नलिनी एक बड़े बिजनेस मेन की बीवी थी।उसका एक बेटा आदित्य था। नलिनी एक साधारण परिवार से संबंध रखती थी
जिसमें उसके मां पिताजी और एक बहन गायत्री थी।नलिनी में यू तो बहुत खूबियां थी परंतु एक बुराई भी थी वो अपने दिमाग में जो सोच या बात बिठा लेती उसे लगता
की उसी की बात सही है बाकी सब झूठे और गलत है। विवाह से पहले वो छोटी छोटी बातों पर चिढ़ती थी पर समझ जाती थी परंतु जैसे जैसे उम्र बढ़ी ये चीज और परिपक्व हो गई।
इसलिए उसके औरों से संबंध भी खराब हो रहे थे।उसे सिर्फ दूसरों में कमियां या बुराई ही नजर आती थीं।उसके पति महेश भी उसे समझाते ये
व्यवहार अच्छा नहीं परंतु वो नहीं मानती थी।समय बीता बेटा बड़ा हो रहा था वो उसके दिमाग में भी उल्टी सीधी बाते डालती।कभी देवरानी से लड़ती तो कभी सास से।
उसके इसी बर्ताव के कारण महेश के भाई सुरेश ने दूसरा घर ले लिया।महेश की बहन रागिनी भी बहुत कम ही आती थीं।
जब नलिनी का मूड अच्छा होता तो आगे आगे बढ़ उनका स्वागत सत्कार करती पर उसके मन विरुद्ध कुछ हो जाए तो किसी की खैर नही फिर तो वो किसी को कुछ भी सुना देगी।
नलिनी के मायके में माता पिता गुजर गए थे और बहन गायत्री थी जो उसे समझती पर वो उससे ही उलझ बैठती।गायत्री एक मिलनसार लड़की थी
शुरू से ही उसके दोस्त सहेलियां ज्यादा थे जो कि नलिनी को पसंद ना था उसे लगता की गायत्री लोगों के सामने दिखावा करती है। ऐसे में ही नलिनी और
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गायत्री की बुआ की लड़की की शादी तय हुई सबको निमंत्रण आया।नलिनी ने तो साफ मना कर दिया क्योंकि उसे अपनी बुआ की बेटी मेघा की कुछ बाते पसंद ना थी
फिर भी गायत्री ने समझाया रिश्ते दारी में यह सब अच्छा नहीं लगता।महेश जी के कहने पर वो मानी
अब मेघा ने सबको दो दिन में ही आने के लिए कहा था सब जाने वाले थे नलिनी बोली गायत्री हम पहले तेरे घर आयेंगे फिर जाएंगे पर सभी बड़े बोले कि नहीं बेटा यहां प्रोग्राम है
सब यही आओ ।मेघा ने भी जोर दिया तो। गायत्री के पति राहुल बोले कि सही तो है हम बार बार इतनी दूर वापस थोड़ी आयेगे उसे कहो वो भी सीधी वही आए जब सब कह रहे हैं।
गायत्री ने नलिनी को फोन कर कहा कि नलिनी तुम सीधी वही आना वापसी हमारे साथ घर चलना बस यह सुन नलिनी बिंदक गई
तू तो चाहती ही नहीं थी कि मैं तेरे घर आऊ तु दूसरों के दरवाजे पे पड़ी रहती है और भी जाने क्या अनाप शनाप बोल कर उसने फोन रख दिया
और गुस्से में वो शादी में नहीं आई।गायत्री उसको कितना मनाती रही पर मजाल है कि वो टस से मस हो जाएं।गायत्री चाहती थीं कि मां बाप नहीं है
हम दो बहने है हमारे संबंध मधुर रहने चाहिए।पर नलिनी को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था।गायत्री जानती थी
कि उसकी कोई गलती नहीं है पर वो सिर्फ इसलिए माफी मांग रही थीं कि रिश्ते सुधर जाएं बहुत अथक प्रयास के बाद
नलिनी ने गायत्री को माफ किया पर नलिनी उसे बात बे बात ताने देने से बाज ना आती।
दोस्तों क्या रिश्ते बचाना सिर्फ एक ही का काम है नहीं असल में आप किसी की सोच नहीं बदल सकते अगर किसी की पिक्चर में आप विलेन हो तो आप वही रहोगे।
खैर गायत्री ने यही सोचा यदि मेरी माफी रिश्ते को टूटने से बचा सकती हैं तो माफी मांगने में या झुकने में बुराई नहीं है।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी