चयन – लतिका श्रीवास्तव
पापा मेरे दोस्त कह रहे हैं यह साक्षात्कार सिर्फ लेन देन के लिए है मेरे चयन में सबसे बड़ी अड़चन धन की है सभी दोस्तों ने रूपये इकट्ठे कर लिए हैं इस बार भी मेरा चयन नहीं हो सकता सारी मेहनत बेकार गई मेरी।
धवल बेटा सबसे बड़ी अड़चन यही है कि तू इन बेकार की बातों पर समय बर्बाद कर रहा है तू सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दे जो साक्षात्कार अच्छा देगा कमेटी उसी का चयन करेगी।
पापा आपके पास रुपए है ही नहीं तो इसके सिवाय आप कहेंगे भी क्या??आक्रोशित हो धवल फिर से स्टडी में चला गया।
जब परिणाम आया …रुपए देने वाले दोस्तों को डिबार कर दिया गया सिर्फ धवल का ही चयन हुआ था।
लतिका श्रीवास्तव
अड़चन – मंजू ओमर
सुनो ये तुम्हारी भाभी मेरे हर काम में अड़चन क्यों लगाए रहती है ,मैं तो परेशान हो गई हूं सुधा ने अपने पति प्रशान्त से कहा। उनकी आदत है किसी और के सामने अपने को सुपर दिखाने का ,कि उनके जैसा कोई होशियार है ही नहीं प्रशांत ने कहा। हां अब उस दिन किट्टी पार्टी में कहने लगी सुधा तुम पावभाजी अच्छा नहीं बनाती है मैं आकर बनवा दूंगी तुम मत बनाना।
अब किटी पार्टी में सब मुझसे कह रहे थे ये तुम्हारे हाथ की पांव भाजी तो है नहीं सुधा भाभी आप तो काफी अच्छा पावभाजी बनाती है ये मीठा मीठा लग रहा है असल में भाभी जी हर खाने की चीज में शक्कर डालती है तो पांव भाजी में भी डाल दिया , इसलिए सब पूछ रहे थे ।तो तुम उनको पहले से बुलाती क्यों हो तुम्हारे किटी की वो मेम्बर तो है नहीं प्रशांत बोला ।बाद में बुलाया करो खाने के समय बस । हां ये ठीक रहेगा सुधा बोली।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
9 नवंबर
अड़चन – रंजीता पाण्डेय
रोहन का एक बस दुर्घटना में पैर टूट गया | डॉक्टर ने बोला आपको ठीक होने में ६ महीने कम से कम लगेगा | रोहन बहुत ही परेशान हो गया | बात बात पे गुस्सा होता | एक दिन तो हद ही हो गई , उसने डॉक्टर साहब से बोला आप हमको ज़हर दे दीजिए, इस जिन्दगी से तो अच्छा है मैं मर ही जाता | डॉक्टर साहब हंसे ओर चल दिए | वहां एक महिला सफाईकर्मी ने बोला बेटा, आप क्या बोल रहे हो ? चुप हो जाओ | इतनी छोटी सी अड़चन आई नहीं की परेशान हो गए ?
पता है जिस बस दुर्घटना में आपका पैर टूटा है ,उसी बस दुर्घटना में डॉक्टर साहब का बेटा मर गया है |जिन्दगी की कीमत समझो बेटा |
जिन्दगी है तो अड़चनें आती रहेगी |धैर्य रखो सब ठीक हो जाएगा |
रंजीता पाण्डेय
डिमांड – संगीता त्रिपाठी
“एक बात बताओ ,आपका बेटा मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता ,देखने में भी स्मार्ट है , आप कहती हो आपकी कोई डिमांड भी नहीं ,फिर शादी में अड़चन क्यों आ रही …”नीरा आश्चर्य से बोली ।
“न…बहन हमारी कोई डिमांड नहीं है बस लड़की थोड़ी लंबी,थोड़ी गोरी , कॉन्वेंट की पढ़ी और ठीक – ठाक घराने की हो …अब वो क्या है अगर शादी में गाड़ी नहीं मिली तो लोग उनका ही स्टेटस कम समझेंगे. ….,अब लड़की वालों की इज्जत का भी ध्यान तो हमीं लोग रखेंगे . ।”बड़े भोलेपन से अलका ने जवाब दिया ।
—- संगीता त्रिपाठी
#अड़चन
अड़चन – नीलम शर्मा
सांवला रंग होने के कारण नेहा की शादी में बहुत अड़चन आ रही थी। बार-बार लड़के वालो के आगे अपने दिखावे और फिर उनके इंकार से नेहा हीन भावना से ग्रसित होने लगी थी। लेकिन इस समाज में हर तरह की मानसिकता के लोग होते है। कुछ ऐसा ही हुआ नेहा के साथ जब उसके सहकर्मी रवि ने उसकी सूरत से ज्यादा सीरत को महत्व दिया। नेहा के गुणों ने रवि के दिल में जगह बना ली और वह नेहा के सामने शादी का प्रस्ताव रखने से खुदको नहीं रोक पाया।
नीलम शर्मा
अड़चन – खुशी
रीता जब भी खिड़की के बाहर देखती उसे सामने का कुछ नजर ना आता सासू मां ने मोटी मोटी चिक के पर्दे लगा रखे थे जिससे उसे अडचन होती वो हमेशा सोचती काश में ये पर्दे हटा पाती और एक दिन उसे मौका मिल गया।सासू जी गई दिल्ली और उसने पीछे से पर्दे हटा दिए।अब खिड़की से सुंदर बगीचा नजर आता।सुंदर फूल तितली पौधे उसका मन बड़ा खुश हुआ।सासू मां आई उसे लगा नाराज़ होगी।पर सामने का नजारा देख सासू माँ भी खुश हुई।और रीता की दोनो अड़चनें दूर हो गई और सास बहु नज़ारे का आनंद लेती।
खुशी
गृह नक्षत्र। – कामनी गुप्ता
पंडित जी के पास अपनी जन्मकुंडली सरकाते हुए प्रिया बोली… पंडित जी हर काम में अड़चन आती है। घर में बरकत नहीं है। लगता है सब गृह नक्षत्र खराब चल रहें हैं। कोई अच्छा सा उपाय बताइए!
पंडित जी मुस्कुराते हुए बोले.. बहनजी , आपका बृहस्पति खराब चल रहा है। अगर ये ठीक तो बाकी सब गृह नक्षत्र कुछ खास असर नहीं करते। उपाय पंडित जी?? मैं तो बृहस्पति के उपाय भी करती हूँ। पीले रंग का उपयोग करती हूँ और कोई उपाय है बताइए..घर जाकर ही करूंगी। पंडित जी बोले ..बहनजी ! बस अपने गुरु, माता, पिता और बड़ों का सम्मान करिए और उनसे आशीर्वाद लिया कीजिये। सब गृह नक्षत्र ठीक हो जाएंगे। प्रिया को अपने द्वारा बात – बात पर किया गया बड़ों का अपमान याद गया।
कामनी गुप्ता***
जम्मू!
अड़चन – संध्या त्रिपाठी
अरे पहले ही काफी देर हो चुकी है ऊपर से ये ट्रैफिक… तपन, अब घर जाकर कपड़े बदलने का बिल्कुल समय नहीं है हमें सीधे कार्यक्रम स्थल में पहुंचना चाहिए ! पर ऑफिस के ड्रेस कोड पैंट शर्ट में तुम अपनी हिंदी में स्पीच दोगी , सब हसेंगे तान्या ..हंसने दो हंसने वालों के साथ तुम भी अच्छी तरह समझ लो.. समय की प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण है , साड़ी पहनकर भी अच्छी इंग्लिश बोली जा सकती है और पैंट शर्ट में भी उत्कृष्ट हिंदी का प्रदर्शन हो सकता है ।
” मेरे परिधान मेरे विचारों की अभिव्यक्ति में कोई “अड़चन ” नहीं आने देंगे, आप निश्चित रहें…!
(स्वरचित)
संध्या त्रिपाठी
अंबिकापुर, छत्तीसगढ़
अड़चन – चंचल
आज मन कुछ उदास था । ऐसा नहीं है कि प्रणय के साथ मैं खुश नहीं लेकिन जब भी कभी उन बीती बातों को याद करती हूँ तो कहीं न कहीं कुछ बहुत अहम हिस्सा मेरे जीवन का छूटता सा प्रतीत होता है । बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक रहा लेकिन कभी कभी परिस्थितियां अपनी सोच और इच्छा के विपरीत हो जाती हैं । बहुत कोशिश की शादी के बाद अपनी पढ़ाई पूरी कर सकूँ लेकिन पारिवारिक और आर्थिक रूप से इतनी ‘अड़चने ‘ जीवन में आई की अपनी इच्छाओं को दरकिनार करना पड़ा और अब जब परिस्थितियाँ अनुकूल हुई तो शरीर साथ न देकर एक नई अड़चन पैदा कर रहा है ।
चंचल
स्व रचित
*गुहार* – बालेश्वर गुप्ता
रमेश तुम चिंता मत करो ,कोई बात नही तुम्हारी ग्रेजुएट डिग्री खो गयी है, मैं डुप्लीकेट निकलवाने की कोशिश करता हूँ।
भाई-अनीश तुम्हारे से ही उम्मीद है।
रमेश अनीश सहपाठी रहे थे,अब अनीश यूनिवर्सिटी में क्लर्क है।रमेश अपनी डिग्री खोने पर दूसरी बनवाने की गुहार उसी से कर रहा था।अनीश अंदर जाकर सम्बंधित अधिकारी से बात करने गया।रमेश ने बाहर दरवाजे से सुना अनीश कह रहा था,सर अच्छी आसामी है पांच हजार दे देगा,मैं उसे कन्विंस कर लूंगा।
अपना सर पकड़ रमेश वहां से हटकर सीधे वाईस चांसलर के ऑफिस में जाकर उन्हें अपनी समस्या बता दी।वाईस चांसलर महोदय ने रमेश की परेशानी समझ उससे एक प्रार्थना पत्र लिया और उस पर डुप्लीकेट डिग्री जारी करने के आदेश कर दिये।
बालेश्वर गुप्ता, नोयडा
मौलिक एवम अप्रकाशित