सारे दर्द औरत को ही क्यूँ ???? – मीनाक्षी सिंह

विन्नी – मम्मा ,बहुत दर्द हो रह हैँ पेट में ,पेट के आस पास और कमर में ! लग रहा हैँ मर जाऊंगी ! कुछ तो करो मम्मा !

सीमा (13 साल की विन्नी की माँ ) – कोई बात नहीं बेटा ,अभी तुझे गरम दूध दे दूँगी ! पी लेना आराम मिल जायेगा ! 3-4 दिन की बात हैँ ठीक हो जायेगा !

विन्नी – आप हर मंथ यहीं कहती हो मम्मा ,फिर दर्द होता हैँ ! मुझे क्यूँ हर बार चोट लग जाती हैँ ! मैं खेल भी नहीं पाती ! इस बार तो मैने मेरी फेवरेट ईमली,खट्टा मीठा चूरन भी नहीं खाया ,पर फिर भी दर्द हो गया ! आप कह रही थी अगली बार मत खाना ,नहीं होगा ! झूठ क्यूँ बोलते हो ! भईया तो हर दिन ईमली ,चूरन खाता हैं ! उसे क्यूँ नहीं होता दर्द ! बताओ ना !

बेचारी सीमा बालमन के मासूम सवालों का क्या जवाब दे ज़िसका जवाब उसके पास खुद नहीं हैँ ! विन्नी ने अभी 6 महीने पहले युवावस्था में प्रवेश किया हैँ ! औरत के हर महीने के वो चार दिन जब वो दर्द के  कठिन दौर से गुजरती हैँ ! पहली बार तो बेचारी मासूम विन्नी डर गयी कि उसे अचानक ये क्या हो गया ! पर सीमा ने उसे ये कहकर कि तुम स्पेशल हो इसलिये ये दर्द होता हैँ ! बस गर्म दूध से ये ठीक हो जायेगा ! तुम बड़ी हो रही हो मेरी बच्ची !! इतना कह देती !

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धीरे धीरे विन्नी  भी खुद समझ गयी ! विन्नी स्नातक कर चुकी थी! उसके ब्याह के लिए रिश्ते देखें ज़ा रहे थे ! विन्नी मना करती रहती मुझे नहीं करनी शादी मम्मा ,पापा ! मुझे कोई भी तकलीफ या  दर्द होगा तो मेरे ससुराल वाले नहीं समझेंगे ! मुझसे दर्द में भी काम  कराते रहेंगे,, जैसे टीवी में दिखाते हैँ वैसी ही होती हैँ ना ससुराल मम्मा !

यहाँ तो थोड़ा सा सर दर्द भी होता हैँ तो आप कहते हो आराम  कर ले विन्नी ! पापा झट से मार्केट से दवाई ले आते हैँ ! वहाँ तो सब सोचेंगे काम चोर हूँ मैं ! नहीं मम्मा बिल्कुल नहीं ! मासूम विन्नी सीमा से लिपट गयी ! सीमा हंसकर बोली – सब ससुराल टीवी जैसी नहीं होती ! अच्छी भी होती हैँ !

इस तरह मनाकर विन्नी को सीमा ने प्रमोद से ब्याह दिया ! वैसे तो प्रमोद सीधा सादा ,समझदार ,विन्नी को प्यार करने वाला लड़का था ! पर मात्रभक्त ज्यादा था ! अपनी माँ की हर बात सर माथे लगाता था !

ब्याह के दो वर्ष बाद विन्नी गर्भवती हुई !.अब उस पर पहले की तरह चुस्ती फुर्ती से काम नहीं होता था ! वैसे भी जब औरत दो अंश से चल रही हो तो उसके स्वभाव और शरीर में परिवर्तन आना स्वभाविक हैँ ! एक दिन रसोई में काम करते हुए विन्नी को अचानक से चक्कर आ गए ! वो बर्तन वही छोड़ दिवार का सहारा लेते हुए अपने कमरे में बेड पर आकर लेट गयी ! पता नहीं कब विन्नी की आँख लग गयी ! कुछ देर बाद उसकी सास कमला जी कमरे में ही आ धमकी !

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कमला जी – ए री  विन्नी ,अभी तक चाय नहीं बनायी ! मैं कब से इंतजार कर रही हूँ ! तू यहाँ  दो पहर मिल रहे हैँ,,तब सो रही है !

विन्नी – मम्मी जी ,अचानक से चक्कर आ गए थे इसलिये आकर लेट गयी ! पता नहीं कब आँख लग  गयी !

कमला जी – हे भगवान ,हमने तो पांच पांच बच्चें पैदा कर दिये ना कभी चक्कर  आये,ना इतनी उल्टी ! दिन भर काम करते थे !इतना बड़ा कुटुम्ब था खाने को भी वही रुखी सुखी दो बख्त की रोटी मिलती थी ,तेरी तरह ये जूस ,फल ,पनीर तो हमने जाना ही नहीं ! सब बच्चें नार्मल हो गए ! तू जो इतना आलस दिखाती हैँ ! ज़ानबूझकर बिस्तर पर पड़ जाती हैँ, देखना तेरे ऑपेरेशन से ही बच्चा होगा ! मेरे प्रमोद का अच्छा खासा पैसा खर्च करायेगी तू !

बेचारी विन्नी बस अपने आंसू पोंछकर रसोई में चाय बनाने चली गयी ! पूरे 9 महीने उसे कमला जी से कुछ ना कुछ सुनने को मिलता रहता ! बैठकर पोंछा लगा ,खूब काम किया कर ,चक्की पीसा कर ! कम सोया  कर ,बच्चा भी तेरी तरह आलसी हो जायेगा ! सुबह जल्दी उठकर टहला कर ! अब विन्नी ने अपने दर्द को बताना भी बंद कर दिया था ससुराल में,, नहीं तो दो चार और सुनने को मिल जाती !

धीरे धीरे विन्नी की डिलिवरी का समय भी पास आ गया !

विन्नी – मम्मी जी ,इनको फ़ोन कर दिजिये ,बहुत दर्द हो रहा हैँ !

कमला जी – थोड़े दर्द और बढ़ने दे नहीं तो तुरंत ऑपेरेशन कर देंगे ! सब डॉक्टर पैसा बना देते हैँ तेरी  जैसी नाजुक औरतों का दर्द देखकर !

विन्नी – मम्मी जी ,प्लीज ,स्टोप दिस ! मैं मर जाऊंगी ! #दर्द सहन नहीं हो रहा !

कमला जी – मुझे क्या ,,ठीक हैँ ठीक हैँ ,बुलाती हूँ प्रमोद को !

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विन्नी को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया ! उसकी माँ सीमा भी विन्नी के पास पहुँच गयी !
डॉक्टर ने कहा – काफी देर कर दी आप लोगों ने ! ज्यादा दर्द ले लिए हैँ आपकी बहू ने ! बच्चा नीला पड़ गया हैँ ! ओपरेशन ही लास्ट ऑप्शन हैँ !

विन्नी ने ओपरेशन से एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया !

उस पर कमला जी खुश होने के बजाय बोली – ओपरेशन भी हो गया ,इतना पैसा भी खर्च हो गया फिर भी बेटी हुई !

विन्नी ने कमला जी से ऐसी उम्मीद नहीं की थी !

सीमा बोली – समधन जी ,माफ कीजियेगा ,आप औरत होकर औरत का दर्द नहीं समझ सकती ! एक बच्चें को जन्म देना औरत का दूसरा जन्म होता हैँ ! वो कितनी तकलीफें ,दर्द सहती हैँ पूरे 9 महीने ! इसके बाद भी महीनों उस दर्द को ख़ुशी ख़ुशी झेलती हैँ ! आखिर आप भी तो चार बेटियों की माँ हैँ !

क्या आपकी सास ने भी हर बार आपसे ऐसा ही कहा था ! खैर आप नहीं समझेंगी ! इस समय विन्नी को आराम की ज़रूरत हैँ ! शायद वो आराम आप दे नहीं पायेंगी ! इसलिये मैं कुछ दिनों के लिए  विन्नी और अपनी छोटी परी को अपने साथ ले जा रही हूँ ! क्यूँ प्रमोद बेटा ले जाऊँ ना ??

प्रमोद – हाँ हाँ मम्मी जी ,क्यूँ नहीं ! माँ तो वैसे भी खुश नहीं हैँ ! यहाँ रहेगी विन्नी तो उसको कुछ ना कुछ कहती रहेंगी ! अपनी परी और विन्नी को देखने मैं आ जाया करूँगा !

सीमा – हाँ हाँ ,बेटा क्यूँ नहीं ! तुम भी तो मेरे बेटे हो !

कमला जी अपने बेटे प्रमोद के इस बदले हुए रुप से आश्चर्य में पड़ गयी ! आज उन्हे अपने बेटे को खोने का दर्द महसूस हो रहा था ! शायद विन्नी का दर्द भी ! तभी बोली – विन्नी बेटा मेरी परी का ख्याल रखना ,हो सकें तो मुझे माफ कर देना ! आज विन्नी का कुछ दर्द हल्का हो गया था ! वो बस डबडबायी आँखों से कमला जी को निहारती रह गयी !

स्वरचित

मौलिक अप्रकाशित

मीनाक्षी सिंह

आगरा

 

 

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