सहारा – खुशी

रामनाथ अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे।घर में पत्नी नीता 3 बच्चे नवीन ,विवेक और आरती।बड़ी बहन कमला जो विधवा हो गई थी इसी कारण वो भी मायके वापस आ गई ।उसकी भी दो बेटियां थीं और मां शीला ये परिवार था।रामनाथ एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे।

सब बच्चे पढ़ने वाले थे।नीता कमला के आने से खुश नहीं थी उसे लगता था कि रामनाथ पर बहुत बोझ है वो कई बार रामनाथ से कहती भी कि कमला पढ़ी लिखी हैं क्या वो काम नहीं कर सकती अपने बच्चों की जिम्मेदारी तो उठा सकती हैं।रामनाथ कहते ऐसा मत कहो उसका वाहिद सहारा मैं ही हूं।

उसे संभालना मेरी जिम्मेदारी है।  नीता सोचती मै ही कुछ काम कर लूं ताकि रामनाथ की मदद हो सके बच्चों की पढ़ाई बढ़ रही है।क्या करूं शीला जी कहती भी मेरे बच्चे पर इतना बोझ है कोई उसकी मदद नहीं करता परंतु अपनी बेटी से नहीं कहती कि तुम भी कुछ काम करो।नीता की एक सहेली थीं रेवती उससे नीता अपना दुख सुख बताती थी ।

उसने कहा मेरी सहेली है उसके घर खाना बनाना है तू इतना स्वादिष्ट खाना बनाती है कहे तो बात करूं।नीता बोली पर घर में क्या कहूंगी।कुछ भी बोल देना पर पैसा अच्छा मिलेगा और इज्जत का काम है।नीता ने रेवती को हा बोल दिया रात को उसने ये बात रामनाथ को बताई।रामनाथ ने मना कर दिया नीता बोली अगर ऐसे ही रहा तो बच्चों की पढ़ाई सरकारी स्कूल में करवानी पड़ेगी

।5 बच्चे पढ़।ना आसान काम नहीं है।में जा कर देखती हूं क्या होता है? अगले दिन घर का सारा काम कर दिन का खाना बना कर नीता  रेवती के यहां पुहुंच गई।दोनो अंजली के घर आई रेवती ने नीता के बारे मे अंजलि को बता दिया था।अंजली बोली तुम पास्ता बनाओ और खिचड़ी भी ।

नीता ने सब्जियां डाल कर पास्ता बनाया और खिचड़ी भी अच्छी पतली खिचड़ी खा कर अंजलि की सास खुश हो गई और बोली तूने नया कूक रख लिया क्या? उसे पता है खिचड़ी कैसे बनाते है। वरना तेरा वो पहला कूक तो जान कर ऐसा खाना बनाता था कि कोई खा ही नहीं पाए।

इतनी देर में अंजलि का बेटा वैभव भी आ गया मॉम आज क्या है बेटा टेस्ट इट पास्ता इतनी  बेजी। अरे खा कर तो देख उसने  टेस्ट किया मॉम इट्स यम्मी बहुत अच्छा बना है।अंजली बोली दादी पोते ने तो तुम्हे पास कर दिया अब बारी है मेरी बेटी निशा,ससुर साहब और मेरे नक चढ़े पति विकास की जिन्हें कुछ पसंद नहीं आता।

दीदी कैसा खाना पसंद करते है वो घर का बना स्वादिष्ट लजीज व्यंजन ठीक है मसाले तेल कम जी अच्छा।नीता रसोई में गई उसने बैगन का भरता और घीया के कोफ्ते बनाए रोटी का आटा लगा दिया।और वो घर आ गई क्योंकि अंजलि ने कहा था कि अगर उन लोगों ने पास कर दिया

तो तुम पक्की शाम होते ही अंजली का फोन आया तुम कल सुबह से ही आ जाना नाश्ता भी तुम बनोगी  सुबह 9:00 बजे।अगले दिन नीता चार बजे उठी घर का काम किया सबका नाश्ता खाना बनाया  और 8:30 चली गई वहां जाते ही फरमाइश हुई पराठों की नीता ने आलू प्याज गोभी के पराठे बनाए जो सबको स्वादिष्ट लगे।

अंजली की सास सुलभा जी बोली कितने अच्छे पराठे है हल्के और पतले । ससुर घनश्याम ने कहा कल तुमने कोफ्ते के साथ क्या बनाया था जी बैगन का भरता ।क्या भरता इतना स्वादिष्ट था कि पता  ही नहीं चला वरना मैं  तो बैगन  खाता ही नहीं। बेटी बहुत स्वाद है

तेरे हाथों में। नीता के हाथ का खाना अंजली के घर में सबको भाता ।अंजली नीता को पैसा भी अच्छा दे रही थी।बच्चों की जरूरतें नीता पूरी करने लगी बेटे को ट्यूशन लगवा दी। नन्द कमला मां के साथ मुहजोरी करती पर घर में कोई मदद नही करती थी।इधर बच्चों की जरूरतें बढ़ रही थी

। कमला की बेटी भी दसवीं में आ गई थी तो कमला ने रामनाथ से कहा भैया इसे भी ट्यूशन रखवा दो क्योंकि ये गणित में कमजोर है जहां पर नवीन और विवेक पढ़ते हैं।देखता हूं रामनाथ बोले कमरे में आए तो उदास थे बोले आज कल कंपनी में छटनी चल रही है।कैसे होगा तुम सब का सहारा मैं ही तो हूं।परेशान मत होइए सब ठीक होगा ईश्वर हम सब का सहारा है।मै देखती हूं

कुछ और काम पकड़ सकूं तो ।क्या क्या करोगी खाना बनाने जाती हो फिर घर का काम बच्चों की पढ़ाई और फिर सिलाई का काम कोई बात नहीं जी हम दोनों एक दूसरे का सहारा है ना।अगले दिन नीता खाना बना कर निकल रही थी कि घनश्याम जी आए बोले बेटी एक काम था तेरे लिए करेगी ।बताइए बाबूजी क्या बात है बेटा हमारी फैक्टरी में हर साल

हनुमान जयंती का भंडारा होता है क्या तू वहां खाना बनाएगी मुंह मांगा पैसा मिलेगा पुण्य अलग से।बाबूजी मै घर में पूछ कर बताती हूं।घर आ कर शाम को रामनाथ आए तो बोले नीता  तुम्हे कुछ बताना है जी कहिए पहले ये चाय लीजिए ।नीता मेरी नौकरी चली गई।क्या उधर से आती सास शीला ने सुन कर रोना शुरू कर दिया

अब क्या होगा इस घर का हे ईश्वर तूने तो हमारा सहारा छीन लिया मेरी बेटी का क्या होगा बेटे तेरे ऊपर ये चार बोझ है उन्हें कैसे उठाएगा इसे मायके भेज दे।मां चुप रहो जरा ये बेचारी घर चलाने में मेरी पूरी मदद करती है।आप सब शांत हो जाओ 

मैने कहा था ना ईश्वर सबसे बड़ा सहारा है आज एक रास्ता बंद हुआ तो दूसरा खुल गया आज ही घनश्याम बाबूजी ने मुझे उनकी फैक्ट्री में हनुमान जयंती का भंडारा के खाने का काम दिया है हम सब मिल कर मेहनत करेंगे तो सब अच्छे से होगा।कमला आगे आई बोली भाभी मै आपके साथ हूं।

रामनाथ ने कहा तुम हा कर दो। अगले दिन नीता ने हा कर दी 100 लोगो का खाना बनाना था।नीता ने इतनी सफाई से खाना बनाया ।रामनाथ अपने दोस्त से  जिसकी हलवाई की दुकान थी दो लड़के ले आए पूरी उतारने के लिए सब्जी ,छोले खीर पूरी रायता जिसने खाया वो तारीफ के बिना नहीं रहा।

घनश्याम ने नीता को शाम को एक लाख रुपए दिए और कहा बेटी तरक्की कर मेरा एक दोस्त है जो अपनी कंपनी में कर्मचारी को खाना खिलाता है उसकी कंपनी के डब्बे भेजने का काम करेगी । जी बाबूजी करूंगी आप हमारी डूबती नैया को तारने वाले सहारे बने हो।

बेटी जिसमें हौसला होता है ना भगवान उसे खुद ही तार देते है।समझी पर फीस लूंगा बोलिए बाबूजी मेरा खाना तू ही बनाएगी इनका नहीं मेरा भी सुलभा जी बोली अरे हम सबका क्योंकि तुम्हारे अलावा किसी के हाथ का खाना ये नहीं खाएंगे।दीदी बाबूजी आप कैसी बात कर रहे हैं मुझे आज यहां तक लाने वाले आप ही हैं।

आपका काम करके ही दूसरा काम करूंगी।अगले दिन नीता और रामनाथ उस कंपनी के मालिक से मिलने गए ।40 डब्बे का ऑर्डर था एक बजे तक भेजना था।

नीता घर से काम करती रामनाथ ,शीला और कमला उसकी पूरी मदद करते ।नीता के खाने की तारीफ सुन आस पास के लोग भी उससे खाना लेने लगे।उसे स्कूल कैंटीन का काम भी मिल गया जहां अब कमला जाती।घर से खाने के पैकेट और समोसा पेटीज ब्रेडपाकोडा ले जाती।चाय कॉफी वही बना देती। नीता की समझदारी से पूरा परिवार अपने पैर पर खड़ा हो गया और एक दूसरे का सहारा बना।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

#सहारा

error: Content is protected !!