यह आजकल के बच्चे (भाग-8) – मीनाक्षी सिंह : Moral stories in hindi

अब आगे…

रात का समय है..

रोहन की मां मीना जी अचानक से बेहोश हो गई है …

जिसे देखकर सभी घर वाले घबरा जाते हैं..

सभी लोग उन्हें लेकर  हॉस्पिटल आए हैं..

क्या हुआ है डॉक्टर ..??

अचानक से ऐसे…

खाना पीना खाकर ठीक से सोई थी मीना…

फिर मैंने उसे उठाने की कोशिश करी …

उठी नहीं रही थी…

बेहोश थी …

सांसे चल रही थी…

अभी हम कुछ नहीं कह सकते सर…

पहले टेस्ट कर ले…

डॉक्टर ने कहा…

रविकांत जी घबरा गए थे…

अपने बड़े भाई साहब को उन्होंने फोन लगा दिया था …

पापा रात में ताऊजी को परेशान कर रहे हो…

क्यों…??

घर-  परिवार के लोगों को घर की समस्या नहीं बताई जाती क्या…??

मनोरमा के पूछने पर रविकांत जी तीखे स्वर में बोले…

जैसी आपकी मर्जी पापा …

रोहन भी घबरा गया था…

वह इधर से उधर घूम रहा था…

और मन में बहुत सारे सवाल  थे उसके …

जीवन का सुख देखे बिना ही इस दुनिया से विदा तो नहीं हो जाएंगी मम्मा …

कितने अरमान थे उनके मेरी शादी के…

मेरे बच्चों को खिलाएं …

और मैं क्या कर रहा हूं…

मुझे आपसे एक बात करनी है पापा…

रोहन ने  रविकांत जी से कहा…

कुछ भी सुनने की स्थिति में नहीं हूं अभी मैं…

रोहन ने अपने पिता का हाथ पकड़ लिया ..

पापा घबराइए मत …

भरोसा रखिए …

मम्मा ठीक हो जाएगी …

लेकिन पापा आए दिन मम्मा बीमार होती रहती है …

मेरा भी मन बहुत घबराता है …

अगर आप मेरी माने  तो वह रिश्ता जो आज हम मना करके आए हैं,,उसके लिए हां कह दीजिए  प्लीज …

मुझे वह लड़की सही लगी….

रोहन बोला …

यह किस समय ,,तू  कैसी बातें कर रहा है …

तू  यह बात समझ रहा है ,,अभी यह तक  नहीं पता कि तेरी मां कैसी है …

मां के लिए ही कह रहा हूं पापा…

मम्मा को भी खुशी होगी इस बात से…

यह सब बातें बाद में देखी जाएंगी …

पहले डॉक्टर को टेस्ट कर लेने दे …

रविकांत जी बोले…

कुछ समय बाद डॉक्टर साहब आए…

हां जी सर , बताइए…

मम्मा कैसी  हैं ..??

मनोरमा और रोहन ने एक साथ सवाल पूछा…

देखिए ,उन्हें वेंटिलेटर पर लेना पड़ा है ….

क्योंकि बेहोश थी …

अभी भी कुछ क्लियर हो नहीं पाया है …

वेंटिलेटर पर क्यों …??

बस टेंपरेरी तौर पर कुछ टाइम के लिए रखना पड़ा है…

उनको होश आते ही वेंटिलेटर से हटा दिया जाएगा …

डोंट वरी…

इतना सीरियस बात नहीं है …

आप लोग घबराइए नहीं…

डॉक्टर इतना बोलकर चल दिए…

पर पापा वेंटिलेटर पर ,,??

आप समझते हैं…

मनोरमा बोली …

आजकल सभी को वेंटिलेटर पर कर  देते हैं…

ज्यादा बड़ी बात नहीं है…

रविकांत जी बोले …

पापा ..

यह डॉक्टर कई बार पैसे बनाते हैं …

आपको वह सरला मौसी का केस याद है ना…

8 दिन यही बोलते रहे…

सही हो जाएगी…

हालत ठीक है …

और वेंटिलेटर पर रखे  रहे ..

हर दिन का चार्ज बनाते रहे …

और 8 दिन बाद वेंटिलेटर से हटाकर कह दिया…

कि अब  नहीं रही …

बॉडी रिस्पांस नहीं कर रही है …

मेरा मन बहुत घबरा रहा है पापा…

मनोरमा बोली …

तू हमेशा नेगेटिव ही बोलेगी …

कभी तो अच्छा बोल दिया कर…

रविकांत जी बोले …

आपको मेरी बात इतनी बुरी लगती है …

तो मैं चली जाती हूं…

मनोरमा रोती हुई बोली ….

दीदी, पापा ..

this time is not for argument ….

प्लीज भगवान पर ,,डॉक्टर भरोसा रखिए….

मेरा मन कहता है…

मम्मा  को कुछ नहीं होगा …

उनके जीवन के बहुत से अरमान है…

वह उन्हे पूरे करने हैं…

डॉक्टर …

क्या मैं मम्मा  से मिल सकता हूं …??

डॉक्टर को जाता देख रोहन ने पूछा…

आप दूर से ही देख सकते हैं…

उनके ज्यादा पास मत जाइएगा….

और सिर्फ एक बार में एक ही परसन  पेशेंट से मिल सकता है…

रोहन को  जाने की इजाजत दे दी गयी…

रोहन  अपनी मां के पास बैठा उनके कानों के पास धीरे से कुछ कह रहा था…

कोई भी नहीं सुन पाया उसने क्या कहा…

वह बाहर आ गया…

क्या तेरी मां ने कुछ रिस्पांस किया…??

रविकांत जी ने पूछा …

नहीं पापा…

एक दिन हो चला था…

अभी तक मीना जी की हालत ठीक नहीं थी…

घर के बाकी लोग भी आ चुके थे …

तूने कितने दिन की छुट्टी ली है रोहन….??

तेरी छुट्टियां भी बस दो तीन ही  बची थी …

रविकांत जी ने पूछा …

पापा..

जितनी भी  बाकी हो ..

मम्मा  से ज्यादा  जरूरी नहीं है …

रविकांत जी रोहन की तरफ देखते रहे…

फिर डॉक्टर आए..  रविकांत जी ने फिर प्रश्न किया…

कुछ तो बताइए …

मीना कैसी है …??

कल से आप लोगों में से कितने लोगों से पूछ चुका हूं…

अभी तक आप लोग कोई भी रिस्पांस नहीं कर रहे…

सब कह रहे हैं अभी अंडर ऑब्जर्वेशन है…

प्लीज क्लियर तो कीजिए…

अगर यहां पर प्रॉपर ट्रीटमेंट नहीं हो पा रहा है…

तो  कहीं और लेकर जाएं हम …

लेकिन हमें प्लीज होप  में मत रखिए …

रविकांत जी  हाथ जोड़कर डॉक्टर से बोले…

आप क्या समझते हैं ..

कि डॉक्टर हमेशा सिर्फ लोगों का पैसा खाने के लिए ही करते हैं ऐसा…

क्या हमारे अंदर इमोशंस नहीं होते …

जी ऐसी कोई बात नहीं है …

अगर हमारे बस का नहीं होगा..

तो हम आपको जरूर इन्फॉर्म करेंगे ..

दो-तीन घंटे और गुजर गए …

तभी डॉक्टर साहब ने बोला…

अब  पेशेंट मीना खतरे से बाहर है…

उनकी हालत ठीक है …

आप लोग उनसे मिल सकते हैं …

रोहन और सभी घर वालों के चेहरे पर खुशी की  लहर दौड़ गई…

सभी लोग मीना जी से मिले …

वह अभी ठीक से बोल नहीं पा रही थी…

इशारों से ही बात कर रही थी…

आप टेंशन मत लो…

आप आराम करो ..

घर में भी सभी लोग हैं…

घर की भी चिंता मत करो मम्मा…

रोहन बोला ….

मीना जी मुस्कुरा दी….

सभी लोग मीना जी को लेकर घर आ गए …

सभी डाइनिंग टेबल बैठे खाना खा रहे थे …

पिता रविकांत जी की तरफ देखकर रोहन बोला …

पापा …

आपने  चिंकी के घर  वालों से बात की…??

कौन चिंकी …??

पापा वही रिश्ता जो हम देखकर आए थे  लास्ट टाइम…

तू एक ही बात को लेकर  बैठ गया है…

अब एक बार जिस रिश्ते के लिए मना कर दिया…

मैं वहां दुबारा  बात नहीं करूंगा …

ये  मेरी शान के खिलाफ है…

रविकांत जी बोले …

मनोरमा भी  रोहन की तरफ देख रही थी …

लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी…

क्यों..?

इसमें शान की क्या बात है…

उनके घर में सब कितने खुश होंगे कि रिश्ते के लिए हां हो गई है…

अगर आप बात नहीं कर पा रहे हैं…

तो मैं ही बात करता हूं…

आज रोहन अपनी बात पर अड़  चुका था…

लड़के इस तरह हमारे घर में बात नहीं करते….

ताऊजी बोले…

तो ताऊ  जी आप ही बात कर लीजिए….

रोहन के कहने पर वीरेंद्र जी चुप रहे …

फिर थोड़ी देर में बोले…

ठीक है …

आज मैं बात करता हूं शाम को….

वीरेंद्र जी ने चिंकी के घर पर फोन लगाया …

उसके पिताजी ने फोन उठाया …

 जय श्री राधे …

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मीनाक्षी सिंह

आगरा

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