नक़ाब – रश्मि प्रकाश
घर में घुसते ही अमन मानसी को चार चाटें रसीद कर ग़ुस्से में दाँत पीसते हुए बोला ,” तुम्हें वहाँ पार्टी मीटिंग में अजनबी आदमियों से बात करने की क्या जरूरत थी कितनी बार कहा है पराये मर्द से बात मत किया करो पर तुम… ।”
“ आप भी तो वहाँ कितनी बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे और जितनी महिलाएँ आई थीं सबसे हँस कर बात भी कर रहे थे और खुल कर बोल रहे थे आज स्त्री पुरुष हर क्षेत्र में बराबर है फिर जब वहाँ लोग मुझसे सवाल कर रहे थे तो क्या मैं चुप रहती…यें दोहरे चेहरे लेकर आप बाहर वाहवाही बटोर रहे और घर में अपनी ही पत्नी का अपमान.. बोलना मैं भी जानती हूँ… पति हैं तो सम्मान दे रही हूँ….मेरे भगवान बनने की कोशिश ना करें और अपने इस दोहरे चेहरे का नक़ाब हटा ले नहीं तो कल को मैं भी..।” तमतमाती मानसी ने अमन को करारा जवाब दे दिया
रश्मि प्रकाश
# दोहरे चेहरे
#दोहरे चेहरे# – राजेश इसरानी
आज एक अनाथ आश्रम का उद्घाटन था। शेठ अमीर चंद ने बहुत बड़ा दान दिया था तो मुख्यद्वार पर उनका नाम बड़े अक्षरों में लिखा हुआ था।
अपने हाथों से कुछ वृद्ध और कुछ बच्चों को खाना खिलते हुए सब बड़े अखबारों में उनकी तस्वीर छप चुकी थी।
पूरा शहर सेठ की शान में कसीदे पढ़ लिए थे और अखबार में उनका साक्षात्कार भी छपा था।
जब घर आए तो 6 वर्षीय बेटे ने पूछा पिताजी दादा दादी को कब लाओगे गांव से। हमे बहुत याद आ रही है।
जिन्हें उनके पिताजी ने दूसरे शहर वृद्धाश्रम में छोड़ आए थे।
ये सेठ अमीरचंद का दूसरा चेहरा था।
राजेश इसरानी
#दोहरे चेहरे – सीमा गुप्ता
“गौरव बेटा, कहीं दूसरी पोती न हो जाए! जा, बहू को लिंग जांच के लिए ले जा।” मां के कहते ही उसके समाजसेवी पिताजी बोले, “हां गौरव, डॉक्टर माथुर की जेब भर दी है मैंने। कानून तो क्या, किसी को भी कानों-कान खबर नहीं होगी।”
बहू ने जाने से इंकार करते हुए कहा, “पिताजी, कॉलेज में जब मैंने भ्रूण-हत्या के विरुद्ध भाषण दिया था, तो मंच से आपने मुझे प्रथम घोषित करते हुए शाबाशी दी थी। अगर मुझे आपके #दोहरे चेहरे के बारे में पता होता, तो मैं आपके घर की बहू बनना स्वीकार न करती।”
गौरव ने अपनी पत्नी का साथ दिया, “हम कहीं नहीं जा रहे। आप भी संभल जाइए, मां-पिताजी। दूसरी बेटी होने पर उसका जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाएंगे।”
अब मां-पिताजी की आंखें खुल गईं, “हमें माफ करना, बच्चो। तुम्हारी खुशी में हम भी खुश हैं।”
-सीमा गुप्ता (मौलिक व स्वरचित)
#दोहरे चेहरे
#गागर में सागर
दोहरे चेहरे – उमा महाजन
‘ आज फिर तू अपने बेटे को साथ ले आई ? अपने बेटे को राधा के बेटे के साथ घुलमिल कर खेलते देख कविता खीझी।’
‘बीबीजी,आज इसकी दादी के गांव जाने से इसे साथ लाना पड़ा।’
‘तुम क्यों परेशान हो ? वे दोनों बहुत आराम से खेल रहे हैं’ कमरे में पति के हस्तक्षेप से कविता फट पड़ी, ‘आप इसमें दखल न दें ! निम्नस्तरीय बच्चों के साथ खेलकर निम्नस्तरीय व्यवहार ही सीखेगा न ?’
‘कल ‘शिशु विकास’ मंच से तो तुम चीख-चीखकर ऊंच-नीच के भेदभाव पर भाषण दे रही थीं। पहले अपने दोहरे चेहरे की निम्नस्तरीय सोच को सुधारो, बच्चे तो निश्छल होते हैं।’
कविता निरुत्तर थी।
उमा महाजन
कपूरथला
पंजाब।
दोहरे चेहरे – अमित रत्ता
पड़ोस में गुप्ता अंकल अपने घर की ऊपरी मंजिल किराए पे देने का इश्तिहार लगाए हुए थे। एक दिन इमरान नाम का एक आदमी आया जो की बहुत ही भोला भाला दिखता था। जुबान सरस टपकता था उसकी बातों में एक जादू था किसी को भी उसके चेहरे को देखते ही तरस के भाव आ जाते थे वो खुद का नेक बन्दा लगता था। कमर लिया सुबह शाम गुप्ता जी को प्रणाम करना उनके छोटे मोटे काम करना उन्सकी बीबी भी बहुत मिलनसार थी कुछ ही महीनों में पूरे मोहल्ले के लाडले बन गए थे। सालभर गुजरा होगा कि उसने किराए के लिए बहाने बनाने शुरू कर दिए चार महीने किराया न मिलने पर गुप्ता अंकल ने कमर खाली करने को बोला तो उसने आत्महत्या की धमकी दे दी। पुलिस आई तो बोला भाग थोड़ी रहा हूँ जब होंगे दे दूंगा। आज गुप्ता अंकल को अपना घरचूड़वाने का केस लड़ते लड़ते आठ साल हो गए हैं मकान से ज्यादा पैसा बाक़ीलों को दे चुके मगर अपना ही घर खाली नही करवा पाए है। तब से मोहल्ले के कोई आदमी किसी को घर किराए पर देने से पहले सौ बार सोचता है। क्योंकि इमरान का वो भोला भाला और अब का असली चेहरा देखकर हर कोई हतप्रभ है।
अमित रत्ता
अम्ब ऊना हिमाचल प्रदेश
ज़ीना तो होगा – प्राची अग्रवाल
मम्मी अभी तो आप बाहर सबके सामने हंस बोलकर बातें कर रही थी। घर आते ही आप शांत हो जाती हैं। ऐसा क्यों? 14 वर्षीय आकाश ने अपनी मम्मी से पूछा। उसकी बात सुनकर मम्मी अपने आंसुओं को छुपाते हुए बोली तुम्हारे पापा के जाने के बाद जीवन तो शांत सा ही हो गया है लेकिन काम के लिए मुझे बाहर जाना पड़ता है तो मुझे एक बनावटी व्यवहार रखना पड़ता है अन्यथा कोई पास भी नहीं बैठायेगा।
तो मम्मी आप घर में हमारे लिए खुश नहीं रह सकती। आकाश फिर सवाल करते हुए बोला। उसकी बात सुनकर मम्मी नीता बोली,”हां बेटा तुम्हारी खुशियों की खातिर मुझे जीना तो होगा और वह भी हंसकर”
ऐसा कहकर नीता ने अपने बेटे को गले से चिपका लिया।
प्राची अग्रवाल
खुर्जा उत्तर प्रदेश
#दोहरे चेहरे
दोहरे चेहरे – रंजीता पाण्डेय
रामनाथ जी, अपनी पोती , ममता का रिश्ता ले के सुभाष जी के घर गये थे।रामनाथ जी के साथ, उनके बड़े बेटे( ममता के पापा) भी थे ।जब वो सुभाष जी के घर गये तो , सुभाष जी की बड़ी बहू, बेटी , उनकी पत्नी सभी ने बहुत अच्छे से स्वागत सत्कार किया । तरह तरह के, पकवान आये । पूरे घर की सजावट बहुत महँगे महँगे , सामानों से की गयी थी । बात बात पे ,सुभाष जी ,अपने घर, औऱ घर के सामानों की तारीफ कर रहे थे। और , बोले हमको दहेज नही चाहिए । तभी बड़ी बहू से अचानक एक ,टेबल पे रखा फूलदान गिर गया। सुभाष जी ने बड़ी बहू को सबके सामने ,बहुत जोर से डॉट दिया ।रामनाथ जी ,सुभाष जी के “दोहरे चेहरे “को भाप गये ।और वहाँ से उठ गये। बोले सुभाष जी मैं आपके घर शादी नही कर पाऊंगा । सुभाष जी ने बोला ,आप शादी के लिए क्यो मना कर रहे है? क्या नही है मेरे घर मे, आप की पोती राज करेगी राज। रामनाथ जी का बेटा , उनको किनारे ले जा के बोला, देखिये पिता जी ये लोग कितने अमीर है, और तो औऱ दहेज भी नही माँग रहे है, आप शादी के लिये क्यो मना कर रहे है? रामनाथ जी ने बोला, बेटा दहेज नही मांग रहे है, लेकिन उनकी बातों में लालच साफ दिख रहा है, औऱ जो इंसान एक पुलदान के टूटने पर अपने बहू को मेहमानों के सामने डॉट सकता है, क्या वो हमारी पोती को खुश रख सकता है , कभी नही , ऐसे “दोहरे चेहरे ” वालो के घर में मैं अपनी पोती की शादी नही कर सकता ।
रामनाथ जी हाथ जोड़ कर बोले देखिये ,बेटियाँ पैसे से राज नही करती , अपनी किस्मत, औऱ कर्म से राज करती है ।
रंजीता पाण्डेय
चेतावनी – चंचल जैन
” ये आप मीठे मीठे बोल बोल रही हो न, ये चेहरे पर चेहरा लगाकर सबको भ्रमित कर रही हो न, ये नाटक ज्यादा दिन नहीं चलेगा।”
“क्या कर लेगी आप?”
” बस, एक शक की सुई घुमाऊंची, और मेरे समर्थक आग में घी डालते जायेंगे।”
” एक पल चाहिए बस। पलभर में आपका अमन, चैन, सुख स्वाहा हो जायेगा।”
“जैसे ही जनता आपको बेनकाब करेगी, आपका ओहदा छीन लिया जायेगा।”
” एक चिंगारी ही काफी है।”
” दोहरे चेहरे की पोल खुलते ही आपकी जो दुर्दशा होगी, हमसे पंगा लेने से पहले सोच लेना।”
छटपटाती रही वह। मन में सच जानती है। पता है, झूठ चार दिन की रोशनी देगा। सत्य की कभी न कभी जीत होगी ही।
इस बार जनता ने चेतावनी दे दी हैं।
जो काम करेगा, जीतेगा।
जनता चेतन रही हैं। मुखौटा उतार नोचने को आतुर।
समय रहते संभल जाए जनाब।
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र
# दोहरे चेहरे
ससुराल में हक – सुभद्रा प्रसाद
” ये क्या माँ, तुम खाना बना रही हो | भाभी कहाँ है? ” कंचन माँ से बोली |
” उसकी तबियत ठीक नहीं है | वह सो रही है | ” माँ ने कहा |
” माँ, तुमने तो भाभी को सिर पर चढा रखा है | मेरे आने की सुना तो बिमारी का बहाना करके सो गई और तुमसे खाना बनवा रही है |”
” अरे नहीं बेटा, उसकी तबियत सचमुच खराब है | मैंने ही उसे आराम करने भेजा है | जब वह ससुराल में अपने सारे कर्तव्यों का पालन भलीभाँति करती है, हमारा पूरा ध्यान रखती है तो फिर उसे भी ससुराल में हक है बिमार पडने पर आराम करने का | क्या तुम अपने ससुराल में ऐसा नहीं चाहती? “
” तुम ठीक कह रही हो माँ | ” कंचन बोली | यह सुनकर अंदर कमरे में आराम कर रही बहू के दिल में सास का सम्मान और बढ गया |
# ससुराल में हक
स्वलिखित और अप्रकाशित
सुभद्रा प्रसाद
पलामू, झारखंड |
ससुराल में हक – गीतू महाजन,
रविवार सुबह जब रधिया काम करने के लिए आई तो मालती जी ने उसे चाय बनाकर दी।उनके बेटे की कुछ दिन पहले ही शादी हुई थी और उनकी बहू भी नौकरी करती थी।
“बीबी जी,बहू की तो आज छुट्टी होगी “,रधिया ने पूछा।
“हां..वह सो रही है”।
“अभी तक सो रही है..आपने उसे उठाया नहीं..बहू से डरते हो क्या,”? रधिया बोली।
“बात डरने की नहीं..बात हक की है..अगर पूरे हफ्ते की नौकरी के बाद बेटा देर तक सो सकता है तो ससुराल में बहू को भी अपनी नींद पूरी करने का हक है”,रधिया उनकी सोच के आगे नतमस्तक हो गई।
#स्वरचित
#अप्रकाशित
गीतू महाजन,
नई दिल्ली।