मेरे जैसे बदनसीब दुनिया में कोई नहीं। – संजय सिंह

 रोहित ने जीवन में अच्छे से पढ़ाई की। खूब मेहनत की और आखिरकार उस मुकाम तक पहुंच गया ।जिसके लिए अक्सर हर व्यक्ति पढ़ता है ।रोहित को सरकारी विभाग में एक नीति के तहत नौकरी मिल गई। अब वह एक शिक्षक के रूप में नौकरी करने लगा। घर वाले खुश थे। रोहित भी खुश था।

रोहित ने पूरी मेहनत और लगन के साथ  शिक्षक की नौकरी का हर दायित्व निभाया। अपनी शिक्षक की नौकरी में दिए गए हर कार्य को बड़े ही सुचारु ढंग से निभाया। रोहित की मेहनत से, उसके पढ़ने के ढंग से, उसके शिष्य और साथी अध्यापक भी काफी प्रसन्न थे। वह उसकी काफी खुशामद करते थे।

अब रोहित को इस नौकरी पर लगभग 6-7 साल गुजर गए। रोहित पूरी मेहनत के साथ अपने काम में लग रहा ।अपनी शिक्षक की नौकरी में उसने बहुत सारे गरीब बच्चों और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा देकर सहायता की और देखते ही देखते वे बच्चे अच्छी नौकरियों में लग गए।

कभी कबार वे रोहित को मिलते तो रोहित की बहुत इज्जत करते और तारीफ करते तथा कहते कि जो भी आज वह है ।वह अपने शिक्षक की मेहनत से है। इस पर रोहित बहुत ही खुश होता ।समय बीतता गया। सरकारें बदलती गई और एक बार एक ऐसा समय आया।

जिस समय रोहित की इस नौकरी पर खतरा मंडराने लगा। सरकार ने रोहित के समय नौकरी पर लगे सभी शिक्षकों का रिकॉर्ड तलब किया ताकि उन्हें नियमित किया जा सके। परंतु जैसा कि होता भी है कि सभी दोस्त ही नहीं होते। रोहित की अच्छाइयों की वजह से कुछ एक उसके दुश्मन भी पैदा हो गए थे।

जिस कारण उन्होंने रोहित के प्रिंसिपल के कान भरने शुरू कर दिए और रोहित के नियमित होने के लिए जरूरी रिकॉर्ड ना भेजने का आग्रह  प्रिंसिपल से किया। प्रिंसिपल भी उनकी बातों में आ गए और उन्होंने रोहित का रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं भेजा ।जब रोहित ने इस विषय में प्रिंसिपल से बात की तो उन्होंने कहा कि आप उस पॉलिसी के अधीन नहीं रखे गए हैं ।

आप सिर्फ टाइम पास भर कर रखे गए हैं। इस पर रोहित झुंझला पड़ा और कहने लगा कि जिस समय उसने अपने जीवन का स्वर्णिम समय बच्चों के तथा विद्यालय के भविष्य को बनाने के लिए लगा दिया ।आज आप जब मेरे भविष्य के बनने की बनने का समय आया तो आप मुझे  टाइम पास अध्यापक कह रहे हैं।

आप बहुत बुरा कर रहे हैं। रोहित द्वारा बहुत समझाने पर भी प्रिंसिपल ने उसकी बात न मानी और रोहित का रिकॉर्ड सरकार के पास जाने से रह गया। परिणाम यह हुआ कि रोहित के बाद उस पॉलिसी पर लगने वाले सभी अध्यापक सरकारी हो गए और रोहित को उसे विद्यालय से तथा उसे नौकरी से सदा सदा के लिए बाहर कर दिया गया ।

रोहित का हृदय टूट चुका था। उसका अच्छाई से भरोसा छूट चुका था। अब उसके लिए चारों तरफ अंधकार दिखाई दे रहा था। परंतु जिस समय वह टूट चुका था। उसी समय एक साथी अध्यापक जो बहुत ही अच्छे थे। उन्होंने रोहित को हौसला रखने और आगे बढ़ाने की सलाह दी। पास में ही एक प्राइवेट विद्यालय में नौकरी दिलवा दी।

रोहित टूटे हुए दिल से उसे विद्यालय में जाकर नौकरी करने लगा। परंतु अंदर ही अंदर वह ईश्वर से भी खफा था। वह सिर्फ यही मन में सोचता था कि उसने सभी का अच्छा किया। सभी का भविष्य स्वर्णिम बनाया। परंतु जब उसका समय आया तो ईश्वर ने उसके साथ क्या किया ?वह नाराज था।

सरकार से, सिस्टम से और कहीं ना कहीं अपने भाग्य से ।उसने अपने आप को वक्त के हवाले छोड़ दिया और पूरी मेहनत के साथ उस प्राइवेट विद्यालय में काम करने लगा। वह सिर्फ अपने आप कोअभागा मानता था। समय बिता गया और एक समय ऐसा आया ।जिस समय  उसको जीवन में एक और बड़ा झटका लगा।

उसकी बेहद करीब और उसकी सब कुछ उसकी मां उसे सदा सदा के लिए छोड़कर इस संसार से चली गई। अब रोहित टूट चुका था। उसने अपनी नौकरी जाने पर अपने आप को जैसे तैसे संभाल लिया था और माता की सेवा में वह अपना समय व्यतीत कर रहा था ।परंतु भगवान ने उसका यह सहारा भी छीन लिया। अब रोहित के लिए बाकी सब रिश्ते नाम के थे ।

जो केवल समय के साथ चल रहे थे। रोहित जानता था कि अब जो उसके हाथ से छूट चुका है ।वह उसे कभी नहीं मिलेगा ।परंतु फिर भी यह सोचकर कि उसके भाग्य में शायद ऐसा ही लिखा है। हो सकता है उसने पिछले जन्म में कोई बहुत बड़ा पाप काम किया है।

जिस कारण उसके साथ ऐसा हुआ है। ईश्वर की मर्जी समझकर वह लगातार जीवन में आगे बढ़ने लगा ।परंतु कई बार बिना मेहनत के कई लोग उसके साथ ही अच्छी नौकरी पर लग जाते। तो वह अपने मन में और ईश्वर से सवाल पूछता कि यह तेरा कैसा न्याय है? मैंने इतनी मेहनत से शिक्षा को पूरा किया ।

मेरी इसी शिक्षा को पूरा करवाने में मेरे माता-पिता ने कितनी मेहनत की और मैं अपनी मेहनत से जो नौकरी तूने मुझे दिलाई। मैंने की परंतु तेरा कैसा न्याय है? इतनी मेहनत करने पर भी मैं उस मुकाम पर नहीं पहुंच सका। जिसके काबिल में था और तूने ऐसे व्यक्ति उस मुकाम पर पहुंचा दिए जो शायद उस मुकाम के लायक नहीं थे। शायद यही तेरा इंसाफ है ।

परंतु मुझे इंतजार है उस दिन का जिस दिन मेरे साथ भी न्याय होगा ।जो मेरे साथ हुआ उसके लिए मैं सदा दुखी रहूंगा और हृदय में हमेशा एक ही बात रहेगी कि मेरे जैसा बदनसीब इस दुनिया में कोई नहीं होगा। जिसके हाथ में सब कुछ आया। परंतु रेत की भांति फिसल गया। 

धन्यवाद ।

लेखक :संजय सिंह।

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