Short Stories in Hindi : चलो रिया..! हमें डॉक्टर के पास जाना है… ऋषि ने अपनी पत्नी रिया से कहा…
रिया: डॉक्टर के पास..? पर हम तो 2 दिन पहले ही गए थे और मुझे अभी कोई प्रॉब्लम भी नहीं है…
ऋषि: अरे बाबा..! यह नॉर्मल चेकअप नहीं है… हमें बेबी का जेंडर पता करने जाना है…
रिया: बेबी का जेंडर..? पर क्यों..? और यह इल्लीगल भी है… तुम्हें क्या यह नहीं पता..?
ऋषि: सब पता है मुझे..! पर हमारे घर के कुछ नियम है… जैसे घर में किसी की अगर शादी हो, तो पहला बच्चा लड़का ही होना चाहिए…
रिया: मैं तो हैरान हूं ऐसी बातें सुनकर… इतने पढ़े लिखे और वेल सेटल परिवार से होकर… यह कैसी बातें कर रहे हो..? व्हाट रबिश..! पहले लड़का ही होगा… मेरे घर पर देखो, हम तीन बहनों के बाद हमारा भाई है… पर पापा ने कभी हमने कोई भेदभाव नहीं किया..
ऋषि: वह तुम्हारे पापा की मर्जी… पर इस घर में हमेशा से यही होता आया है… और आगे भी यही होगा..
रिया: मतलब, अगर मेरे पेट में बेटी रही, तो तुम उसे..?
ऋषि: देखो रिया… बी प्रेक्टिकल.. हमारे पास काफी समय है… हम फिर से बेबी प्लान कर लेंगे.. वैसे भी लड़के आसानी से नहीं मिलते हैं… लकी होते हैं वह लोग, जिन्हें पहली बार में ही लड़का हो जाता है…
रिया: कितनी घटिया सोच है तुम्हारी.. अगर मुझे यह सब पहले से पता होता तो, कभी भी मैं तुमसे शादी नहीं करती… तुम जैसे लोग इस सोसाइटी में वह बदनुमा दाग हो, जिसे अगर घिसकर साफ भी कर दिया जाए, फिर भी निशान रह जाते हैं..
ऋषि: रिया..! अब तो हमारी शादी हो गई ना… और अब इस दाग के साथ ही तुम्हें रहना है… रिया..! तुम इतना ओवर रिएक्ट क्यों कर रही हो..? अभी तो बेबी ने जन्म भी नहीं लिया, तुम उसके लिए इतनी पजेसिव क्यों हो रही हो..?
रिया: जब लड़कियों से तुम्हें और तुम्हारे परिवार को इतनी ही दिक्कत थी, तो फिर तुम शादी भी एक लड़के से ही करते ना..?
ऋषि: अब बस बहुत हो गया… चलो मेरे साथ… वरना मुझसे कुछ अनहोनी ना हो जाए..
फिर दोनों डॉक्टर के पास जाते हैं.. जहां रिया को जिस बात का डर था, वही होता है… उसके पेट में बेटी थी… पर वह उसे मरने तो नहीं देगी, चाहे ऋषि के साथ उसके रिश्ते को ही क्यों ना मारना पड़े..?
ऋषि डॉक्टर से अगले दिन का अपॉइंटमेंट लेकर घर आ जाता है…
रिया चाह तो रही थी कि, अपने पापा को अभी फोन पर सब कुछ बता दें.. पर इससे वह ऋषि को सबक नहीं सीखा पाएगी, क्योंकि उसके पापा तो उसकी हालत जानकर, अभी आकर उसे यहां से ले जाएंगे…
रिया ने थोड़ी देर कुछ सोचा और किसी को फोन किया… थोड़ी देर बाद, ऋषि और उसकी मां सुनैना जी रिया के कमरे में आते हैं…
सुनैना जी: देखो रिया..! इतना प्रेशर लेने की जरूरत नहीं… मैंने भी ऋषि के पहले तीन तीन बार अबॉर्शन करवाया है… पर उसके बाद फिर नंदिता हुई ना..? हम बेटी के खिलाफ नहीं है.. बस उसे बेटे के पहले आने नहीं देते… यह हमारा रिवाज है, जो बरसों से चला आ रहा है.. एक बार बेटा हो जाए, फिर बेटी भी पैदा कर लेना..
रिया: एक औरत होकर आपकी ऐसी सोच पर धिक्कार है मम्मी जी..! कौन कब आएगा..? यह भगवान तय करते हैं, ना कि हम और आप… और मैं कोई बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं हूं, जो अभी नहीं तो फिर कभी पैदा कर लूंगी..
सुनैना जी: देखो रिया.. मेरा काम था तुम्हें समझाना… हमने तुम्हारी सहमति नहीं मांगी… ऋषि..! इसकी सारी पैकिंग तू ही कर ले और हां उसके सारे रिपोर्ट्स भी रख लेना…
यह कहकर सुनैना जी वहां से चली जाती है… ऋषि अलमारी खोलकर रिया के रिपोर्ट्स निकालने लगता है… उसी बीच उसे एक रिपोर्ट अपनी मिलती है… जिस पर साफ लिखा होता है कि, ऋषि अब कभी पिता नहीं बन सकता..
उस रिपोर्ट को लेकर वह रिया के पास आकर कहता है.. यह क्या है रिया..?
रिया: मैं यह तुम्हे कभी नहीं बताती, जो तुमने आज यह हरकत ना की होती… याद है तुम्हारा वह एक्सीडेंट, जिसमें तुम लगभग मरते-मरते बचे थे… उसी में तुम्हारी यह शक्ति चली गई थी.. यह बच्चा भगवान का दिया हुआ वह तोहफा है, जो अब तुम दोबारा कभी नहीं पा सकोगे… अब कहो, कल चलना है ना.?
ऋषि यह सुनकर तो आसमान से गिर पड़ा… अब तक जिस बच्ची को वह बोझ कह रहा था.. वह उसकी आखिरी निशानी बन गई..
अगली सुबह सुनैना जी: ऋषि..! रिया अभी तक तैयार नहीं हुई..? चलना नहीं है क्या..?
ऋषि: नहीं मां..! मुझे मेरी बेटी चाहिए… फिर चाहे इस घर का पुराना रिवाज ही क्यों ना टूट जाए..?
सुनैना जी: आखिर रिया ने तेरा ब्रेनवाश कर ही दिया.. पर मैं अभी जिंदा हूं, मैं ऐसा होने नहीं दूंगी…
तब तक रिया अपने कमरे से निकल कर कहती है… पर जब मैं ही यहां नहीं रहूंगी तो आप यह सब किसके साथ करेंगी मम्मी जी..?
ऋषि: रिया तुम कहां जा रही हो..? मैं भी चलूंगा तुम्हारे साथ… मुझे मेरी बेटी से अलग मत करो…
रिया: बहुत देर हो गई ऋषि..! पहले अपनी बेटी के लिए, अपने खानदान के रिवाज को पत्थर की लकीर मानकर उसे मारने चले थे.. पर अब जब अपने पिता ना बन पाने का पता चला, उसी रिवाज को एक पल में तोड़ दिया… वाह..! तुम्हारे इस दोगले चेहरे को देख कर तो मुझे तुमसे बात करने में भी घिन आ रही है…
और मम्मी जी..! अगर आपने यह सब पहले ही रोक दिया होता, तो शायद आज “औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन है” यह कहावत गलत सिद्ध हो जाती… ऋषि..! तुम बिल्कुल ठीक हो.. यह तो मैंने तुम्हारा दोगला चेहरा देखने के लिए झूठा रिपोर्ट दिखाया था… अब तुम आजाद हो…
जाओ करो और कई शादियां और कराते रहो गर्भपात… पर याद रखना, जिससे शादी करोगे वह भी किसी की बेटी होगी… और जो तुम्हारे बेटे को जन्म देगी, वह भी किसी की बेटी होगी… पर तुम्हारी बेटी..?
वह तो जन्म से पहले ही मार दी जाएगी…. हम इंसानों की भी बड़ी अजीब फितरत होती है… जब हमें पता होता है, यह चीज हमें फिर मिल जाएगी… उसकी कदर नहीं करते… पर जब वही चीज़ हमारे पास आखिरी हो, तो उसे अपनी जान से भी ज्यादा संभालते हैं…
यह कहकर रिया वहां से चली गई… पर वह ऋषि को ऐसे ही छोड़ने नहीं वाली थी… उसने ऋषि को कभी डिवोर्स ना देने का फैसला किया, ताकि वह और कोई शादी ना कर सके और ना ही किसी बच्चे की जान ले सके…
पर इससे ऋषि और सुनैना जी जैसे लोग क्या कभी सुधरेंगे..? यह बता पाना ज़रा मुश्किल है… पर इतना तो तय है, यह सब कुछ बदलने के लिए हम औरतों को ही सबसे पहले बदलना होगा… तभी जाकर समाज से यह दाग मिट पाएगा… वरना हमें दबाने वाले हाथों की कमी नहीं है..
#दाग
धन्यवाद
स्वरचित/मौलिक/अप्रकाशित
रोनिता कुंडू
vd