रिश्तों का मोल  – मीनाक्षी सिंह

मेरे ससुर जी का देहांत 2017 में अचानक  ही हो गया था ! वो हष्ट – पुष्ट शरीर के स्वस्थ इंसान थे ! हम में से कोई उनके ऐसे चले जाने पर विश्वास नहीं कर पाया ! उनके दो विवाह हुए थे ! हमारी बड़ी मम्मी  कैंसर से लड़ते हुए अपने फूल से तीन बच्चों दो बेटे और एक बेटी को छोड़कर हमेशा के लिए पंचतत्व में विलीन तो गयी ! मेरे पति  सबसे छोटे  थे उस समय 5 साल के रहे होंगे !

मेरे ससुर जी सरकारी स्कूल  के प्रधानाध्यक थे ! और बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते थे ! मेरी ननद पर घर के सारे काम की ज़िम्मेदारी आ गयी ! सब लोगों के बहुत समझाने पर मेरे ससुर जी ने दूसरा विवाह किया ! हमारी छोटी  मम्मी ने भी घर अच्छे से संभाला जब तक ससुर जी थे !

उन्होने भी एक बेटी को जन्म दिया ! गलती  कहें  य़ा अपनी पत्नी पर अंधा  विश्वास हमारे  ससुर जी ने घर की सारी जमीन -जायदाद सास के नाम कर दी ! और जाते जाते किसी बच्चे से कुछ कह कर नहीं गए ! एक एक करके घर परिवार वाले ये हमें  मिल जाये बस इसमे लग गए !

ससुर जी के जाते ही जैठानी जेठ पापा की सब चीजों को अपना ही समझने लगे ! पति हमारे शांत स्वाभाव के थे ! कुछ नहीं कहते ! कहते बड़े हैं हमारा अहित नहीं करेंगे ! बड़ा भाई पिता के समान होता हैं ! मुझे  उन पर पूरा विश्वास हैं ! समय गुजरा !

इनके पास जेठ जी का फ़ोन आया कि  सोनू , मैं बड़ा वाला हार ले जा रहा हूँ ! वो मेरी शादी पर ज़ितना  बना हैं मैं ले जाऊँगा ! नीतू  (उनकी पत्नी ) के यहाँ भी यहीं नियम हैं ! जेठ के विवाह से पहले का पैसा बड़ी मम्मी के इलाज में चला गया !

पापा ने उनके विवाह पर दोनो  बहुओं के लिए सोने का सामान बनवा दिया  था कि बाद में छोटे की शादी में नहीं बनवाना पड़ेगा ! इसलिये हमारे विवाह पर जमीन  ले ली सोना नहीं बनवाया ! इन्होने कहा लेने ही आये हो भईया तो ले जाओ !

और फ़ोन रख दिया ! घर आकर बहुत परेशान हुए ! मैने पूछा क्या हुआ कुछ बताओ कहते रिश्तों से विश्वास उठ गया ! मुझे दुख इस बात का नहीं हैं की भईया ले गए ! दुख तो इस बात का है कि एक बार कह देते घर आजा कुछ बात करनी हैं !

मैं उन से छीन तो नहीं लेता हार ! और पापा ने तो कभी नहीं कहा कि  ये भाभी का हैं ! वो तुमहे भी त्योहारों पर देते थे  पहनने को ! हमारी छोटी मम्मी अपनी सगी  बेटी का खाता  भर रही हैं उनके बच्चों को पढ़ा  रही हैं पापा की पेंशन ,खेत  के पैसों और घर के किराये से !

हमसे कोई मतलब नहीं ऊंहे !उन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटे लड़े य़ा झगड़े ! कहते मम्मी भी चाहती हैं ये दोनो सगे भाई लड़े ! इसलिये जो लेना है ले जाने दो ! घर जायदाद के सब कागजाद भी अपने पास ही रखते हैं वो लोग !  कहते हैं ना-

“खून के बने सभी रिश्तों  में मैंने निस्वार्थ प्यार ढूढा कई बार,

हर इट को जोड़े सीमेंट में छुपे मिले मतलब लाखों हजार!”

समय बहुत बलवान होता हैं ! आज हम सरकारी  नौकरी में हैं ! पर इतना समझ गए हैं आज के संसार में रिश्तों का मोल सिर्फ पैसा रह गया हैं ! मेरे पति अब उनका फ़ोन आने  पर औपचारिक बात ही करते हैं  ! वो जो ले जा रहे हैं कुछ नहीं कहते ! और ईश्वर से उनकी लम्बी उमर और खुश हाली की दुआ ही मांगते हैं !!

साथियों ये कहानी हर घर की हैं शायद  ! पर जीवन छोटा सा हैं ! लडाई झगड़े से दूर रहिये ! ईश्वर  का भजन कीजिये !

दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता

दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए !

स्वरचित

मीनाक्षी सिंह

 

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