सुरभि एक सांवली लड़की थी. लेकिन वह सांवली होने के बाद भी बहुत होनहार और काबिल थी. वह हर क्षेत्र मैं खुद को औरों से बेहतर साबित करती थी. लेकिन फिर भी उसके परिवार में उसके पिता एक सांवली लड़की होने की वजह से उसे आते जाते ताना मारते थे. लेकिन सुरभि उसके पिता की बात का कभी बुरा नहीं मानती, क्योंकि बचपन से ही वह हर किसी से अपने सावले रंग के बारे में सुनते आई थी. और अब तो उसे इसकी आदत भी हो चुकी थी.
क्यों की सबको तो तो गोरी ऊंची और लंबी लड़कियां ही पसंद आती. ऐसे में जब सुरभि की शादी की उम्र हो जाती है तो उसके लिए उसके माता-पिता को लड़का ढूंढने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है. क्योंकि कोई भी लड़का सुरभि का सावला रंग देखकर शादी के लिए मना कर देता था.
ऐसे में एक दिन सुरभि से मिलने एक लड़का आता है जिसका नाम कमल होता है. कमल सुरभि को देखकर कहता है,
“अरे तुम तो रंग में सांवली हो…”
और सुरभि कहती है,
“हां मैं रंग में सवाली हूं…”
फिर से कमल पूछता है,
“अच्छा तो क्या तुम्हें खाना बनाना और घर का सारा काम आता है?”
तो सुरभि कहती है,
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“नहीं मैं जब स्कूल में पढ़ाई करती थी तब तो मां हमें काम करने नहीं देती थी, फिर स्कूल के बाद जब कॉलेज में आए तो पढ़ाई का बोझ बढ़ गया ऐसे में मैं घर का काम और खाना बनाना नहीं सीख पाई और जैसे ही कॉलेज खत्म हुआ तो मेरी नौकरी लग गई और अब मैं अच्छा कमा रही हूं इसलिए मुझे खाना बनाने और सीखने की जरूरत ही नही पड़ी…. और अगर कल को शादी करके ससुराल जाती भी हूं तो मेरे साथ साथ मेरे पति को भी काम करना पड़ेगा क्योंकि अगर वो नौकरी करता है तो मैं भी नौकरी करती हूं… तो दोनों को एक समान ही भूख लगती है तो सिर्फ खाना मैं ही क्यों बनाऊंगी!!”
सुरभि की यह बात सुनकर कमल उससे बहुत ही प्रभावित होता है. क्योंकि कमल आज तक जितनी भी लड़कियों से मिला था वह उनसे बेहद अलग थी. ऐसे ही कमल सुरभि से शादी करने के लिए हां कर देता है और कुछ दो महीने बाद ही उनकी शादी हो जाती है.
लेकिन अब जब सुरभि और कमल शादी करके अपने घर आते है तो आस पड़ोस वाले सुरभि की मुंह दिखाई के बाद बातें बनाने लगते है,
“अरे सुजाता बहन को तो देखो अपने बेटे के लिए कैसी काली बहु ले आई…”
“अरे वह काली नहीं है बहन सावली है…” सुजाता अपनी पड़ोसन को चुप कराते हुए बोली.
अरे काली हो या सावली मैं तो अपने बेटे के लिए गोरी चिट्टी लंबी बहु ही लाऊंगी… जिसे देखकर हमारे आस पड़ोस में उसकी चर्चा हो…”
ऐसे ही अब सुरभि की सास को भी लगने लगता है कि उसने अपने इकलौते बेटे कमल की शादी एक सांवली लड़की से कर गलती कर दी. और उस दिन वो भी सुरभि को ताना देने लगती है,
“अरे पता नहीं कौन से मुहूर्त में मेरे बेटे ने इस सांवली लड़की को पसंद कर लिया आस-पड़ोस के लोग इतनी बातें बना रहे है कि मेरी बहू सांवली है… मुझे तो गोरी चिट्टी बहु ही लानी थी, लेकिन मेरे बेटे ने इस सांवली लड़की सुरभि को पसंद कर लिया फिर हम क्या ही करते!!”
“अरे सुजाता क्यों इतना चीड़ रही हो देखो हमारी बहू सांवली जरूर है लेकिन वह बहुत काबिल है देखा नहीं तुमने अपने पत्रकारिता में उसने कितनी सिद्धियां हासिल की है?” सुरभि के ससुर अपनी पत्नी से कहते है.
“हां हां आपको तो अच्छा ही लगेगा आपके बेटे ने जो पसंद की है…”
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“तुमसे तो बात ही करना बेकार है…” ऐसा सुरभि के ससुर अपनी पत्नी से कहकर वहां से चले जाते है.
लेकिन अब सुरभि की सास उसको को घर में रहने तो देती थी लेकिन वह उसको दिल से अपना नहीं पाई थी. ऐसे में एक दिन सुरभि बहुत खुश होकर घर आती है… और उसकी खुशी देखकर सास सुजाता कहती है,
“देखो तो इस सांवली को, फुदक तो ऐसे रही है जैसे कोई तोप मार कर आई हो…”
सुरभि की सास सुजाता बोल तो धीरे से ही रही थी लेकिन कुछ शब्द सुरभि के कानों में पड़ जाते है और सुरभि अपने सास को जवाब देती है,
“जी माजी तोप तो नहीं मार कर आई हूं लेकिन कल मेरा मुख्यमंत्री जी के साथ मीटिंग होने वाला है आप मुझे टीवी पर देखेंगे…” और यह सुन सुरभि का पति कमल बहुत खुश होता है उसे बधाइयां देता है. और अब वहां बुआजी भी भागी हुई आती है… और सभी के सामने कहती है, “अच्छा बहू बधाई हो तुम्हें लेकिन अपने चेहरे पर थोड़ा सा मेकअप पोत कर जाना ताकि तुम्हारा सांवला रंग गोरा हो जाए…”
दरअसल ऐसा कहकर वह सुरभि की खिल्ली उड़ाती है लेकिन सुरभि को कोई फर्क नहीं पड़ता. वह बुआजी को कहती है,
“बुआ जी जरूर क्यों नहीं!!”
और फिर दूसरे ही दिन सुरभि का इंटरव्यू मुख्यमंत्रीजी के साथ होते टीवी पर सुरभि के मायके वाले और ससुराल वाले साथ ही उनके आस पड़ोस वाले भी देख रहे थे. फिर जब सुरभि इंटरव्यू खतम करके घर लौटी तो आस पड़ोस वाले सभी सुरभि और परिवार को बधाइयां देने उसके घर पहुंच रहे थे. सभी सुरभि की बहुत तारीफ कर रहे थे. अब सुरभि के सांवले रंग के बारे में नहीं लेकिन सब उसके टीवी में हुए मुख्यमंत्रीजी और उसके इंटरव्यू के बारे में बात करते है.
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लेकिन सुरभि की सास सुजाता तो अभी भी सुरभि नहीं अपनाती. ऐसे में सुजाता एक दिन बहुत बीमार पड़ती है और अपने बेटे से कहती है,
“देखो बेटा मुझसे तो यह सांवली बहू बर्दाश्त नहीं होती… इसलिए तुम अपने लिए कोई गोरी बहू ले आओ तो मैं इस बिस्तर से उठ जाऊं… क्योंकि मैं नहीं जानती कि मैं कितने दिन तक अब जिंदा रहूंगी!! जाते जाते मुझे एक गोरी बहू का मुखड़ा दिखा दे!!”
सुरभि कमरे के बाहर से अपने सास और अपने पति के बीच हुई बातों को सुनती है और वह अपने पति से कहती है,
“देखिए अगर आप मुझे अपनी मां के लिए छोड़ना चाहते है तो मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं मैं इतनी काबिल हूं कि आप से अलग होने के बाद भी अपना गुजारा कर अकेली कर सकती हूं… आपको मेरी चिंता करने की जरूरत नहीं है, आप अपनी मां की चिंता करिए!!”
“लेकिन फिर भी यह मुझसे नहीं होगा यह कैसे संभव है! मैं अपनी मां के लिए तुम्हें नहीं छोड़ सकता!”
और फिर दिन गुजरते सुजाता ठीक भी हो जाती है. लेकिन इस दिन को ज्यादा दिन नहीं होता फिर से सुजाता इतनी बीमार पड़ जाती है कि उसे एक बड़े अस्पताल ले जाना पड़ता है. और बड़े अस्पताल ले जाने के लिए एक बड़े सिफारिश की जरूरत थी क्योंकि उस अस्पताल में भर्ती होने आम इंसान के लिए बहुत ही मुश्किल होता था. ऐसे में सुजाता को बड़े अस्पताल में भर्ती करना नामुमकिन था. लेकिन सुरभि ने अपने मुख्यमंत्री के पिए को फोन किया और उनसे सिफारिश लेकर अपनी सास को बड़े से अस्पताल में भर्ती कर दिया. फिर कुछ ही दिनों में सुजाता ठीक हो कर घर वापस आई तो उसने देखा कि कमल ने एक गोरी चिट्टी लड़की के साथ शादी कर ली थी.
लेकिन वह देख कर भी अब सुजाता खुश नहीं थी और वह अपनी पहली सांवली बहू सुरभि के बारे में पूछने लगी तो बेटे ने जवाब दिया,
“हां मां वह तो मुझे छोड़ कर चली गई वह मुझे तलाक देकर अलग अकेली रहने चली गई… क्यों की वह इतनी काबिल थी कि वह अपना घर लेकर खुद अकेले अपना जीवन गुजारा कर सकती थी… बस हम ही उसके लायक नहीं थे, वो सिर्फ आपकी बाते सुन कर मुझे तलाक दे कर चली गई.”
और यह सुन सुजाता को बहुत दुख होता है. उसे अपनी एक काबिल बहू को खोने का दुख भी होता है. उसे अपने किए पर पछतावा होता है और अब तो आस पड़ोस वाले भी सुजाता को बुरा भला कहने लगे थे, क्योंकि सुजाता ने अपनी एक बहुत ही काबिल बहू को खो चुकी थी.
लेकिन अब सुजाता की एक गोरी चिट्टी बहू होने के बावजूद भी उसे देखने सुजाता के घर कोई नही आता था और ना ही कोई सुजाता से बाते करता था. लेकिन अब वो करते भी क्या अब सुजाता और कमल का परिवार सुरभि को बस टीवी पर ही देख पाता था. और उसे देखकर हर दिन उन्हें अफसोस होता था कि काश उन्होंने सुरभि को अपनाने में इतनी देर ना कर दी होती.