शादी के बाद रोमांस

रोहन के लिए मीरा  का उस घर में होना एक अजीब सा मीठा अहसास था। वह रोज़ सुबह उसे चाय बनाते देखता, आंगन में तुलसी को जल चढ़ाते देखता और शाम को अपनी किताबों में उलझे हुए देखता। मीरा  की हंसी से जैसे पूरा घर गूंज उठता था। रोहन दिल ही दिल में मीरा  को चाहने लगा था, लेकिन अपनी फितरत के अनुसार वह कभी अपने दिल की बात जुबां पर नहीं ला सका। वह बस छुप-छुपकर उसे देखता और जब कभी मीरा  उससे कुछ पूछती, तो वह बस ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देकर वहां से खिसक लेता।

रोहन स्वभाव से बेहद शर्मीला और अंतर्मुखी लड़का था। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। उसकी दुनिया उसके लैपटॉप, कोडिंग और घर से ऑफिस तक ही सीमित थी। वैसे तो रोहन को किताबें पढ़ने और फिल्में देखने का बहुत शौक था, विशेषकर वे फिल्में जिनमें नायक और नायिका दुनिया की नज़रों से छुपकर मिलते हैं, एक-दूसरे के लिए परेशान होते हैं और फिर उनका प्यार मुकम्मल होता है। पर्दे पर दिखने वाला यह इश्क़ रोहन को बहुत लुभाता था, लेकिन असल जिंदगी में लड़कियों के सामने उसकी ज़ुबान तालू से चिपक जाती थी। कॉलेज के दिनों में भी दोस्तों ने कई बार कोशिश की कि रोहन किसी से बात करे, लेकिन उसके शर्मीलेपन ने कभी उसे इस ‘रोमांच’ का हिस्सा नहीं बनने दिया।

वक्त अपनी रफ्तार से बीत रहा था और रोहन की उम्र सत्ताईस साल हो चुकी थी। घर में उसकी शादी की चर्चाएं आम होने लगी थीं। एक दिन रोहन की मां की बचपन की सहेली, सुमित्रा जी, अपने परिवार के साथ उनके घर जयपुर आईं। सुमित्रा जी के साथ उनकी बेटी मीरा  भी थी। मीरा  को जयपुर के एक प्रसिद्ध संस्थान से अपने सिविल सर्विसेज के इंटरव्यू की तैयारी करनी थी। दोनों परिवारों ने तय किया कि मीरा  अगले दो महीने तक रोहन के घर पर ही रहेगी। मीरा  एक बेहद सुलझी हुई, चुलबुली और खूबसूरत लड़की थी। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें, सादगी भरा पहनावा और घर के हर काम में हाथ बंटाने की उसकी आदत ने बहुत ही कम समय में रोहन के माता-पिता का दिल जीत लिया।

रोहन के लिए मीरा  का उस घर में होना एक अजीब सा मीठा अहसास था। वह रोज़ सुबह उसे चाय बनाते देखता, आंगन में तुलसी को जल चढ़ाते देखता और शाम को अपनी किताबों में उलझे हुए देखता। मीरा  की हंसी से जैसे पूरा घर गूंज उठता था। रोहन दिल ही दिल में मीरा  को चाहने लगा था, लेकिन अपनी फितरत के अनुसार वह कभी अपने दिल की बात जुबां पर नहीं ला सका। वह बस छुप-छुपकर उसे देखता और जब कभी मीरा  उससे कुछ पूछती, तो वह बस ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देकर वहां से खिसक लेता। दो महीने कैसे बीत गए, रोहन को पता ही नहीं चला। मीरा  के जाने का दिन आ गया। उसके जाते ही घर एकदम सूना हो गया और रोहन का दिल भी।

लेकिन कहते हैं ना कि जो किस्मत में होता है, वह खुद चलकर आपके पास आता है। मीरा  के जाने के कुछ ही दिनों बाद, रोहन की मां ने रात के खाने पर प्रस्ताव रखा कि क्यों न मीरा  को हमेशा के लिए इस घर की बहू बना लिया जाए। रोहन के पिता को भी यह विचार बहुत पसंद आया। रोहन से पूछा गया तो उसने नज़रें झुकाकर अपनी रज़ामंदी दे दी। अगले ही दिन रोहन के माता-पिता ने सुमित्रा जी को फोन किया और मीरा  का हाथ रोहन के लिए मांग लिया। सुमित्रा जी और उनके पति भी रोहन जैसे नेक और होनहार लड़के को दामाद बनाने के लिए तुरंत तैयार हो गए। कुछ ही महीनों के भीतर धूम-धाम से दोनों की शादी हो गई।

शादी के बाद मीरा  ने बहुत ही खूबसूरती से रोहन की जिंदगी और उसके घर को संवार लिया। रोहन भी बहुत खुश था कि जिसे उसने मन ही मन चाहा, वह बिना कुछ कहे उसकी जीवनसंगिनी बन गई। लेकिन, इंसान का मन बड़ा अजीब होता है। रोहन को अचानक एक बात सताने लगी। उसे लगने लगा कि उसकी जिंदगी में वह ‘रोमांस’ तो कभी आया ही नहीं जो उसने फिल्मों में देखा था। न उसने कभी अपनी प्रेमिका का इंतज़ार किया, न कभी दुनिया से छुपकर उससे मुलाकात की, न किसी पार्क में बैठकर घंटों बातें कीं। उसे लगा कि एक सीधी-सादी अरेंज मैरिज ने उसे जवानी के उस हसीन दौर से वंचित कर दिया है।

एक रात, जब दोनों कमरे में बैठे थे, रोहन ने झिझकते हुए मीरा  से अपने मन की बात कह ही डाली। उसने कहा, “मीरा , मुझे लगता है हमारी शादी बहुत जल्दी और बहुत आसानी से हो गई। हमने तो एक-दूसरे को डेट ही नहीं किया। न कभी छुपकर मिले, न कभी घरवालों से नज़रे चुराकर बाहर गए। मुझे वो वाला प्यार करना था, जो शादी से पहले होता है।”

मीरा  पहले तो रोहन की बात सुनकर जोर से हंसी, फिर उसकी मासूमियत पर उसे प्यार आ गया। उसने मुस्कुराते हुए पूछा, “तो अब आप क्या चाहते हैं? अब तो हमारी शादी हो चुकी है, सात फेरे ले चुके हैं हम। अब कौन सा छुप-छुपकर मिलने वाला प्यार करेंगे?”

रोहन की आंखों में एक चमक आ गई। उसने कहा, “हम अभी भी ऐसा कर सकते हैं! हम एक गेम खेलेंगे। हम ऐसे बिहेव करेंगे जैसे हम पति-पत्नी नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। हम घर से अलग-अलग निकलेंगे और शहर के उस पार्क में मिलेंगे जहाँ सारे प्रेमी जोड़े मिलते हैं। किसी को पता नहीं चलेगा!”

मीरा  ने उसे बहुत समझाया कि यह सब बचपना है और अगर किसी रिश्तेदार ने देख लिया तो बेवजह तमाशा बनेगा, लेकिन रोहन के सिर पर तो रोमांस का भूत सवार था। आखिरकार मीरा  को अपने पति की इस अनोखी ज़िद के आगे झुकना पड़ा।

तय योजना के अनुसार, रविवार की सुबह रोहन ने अपने माता-पिता से कहा कि वह ऑफिस के किसी ज़रूरी काम से बाहर जा रहा है। वह अपनी बाइक लेकर निकल गया। उसके जाने के आधे घंटे बाद, मीरा  ने भी अपनी सास से कहा कि उसे बाज़ार से कुछ कपड़े और ज़रूरी सामान खरीदना है, इसलिए वह जा रही है।

दोनों ने मिलने के लिए शहर का वह पार्क चुना था जो शहर के बाहर था और अक्सर प्रेमी जोड़ों के लिए मशहूर था। रोहन ने एक बढ़िया सी शर्ट पहन रखी थी और वह हाथ में एक गुलाब का फूल लिए नर्वस सा मीरा  का इंतज़ार कर रहा था। कुछ देर बाद मीरा  एक खूबसूरत से सूट में वहां पहुंची। उसे देखकर रोहन का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा, बिल्कुल वैसे ही जैसे एक कॉलेज के लड़के का अपनी क्रश को देखकर धड़कता है।

दोनों पार्क के एक शांत कोने में बेंच पर बैठ गए। रोहन बहुत खुश था। वह मीरा  का हाथ अपने हाथ में लेकर उन सारी बातों को कहने की कोशिश कर रहा था जो उसने सालों से अपने मन में दबा रखी थीं। मीरा  भी इस अजीब लेकिन प्यारे पल का मज़ा ले रही थी। सब कुछ बिल्कुल फिल्मों जैसा चल रहा था।

लेकिन रोहन यह भूल गया था कि असली जिंदगी फिल्मों की तरह नहीं होती, यहाँ स्क्रिप्ट किसी और के हाथ में होती है। अचानक पार्क के गेट पर पुलिस की गाड़ियाँ आकर रुकीं। यह शहर की पुलिस का ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ था, जो अक्सर ऐसे पार्कों में आकर मनचलों और बिना वजह बैठे जोड़ों से पूछताछ करता था। पुलिस वालों को देखते ही पार्क में भगदड़ मच गई। कई लड़के-लड़कियां दीवार फांदकर भागने लगे।

मीरा  घबरा गई और उसने रोहन से कहा, “रोहन, पुलिस आ गई है, चलो यहाँ से चलते हैं!” लेकिन रोहन ने हीरो की तरह सीना चौड़ा करते हुए कहा, “अरे घबराओ मत, हम कोई चोरी थोड़ी कर रहे हैं। हम तो पति-पत्नी हैं।”

तभी दो हवलदार और एक इंस्पेक्टर उनके पास आकर खड़े हो गए। इंस्पेक्टर ने कड़कती आवाज़ में पूछा, “हाँ भाई, यहाँ कोने में छुपकर क्या चल रहा है? घर वालों को पता है कि तुम दोनों यहाँ गुलछर्रे उड़ा रहे हो?”

रोहन ने तुरंत जवाब दिया, “सर, आप गलत समझ रहे हैं। यह मेरी पत्नी है। हमारी शादी हो चुकी है।”

इंस्पेक्टर ने व्यंग्यात्मक हंसी हंसते हुए कहा, “पत्नी है? बेटा, यहाँ पकड़े जाने पर हर कोई यही कहता है कि ये मेरी पत्नी है, ये मेरी मंगेतर है। अगर पत्नी है तो यहाँ इस तरह छुपकर कोने में क्या कर रहे हो? घर नहीं है क्या तुम्हारे पास?”

रोहन पसीने-पसीने हो गया। उसने लाख समझाने की कोशिश की, “सर, विश्वास कीजिए, हम सच कह रहे हैं। हम तो बस ऐसे ही घूमने आए थे।”

इंस्पेक्टर ने कहा, “ठीक है, अगर ये तुम्हारी पत्नी है तो दिखाओ मैरिज सर्टिफिकेट या शादी की कोई तस्वीर।”

अब रोहन के पास उस समय ऐसा कोई सबूत नहीं था। वो तो ‘데이트’ (डेट) के मूड में आया था, मैरिज सर्टिफिकेट लेकर थोड़ी आया था। पुलिस वालों ने उसकी एक न सुनी। उन्होंने तुरंत मीरा  को एक महिला कांस्टेबल के साथ ऑटो में बैठाकर सुरक्षित उसके घर की तरफ रवाना कर दिया और रोहन को पकड़कर पुलिस वैन में डाल दिया।

थाने पहुंचकर रोहन को लॉकअप में बैठा दिया गया। रोहन सिर पकड़े बैठा था। जो रोमांस उसे फिल्मों में इतना हसीन लगता था, उसने आज उसे हवालात की हवा खिला दी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह अपने माता-पिता को क्या जवाब देगा।

उधर घर पर जब मीरा  रोते हुए महिला कांस्टेबल के साथ पहुंची, तो उसके सास-ससुर घबरा गए। मीरा  ने सुबकते हुए सारी कहानी कह सुनाई कि कैसे रोहन को शादी से पहले वाले रोमांस का भूत चढ़ा था और कैसे वे दोनों पकड़े गए। पूरी बात सुनकर रोहन के पिता का गुस्सा एकदम से शांत हो गया और वे जोर-जोर से हंसने लगे। रोहन की मां भी अपनी हंसी नहीं रोक पाईं। दोनों को समझ आ गया कि उनके बेटे ने अपनी ही बेवकूफी से यह मुसीबत मोल ली है।

तुरंत रोहन के पिता शादी का एल्बम लेकर थाने पहुंचे। उन्होंने इंस्पेक्टर को शादी की तस्वीरें दिखाईं और पूरी बात बताई। इंस्पेक्टर भी यह सुनकर अपनी हंसी नहीं रोक पाया। उसने रोहन को लॉकअप से बाहर निकाला और मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, असली रोमांस अपनी पत्नी को खुश रखने और इज़्ज़त देने में है, इन फिल्मी चक्करों में नहीं। आइंदा ये ‘छुप-छुपकर’ वाला खेल घर पर ही खेलना।”

रोहन शर्म के मारे पानी-पानी हो रहा था। घर लौटते समय रास्ते भर उसके पिता उसे चिढ़ाते रहे। घर पहुंचने पर मीरा  ने जब उसे घूर कर देखा, तो रोहन ने अपने कान पकड़ लिए और कसम खाई कि आज के बाद वह कभी इस ‘इश्क़ के भूत’ और ‘उधार के रोमांस’ के चक्कर में नहीं पड़ेगा।

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