रश्मि क्या तुम मुझसे मिलने होटल में आओगी, रश्मि चुप थी।बोलो रश्मि तुम्हें मेरे प्यार की कसम। नहीं सलिल तुम मेरे घर आ जाओ मिलने मैं ऐसे कैसे अकेले आ सकती हे। नहीं यार रश्मि वहां तुम्हारे पति देव रहते हैं खुल कर तुमसे बात नहीं हो पाती है।अब कौन सी खुलकर बात करनी है सलिल।
अब तो इतने बरस बीत गए हों अब तो ऐसा कुछ सोचना भी हम दोनों के लिए गुनाह है। क्योंकि अब तुम्हारी भी शादी हो चुकी है और हम दोनों के बड़े बड़े बच्चे हैं । शादी की उम हो रही हैं बच्चों की । पैंतिस साल का एक लम्बा अंतराल बीत चुका है हम दोनों को अलग हुए ।
अब हम दोनों को ऐसा कुछ सोचना भी गलत है। क्या ये अपने अपने पार्टनर के साथ धोखा नहीं होगा। नहीं नहीं मैं अब इतने लम्बे समय के बाद कुछ ग़लत करने की सोच भी नहीं सकती।तुम अपनी पत्नी को धोखा दे सकते हो लेकिन मैं अपने पति को धोखा नहीं दे सकती।
आखिर हम दोनों ने साथ ये एक लम्बा समय व्यतीत किया है।अब अगर तुम एक दोस्त के नाते मिलना चाहते हो तो घर पर आकर मिल सकते हो नहीं तो रहने दो जहां इतने साल नहीं मिले तो अब भी नहीं मिलेंगे तो क्या हो जाएगा।
भूल जाओ अपने पहले प्यार को ।मैं तो भूल ही गई थी मेरी जब से शादी हुई । इतने सालों के बाद तुम पता नहीं कहां से मेरी जिंदगी में आ गए।अब मैं फिर से पुराना सबकुछ दोहराना नहीं चाहती।
रश्मि और सलिल दोनों एक ही कालेज में पढ़ते थे। क्लास फैलो थे। सलिल रश्मि को मन ही मन चाहता था।ये बात रश्मि को भी नहीं पता थी। लेकिन रश्मि जब भी भूलें भटके सलिल की तरफ देखती या नजरें मिल जाती तो सलिल रश्मि को ही देख रहा होता था और नजरें मिलते ही सलिल एक गहरी मुस्कान बिखेर देता।
बी ए के फाइनल ईयर में सलिल को टाइफाइड हो गया और वह काफी समय तक कालेज नहीं आया। रश्मि को उसकी खाली कुर्सी देखकर बहुत दुखी होता था । रश्मि के मन में भी पता नहीं सलिल के प्रति कोई प्यार था कि नहीं लेकिन सलिल का क्लासरूम में न होना रश्मि को अच्छा नहीं लगता था।
रश्मि को खराब लगने लगा। क्या है कुछ पता नहीं चल रहा था कि सलिल कालेज क्यों नहीं आ रहा था।उस समय फोन वगैरह की कोई सुविधा नहीं होती थी।जब करीब बीस पच्चीस दिन बीत गए
और सलिल कालेज नहीं आया तो रश्मि को चिंता होने लगी और उसे बुरा भी लगने लगा कि पता नहीं क्यों सलिल कालेज नहीं आ रहा है। किसी से पूछ भी नहीं सकती थी क्योंकि उस समय बहुत जल्दी लोग बात का बतंगड़ बना देते थे।शायद मन के किसी कोने में रश्मि के के मन में भी प्यार की हल्की सी चुभन महसूस करने लगी थी।
फाइनल एग्जाम की डेट नजदीक आ गई थी
और सलिल का अब भी पता नहीं था।आज जब क्लास में सर ने आकर पूछा कि क्या सभी के नोट्स कंप्लीट हो गए हैं तो मुझसे चेक करवा लें क्योंकि इम्तहान नजदीक आ रहे हैं।
क्लास के सभी स्टूडेंट्स ने अपने अपने नोट्स सर को चेक करने को दे दिया। दूसरे दिन सर ने क्लास में आते ही रश्मि को आवाज़ लगाई , रश्मि तुम्हारा नोट्स काफी अच्छा तैयार हुआ है तो तुम सलिल की मदद करोगी ।
हिम्मत करके रश्मि ने पूछा सलिल क्यों नहीं आ रहा है सर ।वो बीमार है उसे टायफाइड हुआ है इस लिए कालेज नहीं आ रहा था।और नोट्स भी नहीं बना पाया है ।अब किसी न किसी को उसकी मदद करनी पड़ेगी ।तुम करोगी मदद रश्मि ,जी सर ।
दूसरे दिन रश्मि ने सर से कहा आप सलिल को बोल दिजिए मुझसे नोट्स लें ले । सर ने कहा तो क्या सलिल को तुम्हारे घर जाने की बोल दूं । नहीं सर मेरे घर पर नहीं भेजिएगा मेरे पिताजी को पसंद नहीं है वो बड़े सख्त इंसान हैं,उनको इस तरह किसी लड़के का घर आना पसंद नहीं है।आप सलिल को बोल दिजिए कि कालेज में ही नोट्स लें ले। अच्छा ठीक है।
दूसरे दिन सलिल रश्मि के पास नोट्स लेने गया। काफी कमजोर लग रहा था सलिल। कैसे हो सलिल,अब ठीक हूं ,तुम बीमार थे मुझे पता ही नहीं। मैंने सोचा शायद तुम मेरे घर आओगी मेरा हालचाल लेने। लेकिन सलिल मैं तुम्हारे घर कैसे आ सकती हूं। जानते तो हो यहां किसी को पता चल जाए तो बात का बतंगड़ बना जाता है।
और हम जिस समाज में रहते हैं वहां इतनी छूट नहीं है कि कोई लड़की या लड़का एक दूसरे के घर आ जा सके।और फिर मेरे पिताजी तो बहुत दकियानूसी और सख्त इंसान हैं उन्हें पता लग जाए अगर तो मेरी तो पढ़ाई-लिखाई छुड़ा कर घर ही बिठा ले । बड़ी मुश्किल से तो इस तरह को एजूकेशन में पढ़ने की अनुमति मिली है।
नोटस की अदला-बदली में रशिम और सलिल के दिल भी नजदीक आने लगे थे। लेकिन दोनों ने एक दूसरे से कभी इजहार नहीं किया था।अब तो रश्मि भी सलिल को पसंद करने लगी थी। लेकिन वो अपने घर का माहौल और पिताजी के स्वभाव को जानती थी तो कोई ऐसा कदम आगे बढ़ा ही नहीं सकती थी। अभी तक ये बात दोनों के मन में ही रही। हां धीरे-धीरे बात इतनी बढ़ गई थी की जब कभी कालेज की छुट्टी हो और आपस में मिलना नहीं हो पा रहा हो तो सलिल रश्मि के घर के सामने पीपल के पेड़ के पास आड में खड़ा रहता था एक छलक रश्मि की देखने के लिए।
तीन साल का बी ए करने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन करने को रश्मि और सलिल ने एक साथ ही सब्जेक्ट लेकर पढ़ाई चालू की ।इसी बीच रश्मि के घर में शादी की बात चलने लगी। रश्मि की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो घर में कुछ विरोध कर सकें और अपने मन की बात किसी से कह सके। क्योंकि अभी सलिल भी पढ रहा था । कोई नौकरी या काम धंधा तो करता नहीं था। सबसे बड़ी बात की दोनों की जाति अलग थी।उस समय तो अपने से अलग जाति में शादी करने को कोई सोच भी नहीं सकता था।एम ए प्रथम वर्ष का एग्जाम देने के बाद रश्मि की शादी हो गई। पिताजी के सख्त रवैये की वजह से रश्मि के लिए घर में प्यार की बात बताना और उससे शादी करने को कहना संभव नहीं था। फिर दोनों का प्यार मन के अंदर ही था इजहार नहीं किया कभी।और रश्मि की शादी हो गई।
ससुराल आकर रश्मि नई जिंदगी में व्यस्त हो गईं।हां ससुराल से मायके जब पहली बार आई तो अपने आठ दस दोस्तों को बुलाकर अपने घर में पार्टी रखी । जिसमें रश्मि की कुछ सहेलियां थीं और साथ में सलिल भी था ।अब सबके साथ में सलिल आ गया था अकेले तो बुलाना संभव नहीं था। लेकिन ये सब रश्मि के पिता जी को पसंद नहीं था ,तो उनके दुकान से आने के पहले ही दो घंटे में पार्टी निपटा दी गई। सलिल रश्मि के पति से बेमन से मिला कुछ बातें हुईं और चाय नाश्ता फिर सब अपने अपने घर चले गए। जाते जाते सलिल रश्मि को बोल गया तुमने मुझे धोखा दिया। फिर बात आई गई हो गई। रश्मि अपने ससुराल में व्यस्त हो गईं और सलिल अपने आगे की पढ़ाई में। तीन साल में रश्मि दो बच्चों की मां बन गई अब तक वो सलिल को पूरी तरह से भूल गई थी। कभी उसके मन में विचार भी नहीं आया कि उसके मन में सलिल के लिए कुछ था। मायके आने पर भी रश्मि की कभी सलिल से मुलाकात नहीं हुई।इस तरह बिना मुलाकात के ही रश्मि के शादी के तीस साल निकल गए। सलिल की भी शादी हो गई वों भी बाल बच्चे वाला हो गया था।और डिग्री हासिल कर कालेज में प्रोफेसर बन गया था।
आज सोशल मीडिया का जमाना था ।इस बीच सलिल लगातार रश्मि को सोशल मिडिया पर फेसबुक पर ढूंढता रहा पर वो नहीं मिली। शादी के बाद रश्मि का सरनेम बदल गया था और सलिल पुराने सरनेम से रश्मि को ढूंढ रहा था। फिर एक दिन अचानक से फेसबुक पर रश्मि की छोटी बहन दिखाई दी । फिर सलिल ने तुरंत उसको मैसेज किया और रश्मि के बारे में जानकारी मांगी।और रश्मि का फोन नंबर मांगने लगा। बहुत रिक्वेस्ट करने पर रश्मि की बहन ने नंबर दे दिया। फिर सलिल ने रश्मि को फोन मिलाया , पहले तो रश्मि ने फोन नहीं उठाया लेकिन जब बार बार फोन आने लगे तो उसने उठाया।हेलो रश्मि मैं सलिल बोल रहा हूं ।अरे तुम्हें नंबर कहां से मिला
बस मिल गया। रश्मि टाल गई कि इतने सालों में अब सलिल को क्या बात करनी है। जबकि हम दोनों के रास्ते अब अलग अलग है पहले जैसा अब कुछ भी नहीं है।
बार बार रिक्वेस्ट करने पर रश्मि ने बात कर ली उसने सोचा अब इतने सालों में क्या पुरानी बात होगी बस दोस्तों की ही तरह बात होगी और क्या। लेकिन सलिल रश्मि को बार बार फोन करने लगा । थोड़ी औपचारिक बातचीत के बाद सलिल पुराने प्यार की दुहाई देने लगा। रश्मि मैं तुमसे अब भी प्यार करता हूं।मैं तुमको कभी भी भूल नहीं पाया,तुम मेरा पहला प्यार हो और मैं जानता हूं कि तुम भी मुझे उतना ही प्यार करती हो जितना मैं तुमसे करता हूं। रश्मि ने समझाया देखो सलिल अब पहले प्यार को भूल जाओ अब हमारी और तुम्हारी दोनों की शादी हो चुकी है।हमारा एक परिवार है ।मैं अब ऐसा कुछ नहीं करना चाहती जिससे हमारे परिवार पर आंच आए । लेकिन सलिल नहीं मान रहा था और रश्मि को फोटो भेजने की जिद करने लगा। फिर कहने लगा तुम्हारे पति से मुझे जलन होती है । मेरे प्यार को वो मुझसे छीन ले गए। रश्मि कहने लगी कैसा प्यार वो तो हम दोनों के मन में ही था कभी एक दूसरे से इजहार नहीं किया।और उस समय में सब संभव नहीं था।अब तुम अपनी दुनिया में खुश रहो और मैं अपनी दुनिया में।
लेकिन सलिल की दीवानगी बढ़ती जा रही थी। विडियो काल करने लगा।एक बार तो रश्मि के शहर तक आ गया और रश्मि को होटल में आने की जिद करने लगा। रश्मि ने मना किया तो रश्मि के पति को सबकुछ बताने की धमकी देने लगा। रश्मि ने कहा मेरे पति एक सुलझे हुए इंसान हैं वो इन सब बातों पर विश्वास नहीं करेंगे।और फिर इतने साल बीत जाने के बाद कौन अब इन सब चक्करों में पड़ता है। रश्मि के शहर में एक प्रसिद्ध देवी मंदिर था वहां सलिल अक्सर आने लगा । बहुत जिद करने पर रश्मि एक बार बिना बताए पति को सलिल से मिलने गई ताकि उसको अच्छे से समझा सकें कि अब हम दोनों नहीं मिल सकते । रश्मि जब सलिल से मिलने गई तो वो होटल चलने की जिद करने लगा और एक बार हम बिस्तर होने की जिद करने लगा।अब रश्मि ने साफ़ साफ़ इंकार कर दिया कि मैं अपने पति के साथ बेवफाई नहीं कर सकती ये ग़लत है।था कभी हम दोनों में प्यार मगर इतने सालों बाद अब मुझे पुराने प्यार की दुहाई मत दो। तुम्हारी नीयत ठीक नहीं है तुम मुझे शरीर से पाना चाहते हो । प्यार तो एक पवित्र रिश्ता होता है सलिल। प्यार पूजा जाता है। यदि दो प्रेमियों को अपना अपना प्यार मिल जाता है तो ठीक है नहीं तो सारी उम्र दिल के अंदर ही दफन हो जाता है।
रश्मि सलिल को मना करके घर आ गई और ये तय किया कि अब वो सलिल से कभी नहीं मिलेगी। उसके मन में सच्चा प्यार नहीं वासना की चाह है।
इसके बाद सलिल कई बार रश्मि के शहर आया और वो रश्मि को होटल बुलाता रहा लेकिन रश्मि ने उसे सकती से मना कर दिया।और सलिल को धमकी दी कि यदि तुम नहीं माने तो मैं तुम्हारे पत्नी और बेटे को सबकुछ बता दूंगी। अपने मन की इच्छा पूरी न होने पर सलिल पागल हो गया और रश्मि को अश्लील वीडियो और मैसेज करने लगा अब रश्मि को सही मायने में सलिल की मानसिकता का अहसास हुआ।और रश्मि सोचने लगी कि इतना पढ़-लिखकर भी सलिल गंदी मानसिकता का शिकार है। ऐसे इंसान से दूरी बना लेना ही बेहतर है। जीवन के इस मोड़ पर आकर अपने जीवन साथी के साथ ऐसा धोखा करना कहां तक सही है।
रश्मि के मन में जो इतने सालों बाद एक बार फिर से प्यार का अंकुर फूटा था वो सलिल के व्यवहार से टूट गया रशिम ने आज पूरी तरह से मन से सलिल को बाहर निकाल फेंका ।इस उम्र के मोड़ पर अपने परिवार को संभालना सबसे बड़ी समझदारी है।जो कुछ भी था कभी हम दोनों के बीच अब मैं उसे पूरी तरह भूल जाना चाहती हूं ।भूल तो मैं इतने सालों में गई ही थी वो तो जाने कहां से आकर सलिल शांत दरिया में फिर से कंकण फेंक कर उथल-पुथल मचा दी थी।और रश्मि ने पूरी तरह से सलिल का बायकाट कर लिया।और अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गई।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
25 फरवरी