सपनों का सौदागर – किरण केशरे : Moral Stories in Hindi

नही कुणाल तुम मेरे घर मत आया करो, तुम्हें अगर नोट्स चाहिए तो रोज क्लास अटेंड करो; मौली ने सपाट संयत स्वर में कुणाल से कहा दोनो केंटीन मे बैठे थे ;

अरे इतना क्यों घबराती हो यार कह देना क्लास फ्रेण्ड है नोट्स लेने आता है, कुणाल ने मौली को कहा और मुस्कुराने लगा चलो आज मेटनी शो चलते है !

मेरी नई चमचमाती बाईक से ; जो मुझे डेड ने मेरे बर्थ डे पर लाकर दी..मौसम भी कितना सुहाना हो रहा है और हाँ साथ में चायनीज रेस्टोरेंट भी चलेंगे…

तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और इस यलो सूट में तो बहुत हसीन लग रही हो ; कुणाल खुशामद पर उतर आया था;

देखो मैं तुम्हारे लिए कितना सुंदर ब्रेसलेट लाया हूँ, तुम्हारे खूबसूरत हाथ में बहुत जचेगा…घर में कोई पूछे तो कह देना मेरी सहेली ने गिफ़्ट किया है..

किसी को कुछ पता नही चलेगा; कुणाल ने बड़े  नाट्कीय अंदाज से मौली को समझाया! 

नही-नही, मेरे पापा ये सब पसंद नही करेंगे हम अच्छे सहपाठी है और कुछ नही मौली का जवाब था। 

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अरे यार, कैसी दकियानुसी बातें कर रही हो ; इतना तो काॅलेज लाईफ में एंजॉय सब ही करते हैं, कुणाल ने उकसाया था मौली को! 

हम काॅलेज पढ़ाई के लिए आते हैं कुणाल ! न की अपने पेरेंट्स का भरोसा तोड़ने ! मैंने भी जीवन के कुछ लक्ष्य निर्धारित किये हैं

मैं नही चाहती की मेरी थोड़ी सी नादानी मेरे पिता के  सम्मान और मेरे भविष्य के सपनों पर भारी पड़ जाए…

मैं तुम्हारी लच्छेदार मीठी बातों के झाँसे में नही आने वाली हूँ और तुम जैसा सोच रहे हो मैं वैसी भी नही हूँ , कुणाल…

कहकर मौली  उसके मतलबी इरादों को चकनाचूर कर  सधे कदमों से क्लासरूम की और चल दी!! 

 किरण केशरे 

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