अर्शी चलो जल्दी से आकर अपना खाना खा लो उसके पापा रजत किचेन से आवाज लगाते हुए बोले।
अर्शी जो स्कूल से बस आई ही थी, उत्सुकता से अपने पापा से पूछती है पापा आज मुझे मेरी क्लास के लड़के ने चाकलेट दी है, इसका मतलब वो मुझसे प्यार करता है।
रजत निर्मल स्वर में बोला “ऐसा किसने बोला कि चाकलेट देने का मतलब है प्यार होता है?” अर्शी अपने पापा को देख कर बोली ये वेलेंटाइन वीक इसीलिए तो होता है और इससे पता चलता है कौन आपको प्यार करता है। आप तो मम्मा से प्यार ही नहीं करते हो, उनको कभी कोई तौफा भी नहीं देते हो। उदास अर्शी बोली।
ऐसा नहीं है बेटा प्यार चीज़ें देके नहीं तोला जा सकता और किसने कहा तुम्हे कि तुम्हारे पापा ने मुझे कोई तौफा नहीं दिया? घर में घुसती श्रद्धा बोली। मम्मा आप कब आये? और अगर प्यार ऐसे नहीं होता है तो कैसे होता है?
दरअसल श्रद्धा ही पूरे घर का खर्चा और पानी देखती थी तो दूसरी तरफ रजत घर संभालता था।
श्रद्धा हल्का सा मुस्कुराई और बोली प्यार के एहसास है जो सिर्फ महसूस हो सकता है और सिर्फ ई लव यू बोलने से प्यार नहीं होता है उसे, निभाना भी पड़ता है। तुम्हारे पापा ई लव यू नहीं कहते या हम वेलेंटाइन डे नहीं मनाते इसका मतलब ये नहीं कि हम एक दूसरे से प्यार नहीं करते है। अब देखो तुम्हारे पापा मुझे इतना सपोर्ट करते है, मैं ऑफिस में होती हूँ तो घर का ध्यान रखते है।
अर्शी पलक झपकते ही बोली “पर पापा के पास नौकरी नहीं है, तभी तो घर पर रहते है।”
ये सुनते ही रजत के हाथ से ग्लास गिर गया और कांच टूटने की आवाज़ आई पर उस कांच से ज्यादा उसको अर्शी के शब्द कांच की तरह दिल पर चुभे थे।
श्रद्धा तोड़ी सी खफा हुई और बोली तुम्हे पता भी है, तुम्हारे पापा ने क्या किया है आज तक इस घर के लिए जो तुम ऐसा कह रही हो? नहीं ना? मैं बताती हूँ, तब तुम्हे शायद एहसास हो कि तुमने क्या किया है।
घर में सन्नाटा सा छा गया और श्रद्धा उस समय चली गई जब वो उस घर में नई बहु बन कर आई थी।
उसी दिन रजत ने श्रद्धा को कह दिया था कि वो उससे प्यार करता है पर उसके लिए उसके पहले प्यार, उसकी मां की जगह नहीं बदलेगी। वो अपनी सास की खूब सेवा करती थी और दोनों बिल्कुल मां बेटी की तरह रहते थे। पर शायद दुनिया को ये खुशी मंजूर नहीं हुई और रजत की मां की तबियत खराब रहने लग गई, डॉक्टर को जब दिखाया तो कैंसर का पता चला, साथ ही में डॉक्टरों ने उनको अपने खान पान का ध्यान रखने को कहा। रजत अपनी माँ का ध्यान रखने के लिए नौकरी छोड़ने वाला था कि उसकी माँ बोली “तू मेरे लिए नौकरी नहीं छोड़ेगा, कैंसर का क्या है कुछ समय में ठीक होने लग जाएगा और तू टेंशन मत ले, जैसा डॉक्टर ने बोला है मैं वैसे ही ध्यान रखूंगी और स्वस्थ हो जाऊंगी।” श्रद्धा को भी उन्होंने नौकरी छोड़ने के लिए मना कर दिया था।
पर नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था और रजत की मां की एक साल के अन्दर अंदर ही उनकी मृत्यु हो गई थी। रजत अपनी माँ को खोने से उभरने कि पूरी कोशिश कर रहा था पर वो अपने आप को ही दोषी मान रहा था, कि उस की वजह से उसकी मां की मृत्यु हो गई। जब एक साल के बाद अर्शी आई तो रजत ने ठान लिया था कि वो अपनी बेटी की सेहत का पूरा ध्यान रखेगा और जो गलतियां उससे पहले हुई थी जब उसकी मां बीमार थी वो दुबारा नहीं दोहराएगा।
इसी के चलते रजत ने अपनी नौकरी छोड़ कर पूरा ध्यान अर्शी की सेहत में और उसके खान पान का ध्यान रखने में अपनी जिंदगी न्योछावर कर दी।
साथ ही में श्रद्धा ने भी रजत को बोला “मैं हू आपके साथ, जैसा आपको ठीक लगे वैसा कीजिए बाकी मैं संभाल लूंगी”।
दुनिया ने रजत को बैठ समझाया, यहाँ तक रिश्तेदारों ने ताने भी दिये की मर्द घर बैठा अच्छा नहीं लगता, श्रद्धा अपनी नौकरी छोड़ देगी पर रजत अपने फैसले से टस से मस न हुआ, क्योंकि उसके लिए उसकी बेटी अर्शी से बढ़कर कुछ नहीं था।
उन पुरानी यादों से वापिस आती श्रद्धा बोली “ये होता है प्यार जिसमें खुद की परवाह किए बिना, उसके लिए त्याग करना जिससे आप प्यार करते हो, बोलते तो सब है पर निभाते बहुत कम और तुम्हारे पापा लाखों में नहीं करोड़ो में एक है।
अर्शी ये सब सुनकर सन्न रह गई और वो कांच जैसा दर्द अपने दिल में अब खुद भी महसूस कर पा रही थी।
उसकी आवाज गले में अटक गई और आँखों में आंसू थे, पर वो हकलाते हुए बोली पा…पा..पापा मुझे माफ कर दीजिए मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मुझे ऐसा नहीं बोल…बोलना चाहिए था। अब मैं सब समझ गई हू।
रजत ने श्रद्धा के तरफ देख फिर अर्शी की तरफ और उसको अपने सीने से लगाते हुए बोला “कोई नहीं बेटा, मैं जानता हू तुम्हारा कोई मकसद नहीं था मुझे ठेस पहुंचाने का, चलो अब चुप हो जाओ; खाना भी ठंडा हो रहा है, मैं गरम कर के लाता हू, फिर हम साथ में खाएंगे।
तभी अर्शी ने रजत को और कस कर गले लगा लिया और बोली “पापा आप ही मेरा *पहला प्यार* है” श्रद्धा ने भी रजत को पीछे से गले लगाते हुए और मुस्कुराते हुए बोला “मेरे भी”।
क्या आपको भी लगता है कि हमारे परिवार से ज्यादा हमें कोई प्यार कर सकता है?
#हैप्पी वेलेंटाइन डे।।
लेखिका
तोषिका