आज बहुत गर्मी हो रही है मेरा तो आमरस पीने का मन कर रहा है, अपने पसीने पूछते हुए रज्जो बोली।
तभी वहां खड़ी उनकी गाय जैसे बहु नेहा बोली “माजी मैं आपके लिए अभी आमरस बना देती हू” रज्जो ताने मारते हुए बोली “तुझे किसी ने कहा कुछ और ये क्या दूसरों की बातें सुनने की आदत है तुम्हारी? अब जा जाकर मेरे लिए आमरस बना, मुझे बहुत जोर की प्यास लग रही है।” नेहा ने उस समय कुछ नहीं बोला बस वहां से चली गई
क्योंकि वो अपने से बढ़ो का आदर करना जानती थी और वो ये नहीं चाहती थी कि उसकी सास को बुरा लगे। फिर रज्जो उस से पूछती है कि तूने कहा तक पढ़ाई की है? नेहा बोली ” माजी मैने एम. बी.ए की पढ़ाई की है। रज्जो बोली “है राम!
इतनी पढ़ी लिखी बहु आ गई है हमारे घर आ गई है, पक्का एक दिन यह मुझे घर से बाहर निकालेगी। नेहा बोली “अरे आप ये कैसे बात कर रही है माजी, मैं भला ऐसा क्यों करूंगी, आप मुझसे बड़ी है, मेरी मां समान है।
रज्जो ताने देते हुए बोली “रहने दे बहु मैं सब जानती हू, आज कल यह सब एक दिखावा है, असलियत में तो तू मुझसे मेरा बेटा चीन कर अपने वश में करना चाहती है,
पर याद रखना अपने जीते जी मैं ऐसा बिल्कुल नहीं होने दूंगी। ये सब बोल कर वो वहां से अपने कमरे में चली गई। नेहा की आँखें भर आई और उन धुंधली आंखों से उसने कमरे के दरवाजे के पास रोहित अपने पति को देखा और जब तक उसकी आंख साफ से देख पाती वो दफ्तर के लिए निकल गया था।
शाम को जब रोहित आया तो नेहा ने उससे अपने मन में चल रहे सारे सवालों के जवाब मांगे पर उसके पास कोई जवाब नहीं था। नेहा आखिर में बस इतना ही कह पाई कि “अगर आप भी ऐसा करेंगे तो कैसा चलेगा, आप कुछ तो बोलिए। आप माजी को सच क्यों नहीं बता ते कि मैं ऐसे नहीं हू,
जैसा वो सोच रही है। रोहित तब भी मैं रहा बस हल्का सा चिड़चिड़ा सा मुंह बनाकर वहा से चला गया। नेहा मन ही मन सोच रही थी मेरे यहां कोई भी अपना नहीं है, मैं यहां किसके लिए रह रही हू, जहां पर मेरे खुद के पति भी मेरा साथ नहीं दे रहे है। ऐसा कुछ दिन चलता रहा पर फिर भी अपनी घर की इज्जत बचाने के लिए कुछ नहीं बोली और अपनी सास रज्जो के सारे ताने सहती रही कि अचानक से एक दिन रज्जो कुछ भला बुरा कह रही थी
नेहा को कि उतनी देर में रामलाल उसके ससुर जी अपनी कुर्सी से अखबार को बगल में रखते हुए बोले “रज्जो अब बस भी करदो, बेचारी नेहा तुम्हारे लिए इतना करती है और एक तरफ तुम हो कि उसकी कदर नहीं कर रही हो” नेहा कुछ बोले इतनी देर में रज्जो बोली “अब तू मेरी शिकायत करेगी मेरे पति से?”
नेहा उदास होते हुए बोली “मैने कोई शिकायत नहीं की” इससे आगे वो कुछ बोले रामलाल तोड़ा भिन्ना कर बोला “बस रज्जो बस, अगर तुम पहली बार सास बनी हो तो नेहा बेटी भी पहली बार ही बहु बनी है, ये उसका घर नहीं है जिसमें वो पहले रहती थी, तोड़े तौर तरीके सीखने में समय लगता है पर फिर भी वो पूरी कोशिश कर रही है
कि किसी को शिकायत का मौका ना लेकिन तुम तो इसके पीछे ही पढ़ गई हो, हर छोटी बात पर कुछ न कुछ बोलती रहती हो, रज्जो बोली “आप मुझे क्यों बोल रहे है, आपको इसकी गलतियां पता नहीं है
फिर गहरी और लंबी सांस लेकर रामलाल बोले “अरे तुम तो हर चीज में बस नाम की गलतियां निकल रही हो, और सबसे ज्यादा जिसके साथ की जरूरत थी वो भी कभी कुछ नहीं बोलता बस सर तमाशा देखता रहता है। आज दोनों कान खोल कर सुन लो, नेहा इस कर की बहु नहीं बेटी है और रोहित तुम्हारी धर्म पत्नी है,
जो फेरे लेते वक्त कसमें खाई थी उसको निभाना भी सीख और मैने अब दुबारा ऐसा दुर्व्यवहार मेरी बेटी के साथ करते देखा समझ लेना मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने जैसा है। नेहा,*स्वाभिमान मेरा भी है* और इस परिवार का और जिसको ये मंजूर नहीं वो अभी के अभी घर से निकल सकता है।”
रज्जो और रोहित, रामलाल का गुस्सा देख कर शांत हो गई और वहा बस सर झुका कर खड़ी रही और माफी मांगी।
लेखिका
तोषिका