भरोसा – खुशी

मेरी मां हमेशा कहती थी कि किसी पर भी आंख मूंद भरोसा मत करना और मै और पिताजी मजाक बनाते क्या मां? पिताजी कहते तुम्हारे साथ हुआ है इसलिए क्या सारे ही लोग गलत हो गए फिर शुरू हो गई तुम आज बेटे का खास दिन है और तुम आज भी शुरू हो गई।आइये पहले आपको अपने परिवार से मिलवाता हूँ।

मै निमिष मेरे पापा राघव शर्मा बहुत बड़े हार्डवेयर शॉप के मालिक और मेरी मां रेवती जिन्हें मैं बहुत प्यार करता हूं और वो मुझे पर बस उनकी एक ही बात हम सब को अच्छी नहीं लगती।परिवार में हम तीन के अलावा मेरी बहन श्वेता भी है तो मैं जा रहा हूं कोटा पढ़ने के लिए पिताजी ने मेरा एडमिशन वहां के टॉप कॉलेज में करवाया है।

इसलिए मां मुझे समझा रही है।चलो मै घर के बंधन तोड़ कोटा आ गया।नई दुनिया सब अच्छा लग रहा था पापा आए थे मां के साथ रूम दिलवाया मां ने मकान मालिक को भी बोला थोड़ा ध्यान रखना बेटे का और मुझे भी बोली पैसे संभाल कर खर्च करना पापा बहुत मेहनत कर रहे हैं

और किसी पर अंधा भरोसा मत करना समझा जी मां पापा चले गए और मैं कोटा में मन लगाने लगा नए दोस्त बने मां की सीख शुरू में याद आई पर फिर मस्ती में सब भूल गया कुछ ही दिनों में मेरे रूम में एक रूममेट आया रौनक बड़े बाप का बेटा है ऐसा कहते थे

सब उसकी मेरी जल्दी ही दोस्ती हो गई क्योंकि रूम शेयर कर रहे थे वो छुप छुप कर स्मोक करता ड्रिंक करता पहले मुझे इतना पता नहीं था एक बार तीन चार दिन की छुट्टी थी मां ने कहा आजा पर मैंने सोचा कि वापस आते ही परीक्षा है तो क्यों जाना उधर रौनक भी नहीं गया ।

मैं नोटस बना रहा था कि रौनक मेरे पास आया चल कुछ खा कर आते हैं।मैने कहा नहीं भाई मै नोट्स बना लूं यार ये सब तो चलता है चल खाना खाते है उसने मुझे खाना खिलाया मेरा बहुत ध्यान रखता था मै भी उस पर आंख मूंद भरोसा करता।कॉलेज में एग्जाम्स के बाद हमें प्रोजेक्ट मिले जिसने हम दोनों पार्टनर बने ।

मै खुश था कि चलो हम साथ साथ रहते हैं तो अच्छे से काम हो जाएगा।मैने पूरा प्रोजेक्ट डिजाइन किया उस पर पागलो की तरह मेहनत की जब भी मैं रौनक को कुछ बोलता तो वो कहता यार तू इतना अच्छा कर रहा है मै क्यों खराब  करूं मैं इसके बदले में वो कभी अच्छा खाना पीना ले आता जिससे कभी मुझे कोई शक ही नहीं हुआ।

कॉलेज और 2 महीने की मेहनत से मेरा प्रोजेक्ट बेस्ट था रोबो विथ एडवांस AI टेक्नोलॉजी presentation से पहले दिन रात को रौनक बोला चल आज पार्टी करते हैं।रौनक ने निमिष को खुप पिलाई और उसमें कुछ मिक्स कर दिया।

निमिष सो गया और 4 दिन बाद उठा जब वो हॉस्पिटल में था।पापा और मां बैठे थे उसे होश आया तो पापा डॉक्टर को बुलाने भागे और मां रोने लगी बेटा तुझे होश आ गया । डाक्टर बोला अभी इन्हें हम दो दिन ऑब्जर्वेशन में रखेंगे।निमिष शून्य में देख रहा था

उसे कुछ याद ही नहीं था।थोड़ी देर में आदित्य  निमिष का बेस्ट फ्रेंड उससे मिलने आया।निमिष ने पूछा मै यहां कैसे और मेरा प्रेजेंटेशन प्रोजेक्ट वही तो कहानी है निमिष ।

रौनक ने तुम्हारी मेहनत अपने नाम से प्रेजेंट कर दी तुम्हारे प्रोजेक्ट को वाहवाही मिली और वो सिलेक्ट हो गया पर रौनक के नाम से तुम उस दिन पहुंचे नहीं तो मै तुम्हारे रूम पर गया तुम्हारे मकानमालिक से पूछा वो बोले कल हम शादी में गए हुए थे उनसे चाबी ली कमरा खोला तुम बेहोश पड़े थे।

रौनक अपना सामान ले चम्पत था।निमिष रोने लगा मेरी मेहनत बर्बाद हो गई सब मिट्टी में मिल गया।मेरे टीचर्स प्रोफेसर क्या सोचेंगे मेरे बारे में मां आप सही कहती थी कि किसी पर भी आंख मूंद भरोसा नहीं करना चाहिए।मेरा क्या होगा मेरा भविष्य और मेहनत बर्बाद हो गई।

पहले तू ये बता उस दिन तूने ऐसा क्या लिया था कि तू 4 दिन तक बेहोश था हमने तुझे पढ़ने भेजा था या नशा करने तेरे ब्लड में अल्कोहल और ड्रग्स का हैवी डोस मिला है।पापा मुझे नहीं पता एक बार रौनक की बर्थडे पर उसके दोस्तों ने मुझे पिला दी थी बीयर तब मैने साफ मना कर दिया था ।

परसो तो उसने मुझे ज्यूस दिया था फिर क्या हुआ मुझे याद नहीं तुम्हारे मकान मालिक कह रहे थे कि उसने कमरा भी छोड़ दिया है तुम चिंता मत करो मै देखता हूं क्या होता हैं। रेवती तुम सही थी हम ही तुम्हारा मजाक बनाते थे ये दुनिया सच में ही बुरी है। 3 दिन बाद निमिष को डिस्चार्ज मिला और वो अपने पीजी में आ गया।

रेवती अभी निमिष के पास रुकना चाहती थी इसलिए वो रुक गई और राघव चले गए।मां मेरा करियर बर्बाद हो जाएगा।कुछ नहीं होगा अगले दिन सुबह रेवती निमिष के कॉलेज उसके प्रिंसिपल से बात करने गई। प्रिंसिपल बोले अब तो सब सिलेक्ट हो गया है अब कुछ नहीं हो सकता।रेवती बोली सर मेरे बच्चे की मेहनत है उसके साथ धोखा करके उसका विश्वास

तोड़ कर उसे मरने के लिए छोड़ कर ये रौनक मेरे बच्चे का प्रोजेक्ट भी खुद के नाम से दे कर कैसे जीत सकता है। प्रिंसिपल ने साफ मना कर दिया कि अब कुछ नहीं हो सकता।रेवती निमिष को तिल तिल मरता नहीं देख सकती थी।रेवती रोज कॉलेज जाती पर प्रिंसिपल उसे ना बोलते या मिलते ही नहीं जो बाहर पियोन बैठता था

बोला दीदी इनसे नहीं बड़े साहब से मिलो तो काम हो जाएगा। प्यून ने उनका नंबर रेवती को दिया रेवती ने अगले दिन का अप्वाइंटमेंट लिया और वहां पहुंच गई।वो थे सेठ कृष्ण नारायण जिनके शहर में दो कॉलेज थे।रेवती ने उन्हें सारी बात बताई और रिक्वेस्ट की प्लीज आप कुछ करे वरना मेरे बेटे का जीवन खराब हो जाएगा।

कृष्ण जी ने उसकी बात सुनी और दो दिन का समय मांगा।अगले दिन एक नोटिस आया कि प्रोजेक्ट को evaluate करने टीम आ रही हैं और जिसका बेस्ट होगा वो सिलेक्ट होगा और सबको उनके सवालों का जवाब भी देना होगा।आदित्य शाम को घर आया उसने सारी बात निमिष और रेवती को बताई और अगले दिन का समय दे कर चला गया।

अगले दिन टाइम से रेवती निमिष कॉलेज पहुंच गए वहां हॉल पूरा भरा था सभी बच्चे अपने प्रोजेक्ट्स के पास खड़े थे।निमिष भी गया वहां रौनक भी खड़ा था बोला तू क्या करने आया है प्रोजेक्ट तो मेरे नाम पर रजिस्टर है तू जा तुझे कोई नहीं जानता तू तो सब जानता है न ठीक है पता चल जायेगा किसका प्रोजेक्ट है।

सब बच्चे आए अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया जब रौनक की टर्न आयी तो जो उसने ऊपर ऊपर से पढ़ा था वो बता दिया ।जजिस के क्वेस्चन के वो आंसर नहीं दे पा रहा था ।निमिष को मंच पर बुलाया गया उसने हर सवाल का जवाब दिया और एडवांस फीचर्स भी बताए जो रौनक को भी नहीं पता थे।

उसने अपने मॉडल की वर्किंग भी दिखाई ।कृष्ण जी आगे आए हमारे कॉलेज में इतनी बड़ी गलती एक बच्चा दूसरे बच्चे को मरने के लिए छोड़ उसका मॉडल चुरा रहा है ।बेटा ज्ञान कोई नहीं चुरा सकता उसने मेहनत से बनाया था इसलिए वो इसकी बारीकियां जानता था

तुम ने ऊपर ऊपर से देख कर मॉडल को अपना बता दिया इसी वक़्त रौनक का नाम हटा कर निमिष का करो और यही मॉडल फाइनल एग्जिबीशन के  लिए रशिया भी जाएगा। प्रिंसिपल साहब रौनक के पैरेंट्स को बुलाओ मुझे मिलना है कल सुबह दस बजे उन्हें बुलाओ।

प्रिंसिपल ने ताल मटोल करने की कोशिश की पर कृष्ण जी के आगे उसकी एक नहीं चली।उसके पैरेंट्स को उसकी सारी करतूत सुना उसे कॉलेज से रेस्टिगेट कर दिया गया।कृष्ण जी ने अपने स्टाफ और प्रिंसिपल से भी कहा यदि उस बच्चे को कुछ हो जाता तो हम क्या करते बच्चे दूर से आते हैं

हमारी जिम्मेदारी है आगे से ऐसा नहीं होना चाहिए।निमिष रेवती के गले लग रो पड़ा।मां बोली अब किसी पर आंख मूंद भरोसा मत करना समझे।जी मां कभी नहीं और दोनों मां बेटे पीजी की और बढ़ गए।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी 

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