पल में तोला पल में माशा, – सुषमा यादव

 

मैंने गुस्साते हुए बेटी रीना से कहा,,अभी तुरंत अपने फैमिली ग्रुप से अपना मैसेज डिलीट करो,

कितनी बार मना किया, समझाया तुम्हें,कि अपने घर की बातें, अपने झगड़े अपने तक ही सीमित रखो,पर तुम्हें तो मेरी बात मानना ही नहीं,, तुम क्यों नहीं समझती हो कि तुम्हारा कोई साथ नहीं देगा,, वो उनका बेटा है, नानी का नाती है,बहन का भाई है,, वो सब उसकी तरफ बोलेंगे,, तुम अकेली पड़ जाओगी,,

बेटी रीना ने कहा,, अरे मम्मी, उसे डराने के लिए लिखा है,, क्या करूं, जब तक दो चार बातें सुना ना दूं, डर ना दिखाऊं,सुनता ही नहीं,,

मैंने पूछा,अब क्या हुआ??? 

रीना बोली,, मैं इसे रोज कहती हूं कि बच्ची,ईवा को स्कूल छोड़ने के लिए,पर ये मेरी बात को हवा में उड़ा देता है,, तो मैंने गुस्से में मैसेज डाल दिया,,,

 

मेरी छोटी बेटी ने वीडियो कालिंग किया, मुझे देख कर बोली, मम्मी, बहुत टेंशन में लग रही हो,,

मैंने कहा, अरे बेटा, एक तो मैं वैसे ही परेशान हूं, और ऊपर से तुम्हारी बहन कैसे मैसेज डालती है,,, वो तुम्हारे जीजाजी को तलाक दे रही है,लिख रही है कि वकील को सब पेपर भेज चुकी है, पुलिस से शिकायत कर दूंगी,,अब ये सब पढ़ कर तो सभी का दिमाग खराब हो गया होगा,, और मैं तो हमेशा की तरह उसके भविष्य की कल्पना करके ना जाने क्या क्या सोच रहीं हूं,, मन बहुत घबरा रहा है।।।

 



सुनकर बेटी हंसने लगी, मैंने कहा,, ये सब सुनकर तुम्हें हंसी आ रही है,, कैसी बहन हो तुम,, आखिर तलाक़ हो जायेगा तो तीन साल की बच्ची पर क्या असर होगा,,

वो हंसते हुए बोली,, मेरी बात तो सुनो मम्मी,, हमारे ग्रुप में दीदी और जीजा जी की चैटिंग सुनो।

,, जीजा जी,,___ प्लीज़, रीना, मैसेज डिलीट कर दो,,, नहीं करूंगी,, तुम्हारे परिवार वाले भी देखें कि मेरी इस नाजुक हालत में भी तुम मेरी मदद नहीं करते हो, बच्ची को स्कूल नहीं ले जाते,,

जीजा जी,,,,, अब मैं रोज ईवा को स्कूल छोड़ने जाऊंगा,देखो, मैं आया हूं ना,, आज़ म्यूजिक स्कूल लाया हूं,,पर प्लीज़, तुम मैसेज डिलीट कर दो, पुलिस और वकील से कुछ नहीं कहोगी,,

रीना बार बार समझाने पर भी गुस्सा थी और खरी खोटी सुना रही थी,,

फिर जीजाजी ने लिखा,, मैं यहां मार्केट में आ गया हूं यहां सुबह सुबह बहुत ही ताजे ताज़े फल मिल रहें हैं,,ले आऊं क्या,, कौन कौन से फल ले आऊं, बता दो,

दीदी का सारा गुस्सा एक पल में छूमंतर हो गया और चहकते हुए बोली, हां, हां,ले आओ, और तमाम फलों की गिनती और मात्रा

बता डाली,, और बोली, मैं जल्दी से तैयार हो जाती हूं, आज़ बाहर घूमने चलते हैं।।

 



मैंने अपना सिर पीट लिया,, बेवकूफ लड़की,सारे दिन से मैसेज पढ़ कर मुझे इतना दुःख लगा, इतना टेंशन में आ गई, अभी तो तलाक़ हो रहा था, वकील, पुलिस आ रही थी और एक पल में सब ख़त्म,, जाने कैसी लड़की है,,

छोटी बेटी बोली, अरे मम्मी, कितनी बार आप को समझाया इनके झगड़ा लड़ाई को आप गंभीरता से मत लिया करें,पर आप हैं कि बस घबरा जाती हैं,,

मैंने भी हंसते हुए कहा,,

ये लोग भी ना,,पल में तोला पल में माशा,,

पर चलो, ऐसे ही आपस में उलझते सुलझते इनकी खुशनुमा जिंदगी गुजरती रहे।।

 

शाम को ग्रुप वीडियो कालिंग में

मैंने देखा कि बेटी दामाद नातिन तीनों यानी बाप महतारी और बिटिया मार्केट से लाये हुए समोसा और लड्डू ठूंस ठूंसकर खाये पड़े हैं,, यहां मेरी जान पर आन पड़ी थी,, वो सब मिठाई झाड़ रहे थे।

रीना बोली,, मम्मी, आज़ सारा दिन बहुत काम किया,, मैंने भी व्यंग्य से कहा,,, हां हां बिल्कुल,, वकील को बुलाया होगा,तलाक के पेपर्स तैयार करवाये होंगे। पुलिस को सूचना दी होगी, आखिर तलाक़ लेना कोई मामूली बात तो नहीं है ना,

, पर तुम्हारे यहां तो ये सब नहीं मिलता है तो फिर,,,, नहीं मम्मी,अब यहां भी इंडिया मार्केट आ गया है।सब मिलने लगा है।

अरे मम्मी, आप भी ना,, मेरी बहुत खिंचाई करतीं हैं,,

नातिन ईवा एक हाथ में समोसा और एक हाथ में लड्डू दिखाते हुए बोली,,,तुतमा मम्मी,,,लादू,,

मैंने भी हंसते हुए कहा,, मम्मी के तलाक की खुशी में खाओ।।

 

सुषमा यादव प्रतापगढ़ उ प्र

स्वरचित मौलिक

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