है….
शोभना को बुरा तो लग रहा था, कमलेश का माँ को भला बुरा कहना पर माँ ने गंगा भाभी के साथ जो व्यवहार किया था, कमलेश का गुस्सा जायज़ था और वो भी भाई की अनुपस्थिति में…. ऊपर से भाभी माँ बनने वाली थी।
हाँ…. मैं जानती हूँ। पर कमलेश, लड़ाई झगड़े किस घर में नहीं होते । एक बार बात तो करवा दे नहीं तो ऐसा कर कि एक बार मेरे साथ वहाँ चल पड। मैं खुद माफी मांग लूँगी।
शोभना, जितनी सफाई तू उतार रही है ना अब, उतनी मैं ना उतार सकती। अब तो अपनी माँ के साथ दूसरे ब्याह की तैयारी में लग जा पर उससे पहले पूरे परिवार को मजा चखा देंगे वे लोग।
इतना कहकर कमलेश ने फोन रख दिया। शोभना ठगी ही रह गई। उसे चुप देख माँ बोली-
करवा ली बेइज्जती, मैंने पहले ही कहा था कि कोई फोन-फान करने की जरूरत ना है। पर ना… तुझे तो माँ पे भरोसा ही ना है।
माँ, थोड़ी देर चुप रहो मेरा सिर भड़-भड़ कर रहा है। सारा करा धरा तो तुम्हारा ही है, अगर कोई मेरे साथ ऐसा करे तो तुम्हें कैसा लगेगा?
माँ बड़ बड़ करती उठकर चली गई। अरविंद की शादी साल भर पहले हुईं थी। गंगा और अरविंद की मुलाकात दिल्ली में उस समय हुई जब दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। एक साल बाद अरविंद का एयरफोर्स में चयन हो गया पर गंगा को घर वापस बुला लिया क्योंकि किसी ने अरविंद के साथ उसकी दोस्ती को खूब नमक मिर्च मसाला डालकर घरवालों के सामने परोसा था।
गंगा के माता- पिता जल्दी से जल्दी उसका विवाह करना चाहते थे इसलिए गंगा ने अरविंद के ऊपर शादी का दबाव बनाया। अरविंद इतनी जल्दी शादी के लिए तैयार नहीं था पर गंगा ने कसम खाई थी कि वो जान दे देगी पर इस बदनामी के बाद किसी ओर से शादी नहीं करेगी। अरविंद के माँ बाबा तो इस शादी के खिलाफ थे पर भाई और गंगा के लिए शोभना ने खोज- खबर निकाल कर अपने साथ पढ़ाने वाली कमलेश से इसका जिक्र किया और फिर अपनी दूर की भतीजी लगने वाली गंगा से कमलेश ने अरविंद का विवाह करवा दिया।
शादी के फौरन बाद अरविंद गंगा को छोड़कर चला गया। गंगा ससुराल में सास की सारी उल्टी सीधी बातें इसलिए सहन करती थी क्योंकि अरविंद और शोभना दोनों ने मानसिक रूप से उसे समझाया था कि शुरुआत में माँ से सामान्य व्यवहार की उम्मीद ना करे।
गंगा अपनी तरफ से सास को खुश रखने की पूरी कोशिश करती थी, वह अरविंद से भी कभी शिकायत ना करती, महीने में एक आध बार शोभना भी चक्कर लगाती और माँ को समझाती तथा गंगा का मनोबल बढ़ाती।जब शादी के छ: महीने बाद अरविंद घर आया तो एक महीने का पति का साथ पाकर गंगा पिछले सारे गिले शिकवे भूल गई।
अरविंद के जाने के महीने बाद ही गंगा ने नए मेहमान के आने की खुश खबरी दी। सास ने किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, हाँ बाबा, शोभना और अरविंद खुशी से नाच उठे। अरविंद ने शोभना से जल्दी-जल्दी घर जाने का निवेदन किया ताकि गंगा के खाने-पीने और उसकी सही जानकारी अरविंद को मिलती रहे क्योंकि घर जाने पर वह समझ गया था कि गंगा माँ के व्यवहार के बारे में सही से नहीं बताती है।
शोभना का स्कूल उसके मायके से ज्यादा दूर नहीं था इसलिए भाई के कहने पर वह हर पंद्रहवें दिन घर आ जाती थी पर एक हफ्ता पहले सरकारी कार्यशाला की वजह से उसे बाहर जाना पड़ा और सारा काम बिगड़ गया।
दरसल कई दिनों से गंगा का मन कुछ चटपटा सा बाहर का खाने को कर रहा था लेकिन वह शोभना का इंतजार कर रही थी। जब इस हफ्ते ननद नहीं आई तो उसने सास के आगे अपनी इच्छा जाहिर की लेकिन सास ने उसे झिड़की हुए कहा-
मुझे शोभना मत समझना जो तेरी बातों में आ जाऊंगी। हमने भी बच्चे जने है, ज्यादा चोंचले दिखाने की जरूरत नहीं है। गंगा ने मन मारने की बहुत कोशिश की पर जब अगले दिन उसने गली में गोल गप्पे वाले की आवाज सुनी और पड़ोस के एक लडके को खाते देखा तो अपने कमरे की खिड़की से आवाज़ लगाकर उससे गोल गप्पे मंगवा लिए, फिर क्या था जैसे ही उसकी सास ने आवाज सुनी और बहू को उस लड़के से बात करते सुना तो उसके तन बदन में आग लग गई। उसने गंगा के हाथ में पकड़ा लिफाफा छीनकर फेंक दिया और उसके कंधे पर मुक्का मारते हुए उसके चरित्र पर लांछन लगाने लगी। बस गंगा का धैर्य जवाब दे गया, उसके भी मुँह में जो कुछ आया, सास को सुना दिया।
शायद गंगा की सास को सही मौका मिल गया। उन्होंने बहू का हाथ पकड़ा और घर से निकाल दिया। गंगा का मन तो किया कि पुलिस में चली जाए पर वह उसी शहर में रहने वाले अपने चचेरे भाई के घर चली गई, जहाँ से वह अपने घर गई। दो दिन से अरविंद उसे फोन कर रहा था पर गंगा का मन इतना भरा हुआ था कि उसने ना तो मलाल में अरविंद का फोन उठाया और ना ही शोभना का। जब रोकर गंगा का मन हलका हुआ तो उसने अरविंद की जगह शोभना को फोन किया क्योंकि उसे पता था कि अरविंद की कोई ट्रेनिंग चल रही है, चाहकर भी वह नहीं आ पाएगा।
इधर गंगा के माता-पिता ने सोच लिया कि वे गंगा को कभी ऐसे घटिया लोगों के बीच नहीं भेजेंगे जो #घर की लक्ष्मी का सम्मान करना नहीं जानते। शोभना ने फोन करने की बार-बार कोशिश की पर अब तो गंगा भी फोन नहीं उठा रही थी। वह आनन- फानन में मायके पहुँची और उसने एक बार फिर कमलेश का सहारा लेने की कोशिश की पर अब क्या करे क्योंकि कमलेश ने तो फोन काट दिया।
शोभना को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे, तभी कमलेश का फोन आ गया-
यार शोभना, गुस्से में कुछ ज्यादा ही बोल गई थी पर तुम बताओ, अब क्या करुँ? रिश्तेदारी की बात है….
खैर अगले दिन कमलेश शोभना को लेकर गंगा के मायके गई। वहाँ गंगा के मायके वालों ने शोभना को खूब खरी- खोटी सुनाई लेकिन शोभना के पास चुप रहने के सिवाय कोई चारा न था। गंगा के मायके वालों ने साफ कह दिया कि जब तक गंगा की सास खुद माफी मांग कर नहीं लेने आएगी वो गंगा को नहीं भेजेंगे। शोभना ने अरविंद को भी सारी बातें बता दी। पंद्रह दिन बाद जैसे ही अरविंद को छुट्टी मिली वह तुरंत गंगा के पास पहुंचा और सभी से माफी मांगी।
अरविंद ने गंगा के साथ बात करके यह निर्णय लिया कि डिलीवरी तक गंगा अपने मायके में ही रहेगी। निश्चित समय पर गंगा ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। अरविंद डिलीवरी से दो दिन पहले ही गंगा के पास पहुंँच गया था। शोभना ने बहुत जोर लगाया कि माँ भी उसके साथ पोती को देखने चले और बहू को अस्पताल से सीधे अपने घर ले आए पर माँ ने साफ इंकार कर दिया। इधर अरविंद ने गंगा के मायके में ही अलग मकान किराए पर ले लिया क्योंकि उसकी पोस्टिंग दुर दराज के इलाके में थी। हाँ, शोभना ने कह सुन कर अपना तबादला करवा लिया ताकि भाई को कोई चिंता ना रहे।
धीरे-धीरे समय गुजरता गया और गंगा अब दो बच्चों की माँ बन चुकी थी। अरविंद का तबादला भी अच्छे शहर में हो गया था इसलिए वह पत्नी और बच्चों को साथ ले जाने की तैयारी कर रहा था। आज फिर शोभना ने सोचा कि एक बार कोशिश करके देखती हूँ, शायद माँ इस बात को समझ जाए कि बेटा- बहू अगर एक बार दूर चले गए तो वह शायद कभी ना आएँ।
इस बार शोभना ने महसूस किया कि माँ शायद उसके कहने का इंतजार ही कर रही थी। शायद बढ़ती उम्र ने उन्हें सिखा दिया था कि उन्होंने अपनी नासमझी में क्या खो दिया है।
माँ, इस बात की चिंता मन से निकाल दो कि गंगा माफ करेगी या नहीं…. अरविंद और गंगा कभी बडो़ ं का अपमान कर ही नहीं सकते।
शोभना की बातों ने माँ के सभी संदेहों पर विराम लगा दिया। वे इस निश्चिंतता के साथ सो गई कि कल वे बरसों बाद अपने परिवार को लेकर आएँगी।
अगले दिन मुँह अंधेरे ही माँ नहा धोकर शोभना के उठने से पहले ही तैयार हो गई। अरविंद के घर पहुँच कर अपने पोते- पोती को सीने से लगाकर जी भरकर रोई। गंगा को देखकर उनकी आँखे झुक गई और उनकी आँखों से पानी बह चला, वे अपनी बहू से बहुत कुछ कहना चाहती थी पर उनके होंठ काँपने लगे। अरविंद ने आगे बढ़कर माँ के हाथों को थाम लिया और बोला-
माँ, मैं आपके भरोसे गंगा को छोड़कर गया था, आपने बहुत बुरा किया था।
माँ जी, मैं आपके कहे शब्दों को आज तक नहीं भूल पाई पर कोशिश करुँगी कि सब दिल से निकाल दूँ। आप बेफिक्र रहिए, जो आपके लिए हमारी जिम्मेदारी है हम उससे कभी पीछे नहीं हटेंगे। यहाँ से जाने से पहले बच्चों को उनके बाबा से भी मिलाने लाएँगे और घर आते- जाते रहेंगे।
शाम को जब शोभना माँ के साथ वापस लौटने लगी तो उन्होंने एक बार फिर बहू- बेटे की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देखा और उन दोनों ने मौन आश्वासन दिया।
करुणा मलिक