“माँ जी!! आप चख कर बताना की आज सब्जी कैसी बनी है..?
सब्जी में मसाले बराबर डले है या नही….नीता ने बड़े उत्साहित होते हुए अपनी सास शारदा जी से पूछा।।
चखना क्या है…? वो ही रोज के जैसे सब्जी बनाई होगी। जिसमे न मिर्ची न नमक औऱ न ही तेल…बस बीमार आदमी के जैसी सब्जी जिसे खाकर मन ही खराब हो जाये…शारदा जी ने मुँह सिकुड़ते हुए कहा।।
नीता रोज अपने हिसाब से सब्जी बनाती लेकिन अपनी तारीफ सुनने की ख्वाहिश उसकी अधूरी ही रह जाती।।
अरे माँ एक बार चख कर तो देखो… सच मे नीता ने बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी बनाई है। आप भी उंगलियां चाटती रह जाओगी… नीता के पति रमेश ने सब्जी चखते हुए कहा।।
हाँ तू तो रहने ही दे…!! तुझे तो अपनी बीबी के तारीफ के पुल बांधने होते हैं…तू मुझे सिखाये की सब्जी कैसी बनी है केसी नही…जब मैंने बिना चखे औऱ रंग देखकर कह दिया कि सब्जी अच्छी नही बनी हैं.. तो बस नही बनी है…आगे मुझे कुछ नही सुनना..!!
शारदा जी ने चिड़ते हुए कहा।
बहुत देर से शारदा जी की बाते सुन रहे पति मोहन ने जी कहा-शारदा जी आप शायद गलत कह रही है, सब्जी के रंग को देखकर उसकी योग्यता का अनुमान लगाना गलत है।।
बिन चखे ही आपने कहा दिया कि सब्जी ठीक नही बनी है,एक बार मेरी कहने पर जरा सब्जी चख भी लो…फिर अपनी राय देना… औऱ गर बहू से सब्जी नही बनाना आता तो तुम भी तो उसे सीखा सकती हो।
इस कहानी को भी पढ़ें:
रिश्तो की डोर – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’ : Moral stories in hindi
यह सुनकर तो शारदा जी पारा झड़ गया। लगता हैं बहु ने आप भी जादू कर दिया है। मतलब मेरी बात तो आप लोगो को गलत लग रही है..औऱ भला मैं क्यों सिखाऊँ इसे रिश्ते तय करते वक्त इसकी माँ ने कहा था कि-“मेरी बेटी को घर का सारा काम आता है, औऱ खाना तो वह बहुत ही स्वादिष्ट बनाती हैं। लेकिन आज क्या हुआ उस वक्त झूठ क्यो बोला। सच ही कह देती की मेरी बेटी को सब्जी बनाना नही आता मैं कौनसा इतनी सी बात के लिए रिश्ता तोड़ देती…!! शारदा जी बेमतलब की बाते कर यह मानने को तैयार ही नही थी कि बहू नीता अच्छा खाना बनाती है।
घर मे सभी नीता के खाने की तारीफ करते थे लेकिन एक सास ही उसके खाने में नुक्स निकाले बिना नही रहती थी..!! सभी शारदा जी को समझाते समझाते हार गए थे लेकिन शारदा जी समझने वालों में से नही थी…!!
लेकिन नीता ने भी ठान लिया था कि वो भी सब्जी के माध्यम से ही अपनी सांस के दिल मे जगह बनाकर ही रहेगी।।
एकदिन की बात है घर पर कुछ मेहमान आने वाले थे। उनके लिए खाने की तैयारी करनी थी।।
शारदा जी ने नीता से कहा-” देखो बहू आज घर पर कुछ मेहमान आ रहे हैं तो तुम खाने की तैयारी शुरू कर दो।। देख लेना क्या बनाना हैं क्या नही ।।
यह सुनकर नीता ने कहा-माँ जी वैसे भी मुझे खाना बनाना आता ही नही है। खासकर सब्जी ….सब्जियां को मुझसे बीमार आदमियों के खाने के जैसी बनती हैं जिसमें न मिर्ची न नमक औऱ न ही तेल ठीक से डलता हैं।क्या ऐसी सब्जी मेहमानों के सामने ठीक लगेगी..!! आप ही मेहमानों के लिए खाना बना लो..मुझे औऱ कुछ काम बता दीजिए।।
नीता ने मौके पर अपनी बात कही!! यह सुनकर शारदा जी की सिटी पिटी गुम हो गई..!!अकेली इतने सारे मेहमानो के लिए खाना कैसे बनेगा…!!जब से नीता बहू बनकर इस घर मे आई तब से किचन का काम तो छूट सा गया था..बस नीता के कामो में नुक्स निकालने का काम रह गया था।।
अब तो शारदा जी के जान पर बन गई।
अरे बहू!! तू सच मे बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी बनाती हैं। वो तो क्या है ना तू कही मेरे सिर पर न नाचने लगे इसलिए तेरी बनी सब्जियों में नुक्स निकालती हूँ।। सच मैं तू तो अन्नपूर्णा हैं।
शारदा जी ने कहा।।
माँ जी काम निकलवाने के लिए माखन लगाने की जरूरत नही है, आज तो आप मेरी तारीफ़ कर रही हो,कल फिर वही आप मेरे कामो में नुक्स निकालने लगोगी मैं सब जानती हूँ आपको।।
नीता ने भी थोड़े भाव खाते हुए कहा।।
नही नही !!”बहू मैं सच कह रही हूं।।” शारदा जी ने कहा।।
नीता ने भी सोचा चाहें कैसी ही तारीफ की हो लेकिन मेरी ख्वाहिश ही थी अपनी सासू माँ से तारीफ सुनने की चलो ये ख्वाहिश पूरी तो हुई।।
नीता ने बिन भाव खाये …मेहमानों के लिए खानाबनाने में जुट गई…सासु माँ ने भी मदद की।। औऱ दोनो ने मिलकर जल्दी ही खाना तैयार कर लिया था।।
मोहन जी औऱ रमेश मेहमानों को लेने स्टेशन गए थे।।
वो मेहमानों को लेकर आये ।। पहले तो बहू नीता ने चाय नाश्ता करवाया।।
फिर थोड़ी देर बाद टेबल पर खाना लगा दिया।।
मेहमानों ने खाना खाया औऱ सच मे सभी ने खाने की खूब तारीफ की।।
दोस्तों कहानी कैसी लगी बताना जरूर,लाइक औऱ कमेंट्स भी करना न भूले
धन्यवाद
ममता गुप्ता