सागर और संध्या समुद्र किनारे बैठे अपने भविष्य के सपने सजाने में डूबे थे ।लहरों की आवाज और ठंडी -ठंडी हवा बड़ी रोमांटिक और सुहानी लग रही थी। संध्या ने सागर के हाथों को अपने हाथों में लिया और आंखें बंद करके सागर के कंधे पर सिर टिका दिया। सागर ने संध्या के गालों को थपथपाया और बोला..संध्या…।हूं….क्या सोच रही हो। कुछ नहीं। बोलो ना । सागर मुझे कभी-कभी बहुत डर लगता है ।
हमारा शादी करके घर बसाने का सपना पूरा तो होगा ना? हां पगली क्यों नहीं। जब हमारे घर वाले भी हमारी शादी के लिए तैयार हैं। तो क्यों नहीं होगा। मैं कल ही पापा से बात करूंँगा और जल्दी ही तुम्हारे घर बारात लेकर आऊंँगा । चलो अब मुस्कुरा दो। एक होने के सपने आंखों में सजाये दोनों अपने घर लौट गए।
जल्दी ही दोनों परिवारों की सहमति से शादी की तारीख पक्की कर दी गई। समय जैसे पंख लगा कर उड़ रहा था । आज सागर की बारात चढ़ रही थी। उधर संध्या सागर के नाम की मेहंदी लगाये लाल जोड़े में अपने साजन का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। चारों तरफ खुशी और उल्लास था।
चढ़त के समय घोड़ी के आगे जो आतिशबाजी की जा रही थी एक पटाखा घोड़ी के पैर में जा लगा। घोड़ी बिदक गई । सागर का संतुलन बिगड़ा और वह उछलकर सड़क पर जा गिरा। घोड़ी सागर को रौंदते हुए भाग गई। घोड़ी के पैर में सागर का पटका उलझा और वह घोडी के साथ खिंचता चला गया।
सागर को अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सब कुछ इतनी जल्दी और पलक झपकते हुआ कि किसी को कुछ समझ नहीं आया। सागर और संध्या की खुशियों को पता नहीं किसी की बुरी नजर लग गई या फिर भगवान ने ही उनसे नज़रें फेर ली।
संध्या के घर खबर पहुंँचा दी गई। सुनते ही संध्या की आंखों के आगे अंधेरा छा गया और वह चक्कर खाकर गिर पड़ी। संध्या का तो सब कुछ लुट ही चुका था। उधर सागर के मां-बाप अपने जवान बेटे को खो चुके थे ।लेकिन सागर की मम्मी ने उस समय भी संध्या के बारे में पूछा। जबकि आसपास की औरतें संध्या को ही मनहूस बता रही थी।
सागर की मम्मी ने अपने कलेजे पर पत्थर रखकर अपने छोटे बेटे जिगर को संध्या से शादी करने को कहा। वे जिगर से बोली संध्या सागर की जिंदगी थी। इस सब में उस बेचारी का क्या कसूर है। वह तो जरा सी देर में अभागी हो गई। जिगर ने परिवार और रिश्तेदारों की बात मानकर शादी के लिए हांँ कर दी।
उधर संध्या के परिवार वाले संध्या को इस हालत में देख बहुत दुखी थे। जब उन्हें उसकी ससुराल वालों की तरफ से शादी का प्रस्ताव मिला तो उनका दिल सागर के परिवार वालों के लिए सम्मान से भर गया। संध्या को उसकी मम्मी ने समझाया। पर बस वह जैसे चाबी भरने से कोई खिलौना चल पड़ता है। यंत्रवत जिगर के साथ शादी की रस्में पूरी कर अपनी ससुराल आ गई। जिस ग्रह प्रवेश के समय को सोचकर वह शर्मा उठती थी आज वही सब उसे अंदर तक तोड़ रहा था।
संध्या और जिगर जब कमरे में अकेले थे । तब संध्या बोली जिगर सागर मेरा पहला प्यार था । शायद मैं तुम्हें कभी भी वह जगह नहीं दे पाऊंँगी । जिगर बोला मैं समझता हूंँ। क्यों ना इस समय की तरह ही हम अपना भविष्य समय के हवाले कर दें। संध्या पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाती।
जिगर भी संध्या का पूरा सम्मान करताऔर उसकी जरूरतों का ध्यान रखता।इस शादी को एक साल होने को आया था। एक दिन संध्या की सहेली आई जो संध्या की शादी के समय अपने पति के साथ विदेश में थी। उसे घर में एक अजीब सा सन्नाटा महसूस हुआ।
उसने संध्या से कहा संध्या क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम सागर के परिवार वालों के साथ अन्याय कर रही हो। क्या कसूर है उनका वे तो अपने बेटे की शादी कहीं और करके अपने घर में दोबारा से खुशियां ला सकते थे। संध्या इस घर का वंश बढ़ाने के बारे में सोचो। एक बच्चा तुम्हारी सब की जिंदगी बदल देगा। अपनी सहेली के जाने के बाद संध्या सोचने लगी। सही तो कह रही थी वह । क्या दिया है मैंने इस परिवार को । उसने जिगर से मां बनने की इच्छा जाहिर की।
एक साल बाद दोबारा उसकी सहेली उसके घर आई तो आज घर का माहौल एकदम अलग था। सब खुश थे । खुद संध्या भी । एक बच्चे के रूप में उस घर को एक खिलौना जो मिल गया था। संध्या इस घर को पुनर्जीवन देने के लिए तुम्हें बहुत बधाई ।संध्या अपनी सहेली के गले लग गई। आज उसकी आंखों से पूर्णता और खुशी के आंसू बह रहे थे।
नीलम शर्मा