हमारी कॉलोनी मैं शीतल कुमार नाम का एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहता है. उसके नाम के जैसा ही उसका चरित्र था. खाना बनाना, कपड़े धोना, हर आने जाने वाली औरतो से बातें करना. सारी कॉलोनी की खबर रखना उसकी हॉबी थीं. इसके अलावा आते जाते लोगों से मजाख भी करता था, कई बार लोग
उसकी बातों से नाराज भी हों जाते थे और उसकी पत्नि से शिकायत भी करते थे. शीतल की पत्नी अगर ये सब देख सुन लेती तो शीतल जी की शामत आ जाती लेकिन वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आते. एक बार 1st अप्रेल क़ो सारी कॉलोनी मैं न्योता दे दिया की आज रात क़ो उनके घर मैं पूजा है. ये बात उनकी बीवी क़ो भी पता नहीं थीं. शाम क़ो बीवी क़ो घुमाने के लिए मॉल मैं ले गए
ओर वहीं से खाना खाकर रात क़ो काफ़ी देर से घर आये. कई लोग घर आये और लौट कर चले गये, कुछ ने फोन किया तो अप्रेल फूल बोल कर जोर से हँस दिया. अगले दिन बीवी क़ो भी अपनी सहेलिओ से बातें सुननी पड़ी और उसका 10 गुना शीतल जी क़ो सुना दिया. इसके बाद शीतल जी ने कान पकड़े और आगे से किसी के साथ मजाख न करने की कसम खाई.
अगले साल फिर अप्रैल आ गई. इस बार उन्होंने अपनी पत्नि का अप्रैल फूल बनाने का सोचा. 31मार्च की शाम क़ो अपनी पत्नि क़ो मजाक में बोला की कल काम वाली बाई नहीं आएगी, सोचा बीवी किट किट करेगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.
अगले दिन बाई सचमुच काम पर नहीं आई. अब शीतल की बीवी का दिमाग़ खराब हों गया और उसने शीतल की क्लास लगा दी, तुम्हे कैसे पता था की आज बाई नहीं आएगी.
तुम्हारा बाई से क्या चक्कर है, उसने तुम्हे क्यों बताया, मुझे क्यों नहीं बताया, मेरे पीछे क्या क्या गुल खिलाते हों बगैरह वगैरह न जाने कितने लांछन लगा दिए, रोना धोना ओर मायके जाने तक की धमकी दे दी. बीवी का पारा सातवे आसमान पर देख शीतल जी क़ो अपने किये पर पछतावा होने लगा ओर माफ़ी माँग माँग कर, कस्मे खाकर, मिन्नते करके बड़ी मुश्किल से बीवी क़ो शांत किया ओर आगे से ऐसा कुछ ना करने का वादा किया.
इतना सब होने के बाद शीतल जी क़ो अपनी गलती का अहसास हुआ और आगे से अप्रैल फूल बनाने से तौबा करली.
ये शायद पहला मौका होगा कि किसी और का अप्रैल फूल बनाने के चक्कर में खुद का ही अप्रैल फूल बन गया.
धन्यवाद
एम. पी. सिंह, कोटा
(Mohindra Singh )
स्वरचित, अप्रकाशित