रमा एक नामचीन वकील थी।महिलाओं के हक के प्रति आवाज उठाती और हर केस जीतती हर कोई कहता इसे मर्द जात से नफरत है।कोई कहता शादी हुई थी पर अकड़ और अधिकार जमाने की आदत के कारण घर टूट गया जितने लोग उतनी बातें।एक बार रमा के पास एक केस आया जिसमें आदित्य नाम का लड़का और उसकी पत्नी अदिति का था लव मैरिज थी।
आज दोनो एक दूसरे से अलग होने के लिए लड़ रहे थे और कुछ साल पहले दोनों अपने घर वालो से लड़ कर शादी के लिए लड़ रहे थे।अदिति रमा से मिलने आई तो उसकी असिस्टेंट सुनीता ने उससे पूछा आखिर क्या परेशानी है बताओ तो सही क्यों अलग होना चाहते हो अरे उस घर में रहना मुश्किल है सास ससुर सबकी जी हजूरी करो।
वो देवर है भाभी भाभी करता रहता है मैने शादी आदि से की थी ना कि उसके खानदान से पहले तो बड़ा कहता था कि मैं तुम्हारा हूँ सिर्फ तुम्हारा और अब देखो पापा का बिजनेस संभाल रहा है वो घर रहते है।रोज़ की रिश्तेदार मुझे आजादी चाहिए ना कि गुलामी कैसा परिवार है।मै बस एक दिन इसके साथ नहीं रहूंगी।
ठीक है मै मैडम को इनफॉर्म कर दूंगी।अगले दिन सुनीता ने रमा को केस की डिटेल्स दी और बोला उन्हें जल्दी डायवोर्स चाहिए हा ऐसा ही होता है पहले सब्ज़ बाग़ दिखाते हैं और फिर सच्चाई कुछ और ही निकलती हैं।
शाम को घर लौटते हुए रेडलाइट पर रमा की गाड़ी खड़ी थी तभी वहां पर एक और गाड़ी आई उस गाड़ी में अमित बैठा था।अमित को देख रमा पीछे हो गई।घर आई तो मॉम डैड एस usual क्लब गए हुए थे। कॉफी का कह वह अपने कमरे में आ गई अमित को देख वो अतीत में खो गई और 17 साल पहले चली गई कॉलेज का पहला दिन लेट हो गई थी
तो भागती भागती अंदर घुसी जहाँ ओरिएंटेशन चल रहा था वहां किसी से जोर से टकराई गिरने वाली थी पर एक मजबूत हाथ ने उसे थाम लिया।वो अमित था जिसे देखते ही वो दिल दे बैठी उसका सीनियर था वो। रमा फर्स्ट ईयर llb की छात्र थी और अमित थर्ड ईयर ।अमित का भरा पूरा परिवार था
घर में दादा दादी दीवानचंद और नम्रता माता पिता गौरव और निमिषा ।चाचा चाची राजेन्द्र और रागिनी ।अमित सुमित दो भाई एक बहन चारु और चाचा के बच्चे वरुण और करुणा सब मिल कर रहते थे।एक दिल एक जान थे सब ।अमित के दादा जी की लॉ फर्म थी जिसमें उनका पूरा परिवार इन्वॉल्व था और उनकी फर्म दिन रात तरक्की कर रही थी। अमित के दादा जी हमेशा कहते थे
कि ये घर एक है इसलिए हम तरक्की कर रहे हैं।करोड़ो की जायदाद थी पर घमंड किसी में भी नहीं था।बच्चे भी अदब वाले मान सम्मान करने वाले कुल मिला कर एक आदर्श परिवार उधर रमा के घर में रमा उसका का भाई ईशान मां रजनी और पापा मयंक थे। उनके दादा रामनाथ भी उनके साथ रहते थे।
पर उसे परिवार में किसी को कैसे कोई मतलब नहीं था। रामनाथ का कंस्ट्रक्शन का बिजनेस था उसी को उनका बेटा मयंक भी संभालता था। उनकी पत्नी रजनी जो घर में रहती थी।
पर किटी और क्लब में ही बिजी रहती थी। प्राइवेसी के नाम पर बच्चों की लाइफ में दखल ना देना बच्चों कोई इग्नोर करना बच्चे भी सिर्फ अपनी जिंदगी में मस्त रहते। उन्हें भी मां-बाप तक चाहिए होते हैं जब पैसे की या किसी चीज की जरूरत होती है रामनाथ मयंक को बहुत बार समझाते कि घर की तरफ ध्यान दो बच्चे हाथ से निकल रहे हैं।
पर मयंक अपनी ही दुनिया में मस्त था। कभी-कभी वह अपनी पत्नी को कहता तो वह तो बिल्कुल ध्यान नहीं देती जिसका परिणाम ये हुआ ईशान कम उमर में ही नशे की लत में पड़ गया और रमा अकड़ बाज़ जिद्दी हो गई बस ये बात अच्छी थी उस में की वो जिद सही चीज़ की करती थी गलत बातों की नहीं।
अमित और वो पास आये और ग्रैजुएशन और मास्टर के बाद उन्होंने शादी का फैसला लिया क्योंकि अमित ऑलरेडी सेटल हो गया था और वो उसकी मास्टर्स का वेट कर रहा था। रमा का मास्टर्स हुआ अमित ने उसे कहा चलो आप शादी कर लेते हैं पर रमा बोली अभी नहीं अभी मुझे प्रैक्टिस करनी है अमित ने कहा
अपनी फॉर्म है तुम प्रैक्टिस वहां भी कर सकती हो परम बोली नहीं मैं श्रीवास्तव जी के पास प्रैक्टिस करूंगी।ये मेरा सपना है रामानी श्रीवास्तव के यहां प्रैक्टिस की और 6 महीने में जो उसे केस मिला उसके अगेंस्ट j जो वकील था वह और कोई नहीं अमित के पापा थे। रमा की दलीलों से वह बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने घर आकर की बहुत सुंदर त।रीफ की।
फिर अमित ने अपने मन की बात घरवालो को बताई और रमा और अमित का रिश्ता तय हो गया और एक महीने बाद शादी। शादी होकर रमा अमित के घर आ गई। वह देखी इनके घर में सब एक साथ बैठे रहते हैं। ब्रेकफास्ट और डिनर तो सब एक साथ ही करते।
रमा अमित से कहती तुम्हारे घर में सकून नहीं है हर समय भीड़ हम दोनों का टाइम कहा है अरे परिवार है तभी तो हम है कम ऑन तुम्हे भी आदत हो जाएगी पर रमा कटने लगी थी उसे लगता अमित पर सिर्फ उसका अधिकार है अगर कोई अमित को बुलाता तो उसे बहुत गस्सा आता ।
उसे लगता घर आने के बाद हमें सिर्फ उसके पास रहे। पर अमित शुरू से परिवार के बीच रहा था तो उसे परिवार के साथ रहना अच्छा लगता एक दिन संडे था रमा सो रही थी सुमित अमित के कमरे में आया उसे पता नहीं था अमित नहीं है भाभी है रूम में उसने जाकर अमित की अलमारियों को खोल कुछ सामान निकाला और पीछे से रमा आ गई
बोली अमित डार्लिंग आज मेरा दिन है जल्दी क्यों उठे आओ ना। सुमित पीछे मुड़ा सॉरी भाभी ये मै हूँ मुझे पता नहीं था भाई नहीं है रूम में आप है रमा ने शोर मचाया कि सुमित उसके कमरे में घुस आया और उसके साथ बतमीजी की ।सुमित कहता रहा पर रमा नहीं रुकी अमित उसके सास ससुर सबने मनाने की कोशिश की पर रमा नहीं मानी।
रमा ने अमित से कहा अगर अलग घर लोगे तो ही मैं तुम्हारे साथ रहूंगी और अपने परिवार से रिश्ता तोड़ना होगा।अमित ने साफ मना कर दिया और रमा अमित अलग हो गए। रमा के दादा जी ने उसे समझाया था बेटा रिश्ते अधिकार से नहीं करुणा से निभाये जाते हैं तुम अपना दिल बड़ा करो उसमें करुणा लाओ सबको प्रेम दो पर उस समय घमंड और अकड़ में रमा
अकेली हो गई कई बार कोर्ट में अमित दिखाई देता पर उसके चेहरे पर वो मुस्कान नहीं थी।अगले दिन आदित्य और अदिति का केस था।
आदित्य का केस अमित ही लड़ रहा था आज सेम कारण से ये केस था दोनो ने अपनी बात रखी ।अमित बोला घर परिवार ही तो शादी बचाते है बड़े सही सलाह देते हैं पर आजकल की लड़कियों को लगता है कि वह हमारे लिए मुसीबत है सिर्फ हमारा पति हमारा है और किसी का नहीं पर यह गलत है
अगर परिवार ही नहीं होगा तो हम अपने बच्चों को क्या सिखाएंगे कल को हमारे बच्चे नाथों की तरह बनेंगे हम लोग यह नहीं जानते और सिर्फ अपने झूठी अकड़ में अपना परिवार तोड़ देते है। माई लॉर्ड मैं आपसे गुजारिश करूंगा कि इन्हें 6 महीने का समय दिया जाए 3 महीने अकेले और 3 महीने परिवार के साथ रहने का और अकेले रहते हुए कोई काम वाली कोई
मेडी ने ना मिले सारे जिम्मेवारियां अकेले संभाले फिर आप बताइएगा की क्या होता है। इस अनोखे फैसले के लिए जज भी तैयार हुए और 6 महीने का समय दिया गया और 6 महीने बाद सच में अदिति ने आकर कहा मै तलाक नहीं लूंगी मुझे परिवार के साथ रहना है।
अमित कि जीत गया सब ने अमित के सूझ बूझ की तारीफ की एक और तलाक होने से उसमें रोक दिया था। कोर्ट के बाहर रमा मिली वोली मुझे हरा तुम खुश होगे । अमित बोला मैं क्यों खुश हूंगा मैं सिर्फ एक घर टूटने से बचा पाया यही मेरी सफलता है।
यदि तुम भी मेरी बात समझ जाती तो आज हमारा घर भी एक होता। सुमित अपनी बेगुनाही बताता रहा पर तुम जिद में चली गई परिवार को तोड़ कर क्या है आज तुम्हारे पास तुम भी तनहा मै भी तनहा पर मेरे पास तो परिवार है तुम तो अकेली हो।
कोई घर में तुम्हारा इंतजार करने वाला नहीं कोई यह पूछने वाला नहीं कि खाना खाया या नहीं तुम्हारी तबीयत ठीक है या नहीं। तुम्हारी खुशी अकेलेपन में थी तो अकेले ही रहो। चलता हूं। अमित चला गया एक सवाल छोड़कर की रमा अकेली है जिस पर उसका अधिकार था उसे भी वो गवा बैठी थी। अमित जा रहा था पर वो उसे रोक नहीं सकती थी।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी