सहारा – बिमला रावत जड़धारी

राकेश अपने जीजा जी, गिरिश, को फोन करता है। फोन गिरिश की पत्नी सविता उठती है। हैलो, मैं राकेश बोल रहा

हूॅं।भइया हम सविता बोल रहे हैं। सब ठीक तो है? आज कैसे फोन कर दिया? अरे आपकी दीदी नहीं रही तो आप ने यहॉं

आना ही छोड़ दिया। हम भी तो आपकी बहन है। और हमसे नहीं तो अपनी भांजी काजल का कुशल मंगल पूछने के लिए ही

आ जाया करो। या कभी फोन ही कर लिया करो।दीदी आप हैं तो हमें किसी बात की चिंता नहीं।भइया हम तो सौतेली मॉं

हैं। हम कितना भी अच्छा कर ले, सब यही बोलते हैं कि सौतेली मॉं है, अपनी होती तो ऐसा कोई करती।क्या हुआ दीदी

सब ठीक तो है? आप जीजा जी से बात कराओ।राकेश गिरिश से बात करता है और पूछता हैजीजा जी सब ठीक तो है?

दीदी कुछ परेशान लग रही है।राकेश सब ठीक है, तुम बताओ कैसे फोन किया।जीजा जी आप घर के हालात तो जानते ही

हैं। बच्चे बड़े हो रहे हैं तो घर खर्च भी बढ़ रहे हैं। अगर आप शहर में नौकरी ढूंढ देते तो मैं वहीं आ जाता। फिर कुछ महीने

बाद अपने परिवार को भी बुला लेता।राकेश मैं तो गार्ड की नौकरी करता हूॅं। अगर तुम बोलो तो यहाॅं एजेंसी में तुम्हारा

नाम लिखा कर नौकरी की बात कर लेता हूॅं हाॅं- हॉं जीजा जी, कर लो। आप जब बोलो मैं आ जाऊंगा।राकेश तुम कल

परसों कभी भी आ जाना। तुम्हें कुछ न कुछ काम मिल ही जाएगा और मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात भी करनी है।एक हफ्ते

बाद राकेश अपने जीजा जी के घर जाता है। राकेश की बहुत आवभगत होती है। काजल अपने मामा जी के लिए चाय

नाश्ता लेकर आती है। काजल बेटा तुम तो बहुत बड़ी हो गयी हो।तभी सविता आती है;भइया लड़कियों को बड़ा होने में

कहाॅं समय लगता है। आठवीं में पढ़ती है, और घर का काम कुछ आता नहीं है। मैं तो कह रही थी कि बारहवीं तक ही पढ़ाओ

बस। उसके बाद घर में रह कर कुछ गृहस्थी का काम भी सीख जाएगी। कोई अच्छा सा लड़का देख कर शादी भी तो करनी

है। पर इन बाप बेटी को मेरी बात समझ ही नहीं आती।आ बेटा मेरे पास बैठ। दीदी, अभी तो ये छोटी है पढ़ने दो इसे।तभी

गिरिश आता है, मैं भी यही कह रहा था पर इसकी बात समझ में ही नहीं आती। कह रही है भात न्योता में आधा खर्चा

इसका मामा उठाएगा।हाॅं जीजा जी ये हमारी एक रस्म है जो रिश्ते को मजबूत करती है। मैं अपनी भांजी की शादी में

कोई कमी नहीं होने दूंगा ,पर अभी इसे पढ़ने दो। पढ़ाई ही इसका गहना है। पढ़ाई से ये अपना और किसी का सहारा बनें।

बात रही रस्म की तो मैं काजल को पैसा दूॅंगा। वह उन पैसों का जैसे चाहे खर्च करें।राकेश को नोएडा के एक फ्लैट में गार्ड

की नौकरी मिल जाती है। कुछ महीने बाद अपने परिवार को भी बुला लेता है और बच्चों का स्कूल में दाखिला करा देता है।

दिन साल गुजर जाते हैं। काजल की बारहवीं भी हो जाता है। घर में शादी की बात चलती है। वह मना करती है, कहती है

अभी मुझे आगे पढ़ना है और अपना काम करना है। गिरीश उसे समझाते हैं बेटा तुम अपनी पढ़ाई जारी रखो, लड़का ढूंढ़ने

में भी टाइम लगता है। जहाॅं तक अपने काम की बात है, मेरे पास इतना पैसा नहीं है। मैंने तुम्हारी शादी के लिए जो पैसे

जोड़े हैं वो तो मैं तुम्हें नहीं दे सकता। काजल कुछ नहीं कहती। वो आगे बी ए करने लगती है और घर में बच्चों को ट्यूशन

पढ़ने लगती है। गिरीश अपने सभी रिश्तेदारों को काजल के लिए अच्छा रिश्ता ढूंढ़ने के लिए बोलता है। बहुत से रिश्ते आते

हैं पर कहीं भी बात नहीं बनती।एक दिन काजल अपने मामा जी से मिलने जाती है जहॉं वे गार्ड की नौकरी करते हैं। अपने

मामा जी से कहती है मामा जी मुझे अभी शादी नहीं करनी है।क्यों बेटा, नौकरी करना चाहती हो क्या?मामा जी नौकरी

नहीं अपना काम। बस आप मुझे कुछ पैसे देकर मदद कर दीजिए। आपने जो पैसे मेरे लिए जोड़े हैं उसमें से कुछ पैसे उधार

समझ कर दे दिजिए।पर काम क्या करोगी?जो मेरी मम्मी करती थी, मसाला पीस कर पैक कर के बेचूंगी।बेटा उसमें तो

बहुत मेहनत है और तुम कर लोगी?हॉं मामाजी, कर लूंगी। मेहनत किस में नहीं होती। फिर आप हैं, मामी जी और माॅं

पापा हैं। पापा ने तो पैसे देने से मना कर दिया, आप मना मत करना।ठीक है बेटा वो तुम्हारे ही पैसे हैं। मैं दे दूंगा।काजल

का काम चलने लगता है। वह अपने घरवालों को अभी भी शादी करने से मना करती है। कई जरूरतमंद महिलाओं को अपने

काम में रख कर काजल उनका सहारा बनती है। एक दिन उसके मामा जी की तबीयत खराब हो जाने के कारण वह दस –

बारह दिन तक काम पर नहीं जा पाते और उनकी नौकरी चली जाती है। जब काजल को पता चलता है तो वह अपने मामा

को बोलती है अब आप और पापा यही पर काम करेंगे। यह आपका अपना काम है तो कहीं और क्यों जाना। मुझे आप दोनों

के सहारे की जरूरत है। काजल अपने पापा और मामा के गले लग जाती है।- 

बिमला रावत जड़धारी

#सहारा

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