माया ने जब से विनोद जी के घर में सफाई-बर्तन शुरू किया तब से बैचेन रहने लगी। उसकी बैचेनी का कारण था उनका दो साल का बेटा कृष्णा।
माया जब भी कृष्णा को देखती उसके प्रति एक लगाव सा महसूस करती। उसका मन उसको गोद में लेने के लिए मचल उठता। लेकिन विनोद जी की पत्नी निशा अपने बेटे को किसी को नहीं लेने देती।उनका कहना था “कृष्णा बड़ी मन्नतों के बाद हुआ है जब तक उसकी मान नहीं उतर जाती वो उसको कहीं बाहर भी नहीं ले जाएगी और किसी की गोद में भी नहीं देगी।”
इसलिए माया उसको दूर से ही देख कर खुश हो लेती। कभी-कभी माया सोचती कि अगर उसका भी बेटा जिंदा होता तो कृष्णा जितना ही बड़ा होता।माया ने भी दो साल पहले एक बेटे को जन्म दिया था। लेकिन डॉक्टर ने कहा
“सॉरी हम आपके बच्चे को बचा नहीं पाए आपका बेबी सांस नहीं ले पा रहा था। हमने काफी कोशिश की लेकिन वो सांस नहीं ले पाया और होने के कुछ मिनट बाद ही उसकी डेथ हो गई।”
ये सुनकर माया बुरी तरह से टूट गई । ना जाने बच्चे को लेकर कितने सपने उसने और उसके पति प्रताप ने देख रखे थे जो एक मिनट में ताश के पत्तों के महल जैसे धराशाई हो गए। जैसे-तैसे माया अपनी नॉर्मल जिंदगी में लौट पाई और अभी पिछले साल से ही उसने फिर से काम करना शुरू किया था।
निशा के घर का काम तो 15 दिन पहले से शुरू किया था। जहां कृष्णा को देखकर उसके जख्म फिर से हरे हो गए। ऐसा नहीं था कि दूसरे घरों में छोटे बच्चे नहीं हों पर कृष्णा को देखकर जो बैचेनी होती थी वो और बच्चों को देख कर नहीं होती।
माया रोज़ इन्ही विचारों में खोई रहती थी कि एक दिन बड़ा हादसा हो गया। कृष्णा खेलते-खेलते सिर के बल गिर गया और उसके सिर में बहुत गहरी चोट लग गई जिस कारण काफी खून निकल गया।
जल्दी से उसको अस्पताल ले जाया गया जहां पर डॉक्टर्स ने ब्लड का इंतजाम करने को कहा।
कृष्णा का ब्लड ग्रुप o- था और उस समय o- ग्रुप ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं था। डॉक्टर ने कृष्णा के पैरेंट्स को ब्लड देने के लिए कहा लेकिन दोनों में से किसी का भी ब्लड ग्रुप o- नहीं था।
“ये कैसे संभव है ! आप दोनों में से किसी एक का तो ग्रुप मैच करना चाहिए। क्या आपने बच्चे को एडॉप्ट किया है ? “डॉक्टर ने आश्चर्य से पूछा।
“नहीं ये तो मेरा ही बेटा है।”निशा ने कहा।
“डॉक्टर प्लीज़! अभी तो आप कृष्णा को जिंदगी बचाइए।”मिस्टर विनोद ने प्रार्थना की।
विनोद दंपती के साथ आई माया भी ये सब सुन रही थी। अचानक उसको याद आया कि प्रेग्नेंसी के समय उसका भी ब्लड ग्रुप टेस्ट करवाया गया था को o- था।
माया दौड़ कर डॉक्टर के पास गई और बोली
“मेरा ब्लड ग्रुप o- है आप मेरा ब्लड ले लीजिए।”
माया के ब्लड का टेस्ट हुआ और कृष्णा को माया का ब्लड चढ़ा दिया गया। कुछ दिनों में कृष्णा ठीक हो गया।
माया के ब्लड देने से निशा उसका काफी अहसान मानती थी और अब उससे बातें भी करने लगी थी। एक दिन बातों ही बातों में माया ने निशा से पूछा
“मैडम! डॉक्टर कह रहे थे की माता-पिता के ब्लड ग्रुप में से किसी एक का ब्लड ग्रुप बच्चे में आता है लेकिन अपने कृष्णा बाबा का ब्लड ग्रुप अलग है ये कैसे संभव है ? “
निशा ने माया की बात टाल दी। लेकिन माया को ये बात उसी दिन से खटक रही थी। इसलिए उसने इस बारे में और जानकारी जुटाने के लिहाज से अपनी डॉक्टर से बात की जिनको वो प्रेग्नेंसी टाइम में दिखाती थी पर पैसे की कमी के कारण डिलीवरी सरकारी अस्पताल में करवाई और उस समय ये डॉक्टर छुट्टी पर थीं।
माया ने जब सारी बात डॉक्टर मैडम को बताई तो उन्होंने कहा
“माया जब तक मैंने तुमको एक्जामिन किया तुम्हारा बच्चा एकदम स्वस्थ था लेकिन ये भी संभव है कि डिलीवरी के समय कुछ कॉम्प्लिकेशन हो जाएं और बच्चा बच ना पाए।”
माया ने अपने मन में चल रही उधेड़ बुन को मैडम से शेयर करना उचित समझा और बोली
“मैडम जी ! मेरा मन कहता है कि उस वक्त मेरा बेटा ठीक था और उसको बदल दिया गया। ये बात कृष्णा वाली घटना से और ज्यादा महसूस होने लगी है। जब तो मैंने अपने को संभाल लिया था लेकिन अब बहुत मुश्किल हो रहा है। क्या कोई तरीका नहीं है ये पता करने का कि कृष्णा किसका बेटा है ?”माया ने कहा।
“डीएनए टेस्ट से इस बात का पता लगाया जा सकता है। लेकिन वो इसके लिए तैयार हों तब ही कराया जा सकता है।”डॉक्टर ने कहा।
“मैडम! अभी जिन डॉक्टर ने कृष्णा का इलाज किया था अगर वो कहे तो शायद निशा मेमसाहब मान जाएं।”माया ने कहा।
“ठीक है। मैं कोशिश करती हूं।”डॉक्टर ने आश्वासन दिया।
आखिरकार कृष्णा का डीएनए टेस्ट हो गया और इधर माया और उसके पति ने भी डीएनए टेस्ट करवा लिया जो कि कृष्णा के डीएनए से मैच हो गया। ( पैरेंट्स के डीएनए से कुछ हिस्सा मैच करता है पूरा नहीं)।
अब माया ने निशा से कहा
“मेमसाहब ! आप सच बता दें कि कृष्णा आप का बेटा नहीं है आप ने धोखे से इसे अपना बना लिया है।”
“तुम इतनी बड़ी बात कैसे कह सकती हो ? “निशा गुस्से से चिल्लाई।
“अभी तो मैं आप से कह रही हूं लेकिन अगर आपने सच्चाई नहीं मानी तो मैं पुलिस के पास जाऊंगी क्योंकि कृष्णा आपका नहीं मेरा बेटा है।”माया ने कड़ाई से कहा।
निशा के चेहरे का रंग एकदम सफेद पड़ गया और उससे कुछ कहते ना बना।
माया ने आगे कहना जारी रखा
“जब से मैं आपके घर काम करने आई थी तब से मेरा मन कृष्णा की तरफ खिंचा-खिंचा रहता था ।लेकिन जब कृष्णा गिरा और मेरा ब्लड ग्रुप उसके ब्लड ग्रुप से मैच कर गया तो मेरा माथा ठनका कि कुछ तो दाल में काला है । इसलिए मैंने और जानकारी जुटाई और कृष्णा का डीएनए टेस्ट करवाया। जिसमें सच्चाई सामने आ गई क्योंकि कृष्णा का डीएनए टेस्ट मेरे और मेरे पति से मैच कर गया है। अब आप या तो खुद ही कृष्णा को मुझे सौंप दें नहीं तो मुझे कानूनी सहारा लेना पड़ेगा।”
निशा के पास अब कोई चारा नहीं था क्योंकि वह जानती थी कि उसने एक मरे हुए बच्चे को जन्म दिया था और उसके बच्चे से किसी दूसरे का बच्चा बदल दिया है गया था। जिसका बच्चा बदला गया था उससे इस तरह से सामना होगा उसने सपने में भी नहीं सोचा था।
निशा ने कृष्णा को माया की गोद में दे दिया। माया मंत्रमुग्ध होकर कृष्णा को देखती रही और धीमे-धीमे गुनगुनाने लगी
तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई यूं ही नहीं दिल लुभाता कोई…..
#दिल_का_रिश्ता
अनिता गुप्ता