तिरस्कार – भगवती सक्सेना गौड़

दरवाजे पर कॉल बेल बज रही थी, जाकर रीना ने जल्दी से दरवाजा खोला।

 सामने महिमा पुलिस की वर्दी पहने खड़ी थी, आई.पी.एस का बैच लगाए। आज उसको पहली बार वर्दी मे उंसकी आँखे भर आयी।

रीना ने खुश होकर कहा, “वाह, तुम्हे यूँ देखकर मैं प्रसन्न हो गयी, सरप्राइज विजिट, घर मे सब ठीक है।”

“कल ही आयी हूँ, होली मम्मी पापा के साथ मनाने आये हैं हमलोग ।”

“बैठो, अभी मैंने गर्म गुझिया बनाई है, तुम्हे खिलाती हूँ।”

थोड़ी देर में महिमा चली गयी और रीना के मन मे अतीत के रंग बिखेर गयी।

बचपन से उसने बहुत तिरस्कार सहा था, पर ईश्वर की लीला अपरंपार है, वो जानता है, मनुष्य की रचना में बैलेंस कैसे करना है, तो उसने रीना को बहुत तीक्ष्ण बुद्धि की बनाया और वो स्नातक के बाद ही गणित की शिक्षिका बन गयी, उसके मां,पापा रिश्तों के लिए कई वर्ष परेशान रहे। कई जगह बात चली,

पर हर जगह लोगो की निगाहों में बॉलीवुड की सुंदरता भर चुकी थी, सबको गोरी बहू ही चाहिए, चाहे लड़का बिल्कुल काला मोटा हो। एक समय ऐसा भी आया कि रीना ने अपने माँ, पापा से बोला मैं बहुत खुश हूं, स्कूल के बच्चो को गणित के इक्वेशन समझते हुए, जब जीवन मे कोई एक्स, वायी, जेड की महिमा न जानने की कोशिश करे। ये दुनिया है, ईश्वर के रचित रंगरूप को कोई कैसे बदल सकता है, हां, व्यक्तित्व में चार चांद जरूर लगा सकते हैं।

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पर शायद ईश्वर सबका जोड़ा बनाता है, एक दिन उसके पापा ने शादी डॉट कॉम से एक लड़के को चुना उनका परिवार रीना के घर चाय पीने आने वाले थे। सुबह से घर मे तैयारी चल रही थी, पर्दे बदलो, कुशन बदलो,मम्मी ने दही बड़े, रसगुल्ले सब बना लिए और पास से रीना की ताईजी और बुआ को भी बुला लिया।



ताईजी आते ही रीना को समझाने बैठ गयी, बढ़िया सी साड़ी पहन लें, कान का झुमका, पायल सब पहनना, तेरा रंग सांवला है, इसलिए मेकअप बढ़िया करना। और रीना को हमेशा से सजना धजना अच्छा नही लगता था। तभी ताईजी बुआ की लड़की करिश्मा से बोली, सुन बेटा, तू आ तो गयी है, पर उस समय पीछे वाले कमरे से निकलना नही, पता नही, तेरी सुंदरता पर ही लोग न रीझ जाए, और कहे, हमे तो यही पसंद है। एक के बाद एक तिरस्कार वाले वाक्यों से रीना का दिन छलनी हो रहा था, कोई भी उसके गुण की बात नही कर रहा था।

और शाम को लड़का अमित के घर वाले आ गए। लड़के का रंग टक्कर का ही था थोड़ा बीस ही होगा रीना से…।

लेन देन की भी बात हुई। तभी अमित की आठवीं में पढ़ने वाली बहन बोल उठी, “अरे वाह, ये दीदी हमारे स्कूल में गणित पढ़ाती हैं, बहुत अच्छा होगा जो मेरी भाभी बन जाये।”

और अमित की मम्मी ने इशारे से बेटी से कहा, चुप रहो।

अमित आपलोगो ने पहले नही बताया कि ये जॉब भी करती हैं।

“हांजी, हमने सोचा, पता नही आपलोग पसंद करेंगे या नही।”



“अरे, बढ़िया है, पर ये समझा दीजिएगा, नौकरी करें पर घर की जिम्मेदारी भी पूर्ण करना पड़ेगा।”

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रिश्ता पक्का हो गया।

रीना की शादी हो गयी।

सालभर बाद ही वो अस्पताल में थी, डॉक्टर ने उसको होश आने पर बताया, “लक्ष्मी आई है, झूले में सो रही है।”

जल्दी से रीना ने उत्सुकता से पूछा, “मुझे दिखाइए, गोरी है या सांवली?”

डॉक्टर ने घूर कर उसे देखा, “ये कैसा सवाल है, वैसे मैं दिखा रही हूं।”

लड़की सांवली थी, एक माँ अपने जीवन को याद करके दुखी हो रही थी, फिर मन मे गांठ बांधी, इसको मैं एक सफल मुकाम तक पहुँचाऊंगी, जब तक जीवित रहूंगी कोई इसके रंग पर तंज न कर पायेगा, इसका कोई तिरस्कार नही कर पायेगा।

अब रीना और उसके श्रीमानजी की तीस सालों की मेहनत रंग लाई और उनकी बेटी आज आई.पी.एस अफसर बनकर उनके गर्व का कारण बनी। आज पूरे शहर में चर्चा थी, ये एक पुलिस अफसर के मम्मी पापा है, कितने भाग्यवान है। आज कोई भी महिमा के रंग की चर्चा नहीं कर रहा था।

स्वरचित

भगवती सक्सेना गौड़

बैंगलोर

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