कीचड़ उछालना – लक्ष्मी त्यागी

“बचपन में, हमारे बड़े कहा करते थे —“किसी पर कीचड़ उछालोगे, तो उसके छींटे अपने ऊपर भी पड़ेंगे।” किन्तु कुछ लोग भ्र्म में जीते हैं ,जैसे वो सही हैं ,और हमेशा ही ऐसे रहने वाले हैं किन्तु उन्हें सच्चाई का एहसास तब होता है जब उन पर स्वयं उस कीचड़ के छींटे पड़ते हैं।  चारु … Read more

इंसानियत मर गई – शिव कुमारी शुक्ला 

आज निलेश के घर के सामने भीड़ इकट्ठी थी।घर के अंदर कोहराम मचा हुआ था।उसका दो वर्षीय पुत्र मामूली खांसी में ही चल बसा था। उसकी मां का क्रंदन लोगों के कलेजे को चीर रहा था। बाहर लोगों में कानाफूसी का माहौल गर्म था कि ऐसा कैसे हो सकता है कि खांसी की दवा देने … Read more

असहाय – लतिका पल्लवी

आज पूनम अपने आप को एकदम असहाय महसूस कर रही थी।यह जानते हुए भी कि उसके पति का फिल्ड वर्क जॉब है उसने अपने दम पर कोई काम करना नहीं सीखा था। उसका पति विभव समझाता भी था पर वह नहीं समझती थी। पर आज ऐसी परिस्थिति मे पड़ गईं थी तो उसे विभव की … Read more

लक्ष्य पर नजर – विमला गुगलानी

  चेतराम और मनसा राम दो भाई एक ही घर में पले बढ़े। तीन बहनें भी थी। समय के साथ सबके अपने परिवार हो गए। गांव में अपना घर और जमीन थी। मां बाप के मरने के बाद बंटवारा हो गया। आज भी बहुत कम बेटियां पिता की जायदाद में हिस्सा मांगती है, लेकिन समाज में … Read more

निरादर – विनीता सिंह

सुबह का समय था, सूरज की किरणें चारों दिशाओं में फैल रही थी ।रेखा अपने कमरे में बडे बेमन से, एक सरल सी साड़ी पहनकर तैयार हुई। मां ने कहा बेटी तुम्हारा लंच रख दिया, इसे अपने पर्स में रख लो ।रेखा ने कहा ठीक है मां मैं जाती हूं मां बोली बेटा नाश्ता तो … Read more

कीचड़ उछालना – हेमलता गुप्ता

तुम्हें नहीं लगता  चारु… आजकल शालिनी कुछ ज्यादा ही हवा में उड़ रही है, सर भी जब देखो उसी को आवाज लगाते रहते हैं  ऐसा लगता है हम तो यहां काम करते ही नहीं है! तुम्हें तो आए हुए अभी 6 महीने हुए हैं किंतु मैं और शालिनी दोनों एक साथ इस ऑफिस में लगे … Read more

निरादर – मधु वशिष्ठ

इलेक्ट्रिक तंदूर में बनी हुई अपनी पसंद की भिंडी, रोस्टेड बैंगन, कम घी का इस्तेमाल करके भी कितने स्वाद लग रहे थे। नए फ्रिज में जमाई हुई आइसक्रीम, 4 बर्नर वाला चूल्हा, नए सामान से सजा हुआ पूरा घर और मुस्कुराती सी प्रिया,जब तक प्रिया उनके साथ रही, शायद ही कभी उसके चेहरे पर ऐसी … Read more

कीचड़ उछालना – डॉ बीना कुण्डलिया 

मालती को ससुराल आये दो माह भी नहीं हुए, वो ननद गोमती की किच किच से परेशान हो गई थी। गोमती मुंहफट चालाक, बदचलन, उसकी हमउम्र भाभी मालती जो उसकी आँखों में सदा खटकती रहती। क्योंकि जब से वो घर में आई गोमती की आजादी जैसे छीन सी गई। उनकी दो आँखें सदा गोमती को … Read more

कीचड़ उछालना – खुशी

नमिता एक पढ़ी लिखी लड़की थी जो बैंक में नौकरी करतीं थी।उसकी शादी राघव से हुई जो बैंक में मैनेजर था दोनो का प्यार वही परवान चढ़ा और  नमिता के माता पिता का एक्सीडेंट में निधन हो जाने के कारण सिर्फ उसकी एक मौसी ही थी उनकी रजामंदी से राघव के माता पिता मोहन और … Read more

दृष्टांत –  मधुलता  पारे

     सात बजे से नीरजा आरती का रास्ता देख रही थी अब रात के नौ बजने को आ रहे थे अभी तक उसका कोई  पता नहीं था दो बार  उसका फोन भी ट्राई  कर चुकी थी वह भी बंद  आ रहा था।  घर में इस समय    नीरजा के अतिरिक्त  उसकी उम्रदराज  सास थीं  जिनका अशक्त … Read more

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