एक बार टूटा विश्वास वापस नहीं जुडता – विनीता सिंह

शाम का समय है सरला जी बालकनी में बैठी है डूबते हुए सूरज को देख रही है तभी उनकी बेटी निशा  बोलती है मां चाय पी लो सरला ने कहा बेटा ही रख दो अभी पी लूंगी बेटी चाय टेबल पर रख कर चली गई। सरला जी डूबते हुए सूरज को देख रही थी और … Read more

असमर्थ से समर्थ तक – सुनीता माथुर

किशनपुर गांव में एक बहुत ईमानदार और संस्कारी अध्यापक रहता था और उसी गांव के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को शिक्षा देता था!——- स्कूल के बाद अपनी खेती-बाड़ी पर भी ध्यान देता था और अपनी खेती बाड़ी में खूब मेहनत भी करता था उसकी पत्नी माया देवी भी गोपाल के साथ खेती-बाड़ी में मेहनत … Read more

असमर्थ तन से हूं, मन से नहीं – निशा जैन

“माफ कीजिए भाई साहब मै दहेज देने में असमर्थ हूं । मैने बेटी को पढ़ाया लिखाया , अच्छे संस्कार दिए बस ये ही मेरी धन दौलत है। ये मेरी गारंटी है कि बेटी आपके घर परिवार का पूरे तन मन धन से ध्यान रखेगी। कभी कोई ऐसा काम नहीं करेगी जिससे आपकी इज्जत पर कोई … Read more

असमर्थ – सीमा गुप्ता

सुबह के सूरज की पहली किरण छतों पर उतरी थी। पूरे मोहल्ले के घर-घर में आज हलचल थी! सरगी का आनंद लेकर महिलाएं घरों से बाहर निकल आई थी और एक-दूसरे को अपनी-अपनी मेहंदी दिखा कर उल्लासित हो रही थीं। सच में करवाचौथ का त्योहार महिलाओं को असीम ऊर्जा से भर देता है। जैसे ही … Read more

बहू बनी सास की हिम्मत…. – अमिता कुचया

चंचल शादी होकर आई तो देखा कि कुंती उसकी सास हमेशा बेड पर ही रहती है। उनका उसको बेड पर रहना काफी खलता था। उसने सबसे सुन रखा था, सास कुंती बहुत एक्टिव रहती थी। वह कभी खाली नहीं बैठती थी, पर उनके गिरने की वजह से कमर में दर्द रहने लगा। ऐसी परिस्थिति में … Read more

एक बार टूट भरोसा फिर नहीं जुड़ता – हेमलता गुप्ता

मम्मी जी.. यह शादी में चढ़े हुए कुछ गहने हैं तो इन्हें आप ही रख लीजिए, छोटी-छोटी चीज मैं अपने पास रख लेती हूं बाकी झुमकी, गले का सेट और कंगन आप रख लीजिए, मुझे तो गहने संभाले नहीं जाते! गरिमा की बात सुनकर सासू मां विद्या देवी ने कहा …ठीक है बहू जैसा तुझे … Read more

माँ असमर्थ है – गीता वाधवानी

 लगभग 60 वर्षीय एक आदमी ने गुरुद्वारे के लंगर में बैठी औरतों को फुल्का देते हुए कहा, ” सतनाम वाहेगुरु बीबीजी ( यानी दीदी जी )। रोटी लेते हुए वहां बैठी सपना की आंखों में आंसू आ गए और भरे गले से बोली सतनाम वाहेगुरु जी।       लंगर छकने के बाद जब सपना वहां से उठकर … Read more

खुन के रिश्तों से मन के रिश्ते बेहतर हैं !! – स्वाती जैंन

यह भाभी का बेटा भी ना , जब भी हाथ में लो कभी सु- सु कर देता हैं तो कभी पोटी , बड़ा बदतमीज बच्चा हैं बोलकर रीतु अपने कपड़े साफ करने लगी !! यह तो अपनी मां को जरा भी तंग नहीं करता रीतु , तुझे पता हैं जब तू छोटी थी तो तूने … Read more

नसीहत – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू

जैसे जैसे शाम ढल रही थी रमेश की तेवरी चढ़ती जा रही थी,चढ़े भी क्यों ना अभी तक अपने ही मन मुताबिक तो सब कुछ कराते  आये है फिर भला कैसे बदल सकते है खुद को वे सोचते हैं सब कुछ पहले जैसा ही होगा, शायद वो ये भूल गये कि वक्त बदल गया तब … Read more

और वह नहीं गई – शिव कुमारी शुक्ला 

रोज की भांति झुमकू भी अपना उदास चेहरा लिए घड़ा उठा पनघट की ओर चल दी। ठंड के दिन थे। सूर्य अपनी प्रखर किरणों के साथ आसमान में कुछ ऊपर चढ़ आया था किन्तु सर्दी के कारण उसकी निस्तेज किरणें आंगन में बिखर गईं थीं। हवा की ठंडी लहरें कलेजे को चीर रहीं थीं। ग्रामीण … Read more

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