सुनो ,अंदर आ जाओ ,बाद में डाल देना कपड़े बालकनी में ! विमला खड़ी हैँ बाहर !
क्यूँ इसमें क्या हुआ ,क्या मैं अपने घर के कपड़े नहीं सुखाने को डाल सकता ! रोहित अपनी पत्नी पारूल से बोला !
तुम्हे नहीं पता ये सब औरतें शाम को पंचायत करती हैँ बैठकर कि पारूल का पति तो नौकरों की तरह काम करता हैँ अपने घर के ! मैडम तो नौकरी वाली हैँ ,हुक्म देती होंगी पति को तभी तो औरतों वाले काम भी करता हैँ ,वरना क्या कोई आदमी घर के काम करेगा ! हमारे तो एक ग्लास पानी भी उठाकर नहीं पी सकते ! उनकी शान चली जायेगी ,वैसे भी आदमी को घर का काम करना क्या शोभा देता हैँ ,हमें खुद ना अच्छा लगे पति काम करें तो ! ये बातें करते हैँ ये सब !
तुम्हे किसने बोला कि ये सब औरतें ऐसी बातें करती हैँ ?? तुम तो कभी खड़ी नहीं होती इनकी पंचायत के बीच !
मैने सुना हैँ कई बार आते ज़ाते ! कल मैं शाम को दूध लेकर आ रही थी तभी मिसेज वर्मा बोली – पारूल आ थोड़ी देर हमारे साथ भी खड़ी हो जा ,,मैं रुक गयी तभी बिट्टू ने आवाज लगायी कि विन्नी को पोटी जाना हैँ मम्मा ,आओ ना ! मैं आ ही रही थी कि विमला बोली रहने दे पारूल भाई साहब हैँ ना ! कर देंगे साफ विन्नु को ! सब औरतें हंसने लगी ! मुझे बहुत बुरा लगा रोहित ,मैं तुरंत आ गयी !
अच्छा तो यहीं रुको तुम ,अभी देखो ! रोहित ने कपड़े डालते हुए विमला जी को नमस्ते किया फिर बोला – भाभी जी ,भाई साहब क्या कर रहे हैं ??
जी वो तो टीवी देख रहे हैँ !
इस कहानी को भी पढ़ें:
दिन में तारे नजर आना – डाॅक्टर संजु झा : Moral Stories in Hindi
भाभी जी भाई साहब को थोड़ा ढंग से खाना दिया कीजिये – कल तो इनकी सब्जी खराब हो गयी थी ,मैने दी तो पेट तो भी भर गया उनका ! रात की ही दे देती हैँ क्या ?? ना सलाद ना रायता ,ना कोई फल ! 10 घंटे की नौकरी होती हैँ ! आदमी ठीक से खायेगा नहीं तो कैसे चलेगा ! ना तो प्रेस कपड़े पहनते हैँ बेचारे ! आप तो नौकरी वाली भी नहीं हैँ फिर भी ठीक से ध्यान क्यूँ नहीं रखती !
विमला जी पहली बार रोहित के मुंह से ऐसी बातें सुन सकपका गयी ! बात बनाते हुए बोली – वो मेरी तबियत ठीक नहीं रहती ,सुबह बच्चें भी स्कूल ज़ाते हैँ ,इनका भी ऑफिस होता हैँ ,वैन वाला भी इतनी जल्दी आता है ,सब काम जल्दी जल्दी करने पड़ते हैँ इसलिए कभी कभी ऐसा हो ज़ाता हैँ ! तब तक अन्दर से विमला के पतिदेव भी आ गए ,बोले – तुम्हारी तबियत कब खराब हुई ,80 किलो की हो रही हो ,पंचायत का टाइम मिल ज़ाता हैँ ,घर के कामों के लिए नहीं मिलता !
रोहित – गलत बात भाई साहब ,पति पत्नी एक गाड़ी के दो पहिये होते हैँ ,अगर एक ही पहिया घिसता रहेगा तो दूसरा कैसे चलेगा इसलिये अगर पत्नी ही काम में लगी रहेगी तो वो बिमार पड़ेगी तो झेलना भी तो हमें ही हैँ ! आप भी सुबह भाभी जी के साथ उठ जाया कीजिये ! मेरी तरह साथ में काम करवा लिया कीजिये ! आप सब्जी काट दिया कीजिये उतनी देर में भाभी जी बच्चों को उठा देंगी ! आप बच्चों को नहला दिया कीजिये ,भाभी जी अच्छे से लंच पैक कर देंगी ! भाभी जी कपड़े धोये तो आप सुखा दिया करो ! आप खुद भी तो शाम को फ़ोन देखने के बजाय अपने कपड़े प्रेस कर सकते हैँ ! हर काम एक ही आदमी करेगा तो थोड़ा अव्यवस्था तो होगी ही ! दो ही हाथ हैँ भाभी जी के ! ऐसी सोच कि मर्द घर के काम नहीं कर सकते ,ने ही ज्यादातर घरों में कलेश पैदा की हैँ ! माफ कीजियेगा कुछ गलत कहा हो तो ! मैं तो अपनी बीवी से बहुत प्यार करता हूँ ,उसकी तकलीफ समझता हूँ !मुझे लोगों की बातों की कोई परवाह नहीं ! मेरे घर से औरों के घर की तरह लड़ाई की आवाज नहीं आती क्यूंकि मैं और पारूल एक दूसरे को समझते हैँ ! विमला के पति बोले – बोल तो ठीक रहा है तू रोहित ,विमला मैं बच्चों का होम वर्क कराता हूँ ,तुम शाम की तैयारी कर लो तुम्हे अपने घर जाना हैँ ना पापा को देखने ! विमला भी बोली – ठीक हैँ जी आज से मैं पंचायत करने नहीं जाऊंगी उस समय घर के और काम निपटा लिया करूँगी !
पारूल रोहित सभी लोग विमला जी की बात पर अपनी हंसी ना रोक सकें !
मीनाक्षी सिंह की कलम से
आगरा