Moral Stories in Hindi : मम्मी जी जैसे हीं आशी के आने की खबर सुनी गठिया का दर्द और अपनी सारी बीमारी भूलकर लाड़ली बहु की तैयारी के लिए सबको हिदायतें देने लगी..
मैं चुपचाप अपने कमरे में आ गई… आंखें भर आई.. पंद्रह साल होने को आए मेरी शादी को… आशी को मात्र पांच साल हीं हुए हैं.. कितने दिन मैं मम्मी जी की ज्यादती बर्दाश्त करूंगी.. इस बार मैं चुप नहीं रहूंगी.. मम्मी जी से मुझे जो #शिकायत #है मुझे उनको इसका एहसास दिलाना हीं होगा.. कब तक घुटती रहूंगी.. मम्मी जी की शह पर अब आशी मेरी छोटी देवरानी भी व्यंग से मुस्कुराते हुए कुछ न कुछ बोल देती। है..
मैं सोचती मैं बड़ी हूं और आशी जयपुर से साल में एक बार हीं आती है खुशी खुशी चली जाए तो हीं अच्छा है..अगर मायके में शादी ब्याह रहा तभी जल्दी आती है…. आशी मेरे देवर वरुण की पत्नी और मम्मीजी की आदर्श और प्यारी बहु है..
दोपहर की फ्लाइट से आशी और वरुण आ रहे हैं… उनका कमरा बाथरूम सब चमचमा रहा है.. रसोई से उनके पसंद के व्यंजनों की खुशबू आ रही है.. मम्मी जी का वश चलता तो दोपहर के फ्लाइट को और पहले हीं लैंड करवा देती..
मैं दोनो बच्चों नमन और नेहा को जल्दी से खाना खिला पड़ोस में रहने वाली सहेली मीनू के यहां खेलने भेज देती हूं..
आशी वरुण आ गए हैं मम्मी जी उन्हे प्रेम से खाना खिला रही हैं और मैं किचन से गरम गरम फुल्के सेंक कर दे रही हूं… मम्मी जी कहती हैं आशी बेटा कितनी कमजोर लग रही हो खाना नही खाती ठीक से.. हां बेटा तू घर बाहर सब संभालती है.. हां मम्मी जी घर बैठे कैसे दो रोटी मिलेगी.. अनिता भाभी जैसी मेरी किस्मत कहां जो आपका पेंशन भी… ये तो सही कहा तूने आशी… इतना के बाद भी मम्मी जी आप कमजोर और दुबली लग रही हैं.. अरे बेटा मेरे पैसे से सब को मतलब है..
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बाहर घर रेंट पर लेकर रहना पड़ता तो समझ में आता, ये मम्मी जी कह रही थी.. सास बहू का ये संवाद उफ्फ..अब मेरे बर्दाश्त की सीमा खत्म हो गई.. मैं किचन से बाहर निकल फट पड़ी… आशी तुम भी सुनो और मम्मी जी आप भी सुनिए.. हां आपके घर में हम रहते हैं, आपका पेंशन भी हमारे उपर खर्च होता है.. पर आज मुझे मजबूर होकर ये सब बोलना पड़ रहा है पापाजी एक साल बेड पर रहे..
हमेशा हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ता था.. डायलिसिस के लिए सप्ताह में दो बार छः महीने तक ले जाना पड़ता था, बच्चों की परवा किए बिना मैं सात आठ घंटे हॉस्पिटल में रहती क्योंकि संजय को ऑफिस से छुट्टी नही मिलती थी.. वरुण पढ़ाई कर रहा था.. सिनेमा देखने घूमने पति पत्नी साथ जाते हैं पर पंद्रह साल की शादी शुदा जिंदगी में शायद हीं ये पल मुझे नसीब हुआ हो.. और आशी हनीमून के लिए सिंगापुर गई. आप कितना खुश हो रही थी.. कभी मायके जाना होता मुझे तो घड़ों पानी पड़ जाता आपके ऊपर.. रसोई और घर कैसे मेंटेन होगा… दो चार दिन में हीं संजय समझा कर मुझे वापस ले आते. .
आपके घुटने में रोज दर्दनाशक तेल की मालिश करती हूं.. टाइम से दवा देती हूं.सुबह उठते हीं गर्म पानी और चाय लेकर खड़ी रहती हूं, आपका बिस्तर ठीक करती हूं… जो खाने को बोलती हैं तुरंत बना के देती हूं..
और आशी जिसपर आप अपना प्यार लुटाती हैं मीठी मीठी बातें करती है दो साड़ी लाकर दे देती है और अपना कर्तव्य पूरा कर लेती है.. मेरे लिए आप तीज में जो साड़ी ला देती हैं सर माथे लगा पसंद नहीं आने पर भी पहन लेती हूं पर आशी को इतनी महंगी कांजीवरम आपने कितना हुलस कर खरीदा था पहली तीज पर पर उसने कितनी सफाई से लेने से इंकार कर पैसे हीं दे देने को कहा.. तब से आशी को पैसे हीं देती हैं.. वो साड़ी निधि दीदी (ननद) को ये कहकर दिया तेरे लिए लिया है..
क्यों मम्मी जी दूर के ढोल इतने सुहावने हो जाते हैं की हमारा सबकुछ किया धरा बेकार हो जाता है.. आप हमेशा रेंट और पेंशन का ताना देती हैं माफ कीजिएगा आपके उपर कोई खर्च नही होता..
पिछले महीने सोडियम पोटेशियम की कमी हो गई थी आपको डी हाइड्रेशन हो गया था.. बच्चों की परीक्षा थी सब छोड़ कर चार दिन हॉस्पिटल में रही आपके साथ.. आपका हाथ टूट गया था तो नहाती थी आपको मैं अपने हाथ से खाना खिलाती थी बाल बनाती थी.. कौन सी बहु और कौन सी बेटी आई थी आपकी सेवा करने…. इतने मेहमान रिश्तेदार आते हैं उनके यहां शादी ब्याह मरनी सब कुछ हमे हीं देखना होता है..पता नही संजय कब आ गए थे और अवाक थे मेरी बातें सुनकर..
मैने कहा मम्मी जी कभी सोचिएगा आपका पेंशन और रेंट लेकर भी कोई आपको करने के लिए तैयार हो तो मैं अपने बच्चों को लेकर चली जाऊंगी. शादी के पहले मैं स्कूल में पढ़ाती थी पर शादी के बाद ससुर जी की बीमारी और घर की जिम्मेदारी के कारण मुझे नौकरी छोड़नी पड़ी थी ये तो आपको याद होगा… और आशी छोटी हो सम्मान दोगी तो प्यार मिलेगा वरना तुम अपने रास्ते मैं अपने रास्ते.. मैं रोते रोते सारी शिकायतें जो मेरे दिल में मम्मीजी और आशी को लेकर थी कह दी.. मम्मी जी और आशी को ये उम्मीद नहीं थी दोनो शॉक्ड थी.. संजय जबरदस्ती मुझे पकड़ कर कमरे में ले गए.. मेरी रुलाई रुक नही रही थी.. बच्चे भी आ गए थे खेलकर.. घर में अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था.. पर मैं आज बहुत हल्का महसूस कर रही थी..
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Veena singh
साप्ताहिक विषय- शिकायत