आनंद जैसे ही घर में आया अपने माता- पिता को नाराज सोफे पर बैठे देख समझ गया आज वापस उसकी पत्नी रीना ने घर में जरूर कुछ हंगामा किया होगा , दूसरी तरफ उसकी पत्नी रीना खड़ी थी जिसका गुस्सा सांतवे आसमान पर था ! उसने आनंद को चाय पानी भी नहीं पूछा , रसोई से आनंद के छोटे भाई की पत्नी रानी आनंद के लिए चाय बनाकर लाई !
अपनी मुँहफट पत्नी के झगड़ालू स्वभाव से आनंद परेशान था ! वह समझ गया आज फिर रीना ने उसके माता- पिता और रानी को खरी खोटी सुनाई होगी ! आनंद एक MNC में अच्छे पद पर था , कोई आर्थिक तंगी नहीं थी , घर में भी फुल टाईम मेड थी फिर भी रीना किसी को सुनाने का मौका नहीं छोड़ती थी !
रीना को हमेशा शिकायत रहती कि आनंद अपने परिवार पर अच्छा खासा खर्च करते हैं और आनंद हमेशा कहता कि यह उसकी जिम्मेदारी हैं , वह अपनी जिम्मेदारी से मुँह नहीं मोड सकता ! रीना को अपने मायके से भी यही सीख मिलती कि अगर वह अलग रहेगी तो अपनी बेटी लब्धि और बेटे अनिश का भविषय संवार पाएगी !
आनंद के पिता राजेश जी रिटायर्ड हो चुके थे मगर उनकी पेंशन पर भी रीना की नजरे रहती ! आनंद उसे कहता भी वह पिताजी के पैसे हैं उन्हें जहां खर्च करना हैं करने दो और तुम्हें आखिर किस चीज की कमी हैं मगर रीना उससे बहस करती और कहती घर का सारा खर्च हम लोग ही उठाते हैं ,
तुम्हारे पिताजी को घर खर्च में मदद करनी चाहिए ! यही सब सोचते हुए आनंद फ्रेश होने चला गया , थोड़ी देर में उसके दोनों बच्चे और भाई सिद्धार्थ भी आ गए ! रानी ने सबका चाय नाश्ता , खाना किया ! उस दिन रीना ने कुछ काम नहीं किया , वह सिर्फ मुँह फुलाए बैठी रही ! रात को रीना ने फिर अलग होने का राग छेड़ दिया आनंद तुम समझते क्यों नहीं ,
आगे चलकर हमारे खर्चे बढ़ेंगे , एक अलग घर लेकर उसमें रहते हैं, कब तक हम यहां के खर्च उठाते रहेंगे , अब यहां तुम्हारे भाई सिद्धार्थ को संभालने दो सब ! आनंद बोला तुमने फिर अलग होने का रेडियो शुरू कर दिया , मुझे सोने दो बोलकर आनंद करवट बदलकर सो गया !
आनंद के माता- पिता एक दिन आनंद से बोले – बेटा , बहू जो कह रही हैं तुम मान जाओ , तुम अलग ……! आनंद पिता की बाट काटते हुए बोला- नहीं पापा मैं आप लोगो को छोड़कर अलग रहने नहीं जा सकता ! राजेश जी बोले- बेटा यहीं आसपास ही कोई घर देख लो , यूं रोज घर में झगड़े होना अच्छी बात नहीं !
सबके जोर देने पर आनंद ने पास में ही एक घर ले लिया ! रीना की मुराद पूरी हो गई ! रीना के दोनों बच्चे भी यह घर छोड़कर नहीं जाना चाहते थे , वे भी आनंद की तरह उदास थे ! अब घर तो दो थे मगर आनंद और उसके बच्चे ज्यादातर पुराने घर में ही समय बिताते !
रीना अपने नए घर में अकेले ही खुश थी ! एक दिन आनंद ने घर आकर बताया कि उसका प्रमोशन हो गया है और उसे मुंबई नौकरी के लिए जाना पड़ेगा ! रीना और बच्चे यह सुनकर बहुत खुश हुए ! आनंद बोला मगर एक प्रॉब्लम हैं लब्धि की जॉब अभी नई- नई हैं और अनिश का कॉलेज चल रहा हैं ,
मेरे रिटायरमेंट में अभी दो साल ही बचे हैं फिर वापस यहीं आना हैं इसलिए सभी वहां नहीं जा सकते ! आनंद के दोनों बच्चे समझदार थे ! लब्धि बोली – पापा आप मम्मी को साथ ले जाओ ,
हम दोनों दादा- दादी के साथ रह लेंगे ! रीना नहीं चाहती थी कि बच्चों को दादा- दादी से ज्यादा लगाव हो वह बोली- एक काम करिए आप अकेले ही चले जाईए और बीच- बीच में आते- जाते रहिएगा !
रीना का ऐसा जवाब पाकर आनंद को हैरानी हुई कि रीना को बिल्कुल चिंता नहीं हैं कि नई जगह मैं कैसे सब कुछ अकेले प्रबंध करूंगा मगर पत्नी की रग- रग से वाकिफ आनंद ने कुछ जवाब नहीं दिया !
* जब आनंद के माता पिता को यह बात पता चली कि रीना आनंद के साथ मुंबई नहीं जा रही तो उन्हें बहुत बुरा लगा मगर बेटे के प्रमोशन की खुशी को देखते हुए उन्होंने शुभकामनाओं की झड़ी लगा दी ! आनंद के मुंबई जाने के दिन करीब आ गए और यहां रीना के दिमाग में फिर एक फितूर आया – आनंद आपके माता पिता का जो घर हैं मैं सोच रही हूं
आप उसमें से अपना हिस्सा मांग ले ! आनंद इस बात पर बहुत नाराज हुआ और बोला- रीना आइंदा से कभी यह बात मत बोलना ! रीना बोली – उस घर में हमारा हिस्सा हैं आखिर क्यों ना मांगू मैं मेरा हिस्सा ? आनंद बोला- बकवास बंद करो रीना , तुम्हारा लालच दिनोदिन बढ़ता जा रहा हैं ,
तुमने ऐसा सोचा भी कैसे ? यह कभी नहीं होगा ! रीना बोली- आपको मेरी बात नहीं माननी तो मुझे भी आपसे बात नहीं करनी ! दोनों बच्चे अपने मम्मी- पापा का झगड़ा अंदर बैठे सुन रहे थे ! रीना के गुस्सैल और लालची स्वभाव से आनंद और बच्चे सभी दुःखी थे !
जिस दिन आनंद मुंबई के लिए रवाना हुआ उस दिन भी रीना ने आनंद से ठीक से बात नहीं की और वह यहां वहां मुंह फुलाए घूमती रही ! आनंद को मुंबई में रहने ऑफिस की तरफ से दो बेडरूम , हॉल, किचन का घर मिला था जो फुल फर्निशड था , उसके बगल वाली बिल्डिंग में ही कंपनी के मैनेजर अनिल जी अपने बीवी – बच्चों के साथ रहते थे !
अनिल जी और आनंद में अच्छी दोस्ती हो गई ! उनकी पत्नी चेतना ने अपनी ही कुक शानू को आनंद के वहां भी काम पर लगवा दिया ! आनंद फोन के जरिए अपने परिवार से बातें करता लेकिन जब भी रीना आनंद से बात करती रुखे .तरीके से ही करती और कभी- कभी तो अपने हिस्से की बात लेकर फोन पर ही लड़ पड़ती !
रीना की बड़ी बहन सोनल मुंबई में ही रहती थी , वह अपने पति के साथ अक्सर आनंद से मिलने आती और शनिवार – रविवार पर गाड़ी भेज आनंद को अपने घर बुलवा लेती ! आनंद एक सभ्य व्यक्ति था ! कभी कभी अनिल और उसकी पत्नी सोचते कि आनंद जी की पत्नी इतने महिनों में एक बार भी अब तक यहां नहीं आई ,
क्या उन्हें भाईसाहब की चिंता नहीं होती कि वे अकेले कैसे सब मैनेज करते होंगे मगर कभी आनंद से पूछने की उनकी हिम्मत नहीं हुई ! कुछ रोज बाद अचानक आनंद बाथरूम से निकलते वक्त फिसल कर गिर गया , कमर में जोरों का दर्द उठा फिर भी जैसे तैसे उठकर बेड़ पर जाकर लेटा !
आनंद और अनिल साथ ही ऑफिस जाते थे जब बहुत देर तक आज आनंद बिल्डिंग के नीचे नहीं आया तो अनिल ने फोन किया ! चार- पाँच फोन करने पर आनंद ने जैसे तैसे फोन उठाया और सिर्फ इतना बोला- अनिल तुम्हारे घर पर मेरे घर की जो दूसरी चाबी हैं उससे मेरे घर आ जाओ !
अनिल के पहुंचते ही उसने सब बताया कि वह कैसे गिरा ? अनिल ने उसे कपड़े पहनाने में मदद की और चेतना को फोन कर चाय- नाश्ता , पेनकिलर लाने कहा चेतना सब ले आई ! आनंद से बिल्कुल हिला भी नहीं जा रहा था ! अनिल ने सोते सोते ही आनंद को चाय- नाश्ता करवाया ! अनिल आनंद को डॉक्टर के पास ले गया , डॉक्टर ने बेडरेस्ट बताया
और एक हफ्ते की दवाई दी ! फोन पर आनंद के गिरने की खबर से उसके दोनों बच्चे परेशान हो गए और मुंबई आने की जिद करने लगे मगर आनंद बोला एक हफ्ते की बात हैं मैं ठीक हो जाऊंगा ! आनंद हैरान रह गया जब रीना बोली- आप मेरी कोई बात नहीं मानते मैं कब से कह रही हुं मगर …… आनंद ने पुरी बात सुने बिना फोन काट दिया और सोचने लगा
हमेशा हिस्सा, पैसा बस वहीं बातें , इसे मेरे गिरने की कोई फिक्र नहीं हैं , हे भगवान कैसी पत्नी मिली हैं मुझे ? शानू मेड़ रोज आकर घर की सफाई और खाना बना देती थी ! दिन में दो बार अनिल और उसकी पत्नी हालचाल पूछने चले आते और रीना की बहन सोनल और उसके पति भी आते जाते रहते !
सोनल फोन पर रीना से बोली – आनंद जी का कमर दर्द अब भी ठीक नहीं हुआ है रीना, तुम मुंबई आ जाओ ! रीना उसे भी अपने पुराने घर में हिस्से की बात कहने लगी और जिद पर अडी रही ! सोनल को अपनी बहन की ऐसी बातों पर बहुत गुस्सा आया और उसने फोन कट कर दिया !
आनंद के कमर दर्द में कोई आराम नहीं था अबके कुछ ओर टेस्ट हुए , रिपोर्टस आने पर सबका दिल दहल गया ! आनंद को स्पाइन का कैंसर था जो कमर के निचले हिस्से से लेकर सिर के पिछले हिस्से तक फैल गया था ! कमर दर्द आनंद को पहले भी होता था मगर वे इसे काम की वजह से प्रेशर मानते थे !
अब आनंद की किमोथैरेपी शुरू होने वाली थी ! आनंद ने घर पर फोन करके अपनी बीमारी के बारे में कुछ ना बताते हुए बस इतना कहा तुम तीनों आ जाओ फिर भी रीना जाने तैयार नहीं हुई ! लब्धि और अनिश मुंबई आ गए , उन्हें अपने पापा की बीमारी का पता चला तो वे फफक फफककर रो पड़े !
उन्होंने रीना को फोन पर बताया मगर रीना जैसी औरत हमारी मां हैं यह सोचकर बच्चे भी शर्मिंदा हो उठे ! आनंद ने कैंसर वाली बात अपने माता पिता को नहीं बताई थी ,अब दोनों बच्चे मिलकर आनंद का पुरा ध्यान रखने लगे थे ! आनंद की आज पहली किमोथैरिपी थी !
लब्धि ने वर्क फ्रॉम होम ले लिया था और अनिश ने यहीं कॉलेज में एडमिशन करवा लिया था ! अनिल और चेतना को सोनल ने बताया कि उसकी बहन कितनी लालची, जिददी हैं और आनंद जिसने अपनी पत्नी और अपने माता- पिता में कभी कोई भेद ना समझा , यह सब सुनकर सभी के मन में आनंद के लिए प्यार और सम्मान बढ़ गया था !
थोड़े दिन बाद आनंद चल पा रहा था और वह ऑफिस जाने लगा था, इलाज अभी लंबा चलने वाला था मगर आनंद तैयार था ! आनंद और बच्चों ने रीना से बात करना ना के बराबर कर दिया था इसलिए रीना फ्लाईट की टिकट बुक करवाके मुंबई आ गई ! रीना घर आई तो अनिश ने एक औपचारिक मुस्कान दी जैसे कोई अजनबी हो ,
रीना ने देखा एकदम साफ सुथरा घर , किचन में खाना भी बना हुआ था ! आनंद ऑफिस से आने वाला था इसलिए अनिश उसके लिए फल काट रहा था ! थोडी देर में आनंद और लब्धि घर आ गए , दोनों ने रीना को देख कोई प्रतिक्रिया नहीं दी ! लब्धि चार कप चाय बनाकर ले आई!
लब्धि और अनिश उसके पापा की एक एक चीज का ध्यान रख रहे थे ! रीना बोली – आनंद तबीयत अब कैसी हैं ? आनंद नीचे गर्दन किए बोला- ठीक हैं ! थोड़ी देर बाद बच्चे और आनंद कमरे में चले गए ! अभी तक अहम, जिद और आसमान में उड़ती आई रीना को यहां आकर ऐसा लग रहा था जैसे एक पल में वह जमीन पर गिर गई हो !
आनंद और उसके दोनों बच्चे तीनों आपस में हंस बोलकर बातें कर रहे थे , वह अपने आप को अजनबी महसूस कर रही थी ! रात को आनंद बोला रीना तुम लब्धि के साथ सो जाना , मुझे रात को किसी चीज की जरूरत ना पड जाए इसलिए अनिश मेरे साथ ही सोता हैं ! लब्धि बोली मम्मी आप कमरे में अकेले सो जाना , मैं हॉल में एडजस्ट कर लूंगी !
आज रीना को एहसास हो रहा था कि उसने अपना परिवार खो दिया हैं , उसके पास सिवाय पछतावे के कुछ नहीं बचा था !
दोस्तों , रीना की जिद, अहम और लालच ने उसका अपना परिवार ही उससे अलग कर दिया था ! ऐसी ओरतो का अंत में यही हाल होता हैं !
आपको यह कहानी कैसी लगी कमेंट जरूर करें !
आपकी सहेली
स्वाती जैन !