समय सबका आता है – उषा भारद्वाज

      पूरा हाल लोगों से भरा हुआ था। सबकी नज़रें मुख्य अतिथि यानी आई•ए•एस• सविता सिंह के आने की प्रतीक्षा में लगी थी। आर्ट गैलरी के उद्घाटन के लिए उनको बुलाया गया था। तभी कुछ लोग दौड़ते हुए गेट के पास पहुंचे। एक कार वहां आकर रुकी उससे बाहर प्रभावशाली व्यक्तित्व की मालकिन सविता सिंह उत्तरी। … Read more

रिश्तों का गणित – सरोज माहेश्वरी 

         रोज़ाना की तरह रवि ने अपने ऑफिस में प्रवेश किया और अपने सभी सहकर्मियों से हाय हैलो करता हुआ अपनी टेबल तक आ गया। आज उसके सहकर्मी अजय का जो कि उसका मित्र भी है, चेहरा थोड़ा सा मुरझाया हुआ था जबकि हमेशा दिलकश मुस्कान के साथ खिला रहता है।वह उसकी उदासी का कारण समझ … Read more

इंसानियत – खुशी

गीता जी एक सीधी साधी महिला थी उनके पति थे गोपाल।गीता जी बीटेक थी और उन्हें कंप्यूटर की बहुत अच्छी नॉलेज थी ।शादी से पहले वो नौकरी करती थी परंतु शादी के बाद गोपाल को घर में रहने वाली बीवी चाहिए थी जो घर का मां पिताजी का ध्यान रखें सब काम टाइम पर हो … Read more

असमर्थ नहीं हूं मैं – मंजू ओमर 

रुक्मणि जी, रूक्मिणी जी, हां कहां खोई हुई हो आप कब से आवाज दे रही हूं सुन ही नहीं रही है। हां बेटा वो बस ऐसे ही ,बोलो क्या बात है,वो गोविंद आया है नये स्वेटरों का आर्डर देने और पिछले पैसे देने आफिस में बैठा है । अच्छा अच्छा आ रही हूं मैं, इतना … Read more

अपनो से गैर भले – के आर अमित

दो साल बाद जब भी छुट्टी आता तो उसकी भाभी उसे जाने से हफ्ता दस दिन पहले कोई न कोई लड़की शादी के लिए दिखा देती और कहती कि अब रिश्ता हो गया है जब अगली बार आओगे तो धूमधाम से शादी करवा देंगे। चन्द्र खुश हो जाता और बापिस विदेश चला जाता मगर हर … Read more

आश्रिता – शुभ्रा बैनर्जी 

“देखिए ना,हमारे ऊपर तो इतनी बड़ी जिम्मेदारी है,कहीं भी आना-जाना नहीं कर सकते हम।आप लोगों की तरह मैं स्वतंत्र तो हूं नहीं।मंहगाई है कि बढ़ती जा रही है,और खर्च है कि कम होते ही नहीं।बुढ़ापे में बीमारी भी बिन बुलाए मेहमान की तरह आ जाती है।मैं तो आप लोगों के साथ ट्रिप पर नहीं जा … Read more

जिंदगी की परीक्षा – अंजना ठाकुर

नेहा अपनी गृहस्थी मैं बहुत खुश थी ससुराल मै सब उसका बहुत ध्यान रखते और किसी चीज की कोई कमी नहीं थी नेहा का पति राकेश एक बड़ी कंपनी मैं मैनेजर था नेहा भी शादी के पहले नौकरी करती थी पर शादी के बाद उसका खुद का मन नहीं हुआ वो अपनी जिंदगी सुकून से … Read more

मैं असहाय नहीं हूं.. – आराधना श्रीवास्तव

चटाक की आवाज के साथ कान सुन्न हो गए, रवीना अपलक सिद्धार्थ को देखती रह गई थोड़ी देर तक उनकी उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था सिद्धार्थ ने आखिर तमाचा क्यों मारा।  वह तो सिद्धार्थ के इशारे की कठपुतली है जब चाहा जैसा चाहा वैसा घुमाया आज तक केवल उसकी जरूरत के बारे … Read more

दर्शन, माँ  वैष्णों देवी – एम. पी. सिंह 

कहते है कि जब तक बुलावा नहीं आता, माता के दर्शन नहीं होते. मुझे इस पर पूरा विश्वास नहीं था, ऐसा नहीं कि मैं नास्तिक हूँ, पर भक्त भी नहीं था, बस सब भगवान को मानता हूँ. फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि मुझे विश्वास हो गया कि बुलावा आता है. मैं विस्तार से … Read more

इंसानियत – बीना शुक्ला अवस्थी

अक्सर कहा जाता है कि दुनिया बहुत खराब है, हर कदम पर धोखा देने वाले मिलते हैं। इसलिये किसी पर विश्वास नहीं करना चाहिये लेकिन इंसानियत अब भी जिन्दा है और जब हमें कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाता है तो हम मानने पर विवश हो जाते हैं कि वह व्यक्ति हमारे लिये भगवान बनकर आया … Read more

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