पत्नी धूप तो पति छांव… – भगवती सक्सेना गौड़

यूट्यूब में गाना लगाए हसीन यादों में खोए थे, सीनियर सिटीजन वर्मा साहब, बीच बीच मे गुनगुना भी रहे थे…

… बड़े रंगीन ज़माने थे, तराने ही तराने थे मगर अब पूछता है दिल, वो दिन थे या फ़साने थे फ़क़त इक याद है बाकी !!

लो आ गयी, उनकी याद वो नही आये…

आप यहां आए किसलिए, आपने बुलाया इसलिए…

आपकी आंखों में कुछ महके हुए से राज हैं …

तभी मिसेज वर्मा की आवाज़ आयी, सब गाने आज ही याद कर लेंगे, बड़ा रोमान्टिक मूड हो रहा।

तभी किचन से जोर से बर्तन ने गिर कर के भोंपे जैसा म्यूजिक बजा, और उनकी बोलती बंद हो गयी। उनकी पत्नी रामेश्वरी द्वारा चाय बनायी जा रही थी, डर गए, अब क्या होगा, लगता है किसी तरह शिकवे शिकायतों के साथ चाय तो मिलेगी, पर आज नाश्ता तो निश्चित नही मिलेगा।

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पर उनका मूड इतना आशिकाना था कि वो फिर से उसी गाने में डूब गए…

 उम्मीदों के हँसी मेले, तमन्नाओं के वो रेले निगाहों ने निगाहों से, अजब कुछ खेल से खेले हवा में ज़ुल्फ़ लहराई, नज़र पे बेखुदी छाई खुले थे दिल के दरवाज़े, मुहब्बत भी चली आई तमन्नाओं की दुनिया पर, जवानी छा गयी वो भूली … वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी ,नज़र के सामने घटा सी छा गयी ।

और तभी बिजली चमकी, और गूंजती सी आवाज आयी, वाह, चालीस वर्षों से मेरे हाथों से लजीज व्यंजन खाकर रंगीन नही हो पाए, आज भी उसी जवानी के गुलछर्रे याद करके रंगीन हो रहे।

अब वर्मा जी ने जल्दी से गाना बदला और साथ मे गुनगुनाने लगे और साथ मे इशारा भी कर रहे थे, इशारों इशारों में दिल लेने वाली, बता ये हुनर तूने सीखा कहाँ है, अरे मेरी जान कभी कभी कुछ गाने मुझे रोमांटिक यादों में घुमा लाते हैं, बुरा न मानो। अब तो दिल की रानी तुम ही हो, तुममें हज़ारों हुनर है। घर सम्हालना, मजेदार परांठे बनाना, मस्त तरीदार सब्ज़ी बनाना, वो कॉलेज वाली सिर्फ नैनो से इशारे ही करती थी, पर क्या करूँ,  कुछ पुराने गानों में उंसकी शक्ल दिख ही जाती है।

चलो आज तुम्हारे लिए एक गाना गाता हूँ…सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था, आज भी है, और कल, परसो, नरसों, सब दिन रहेगा।

और चार आंखे मिलकर आज भी शर्माने लगी।

#कभी_धूप_कभी_छाँव 

स्वरचित

भगवती सक्सेना गौड़

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