मोना रसोई में काम कर रही थी।बाहर तेज बारिश हो रही है। थोड़ी देर में ओले भी गिरने लगे । वो खिड़की से बाहर देखने लगी। तभी एक बूढ़ा कमजोर सा भिखारी दिखाई दिया जो सामने पेड़ के नीचे खड़ा था। वो पूरी तरह भीग गया था।
उसने कुछ सोचा फिर छाता लेकर उसके पास गयी और उसे अपने साथ लेकर घर के बरामदे में आ गयी। उसने वहां उसको बैठने को कह कर पुराने कपड़े ला कर उसको दिये और चाय बनाने चली गयी तब तक बूढ़े ने कपड़े बदल लिए थे। और अपने भीगे कपड़े समेट लिये वो कांप रहा था।
उसने चाय और बिस्किट उसको दिया।वो भिखारी बहुत खुश हो गया। उसने चाय पिया और बिस्किट कुर्ते की जेब मे रख लिए। फिर अपने कांपते हाथों को ऊपर उठा कर उसे आशीर्वाद दिया। तब तक वर्षा भी रुक गयी थी। वो चला गया।
मोना उसकी सेवा करके खुश थी लेकिन अपने बेटे के लिए परेशान थी जो अभी तक नही आया था। तभी दरवाजे पर खट खट हुई उसने देखा उसका बेटा आ गया। उसने आते ही कहा -मां आज बहुत बड़ी दुर्घटना से मैं बच गया।” मीना व्याकुलता में बोली – क्या हो गया था?” बेटे ने कहा -“परेशान मत होइए अब तो मैं आ गया। हुआ ये था कि बहुत तेज और बहुत देर तक बारिश होने के कारण
सब जगह पानी भर गया था। इसलिए मैं समझ नहीं पाया और मेरी बाइक खुले हुए बड़े नाले की तरफ जाने लगी थी कि तभी पता नहीं कहां से पूरी तरह भीगा एक बूढ़ा व्यक्ति सामने आया और वहीं मुझे रोक दिया । मै डर गया कि अभी ये नही आता तो मैं आपके पास कभी न लौट पाता। फिर मैने उसको धन्यवाद करना चाहा तो वो पलभर में बहुत दूर चला गया था। ”
बेटे से ये बात सुनकर मोना की आंखों में आंसू आ गये और तुरन्त वो घर के मंदिर मे विराजित भगवान से बस इतना ही बोली- नहीं मालूम किस रूप में आ जाते हो। सबकी रक्षा करिए। हे ईश्वर कोटि कोटि धन्यवाद आपका । मोना के हाथ जुड़े थे आँखों से श्रद्धा की अश्रुधारा बह रही थी।
लेखिका
उषा भारद्वाज