रिश्ते और पैसा – खुशी

शालिनी जी एक सुलझी हुई महिला थी और उनके पति किशन जी भी सीधे साधे थे जिन्हें अपने परिवार और दुकान से ही लेना देना था हफ्ते के 6 दिन पर मंगलवार उनकी मार्केट बंद होतीं तो वो अपने दोस्तों को टाइम देते । परिवार में तीन बच्चे थे श्रुति , श्रवण और गगन ।तीनों … Read more

कुल कलंकिनी – अरुणा गर्ग

प्रिया मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता प्लीज़ अपने पापा से बात करो ना कि वे तुम्हारी शादी अभी न करें”  रोमिल उससे मिन्नतें करने लगा। “नहीं रोमिल मैं नहीं कह सकती, तुम मेरी मजबूरी समझो। मैं भी तुम्हें चाहती हूं पर पापा ने शादी की डेट राघव से तय कर दी है।कार्ड छप चुके … Read more

खुशी के आँसू

रिश्तेदारों ने खूब ताने दिए कि “दीनानाथ ने अपनी बेटियों को सिर पर चढ़ा रखा है।” लेकिन बापू टस से मस नहीं हुए। समय का पहिया घूमता रहा। दीदी ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली और सिविल सर्विसेज़ की तैयारी शुरू कर दी। मैं भी कॉलेज पहुँच चुकी थी। लेकिन ज़िंदगी कभी भी एक सी … Read more

निस्वार्थ प्रेम

शहर के एक पुराने और शांत मोहल्ले में मास्टर शिवनारायण जी का मकान किसी समय अपनी रौनक के लिए जाना जाता था। मास्टर जी इलाके के सबसे सख्त और उसूलों वाले व्यक्ति माने जाते थे। उनका एक ही नियम था—जो उन्होंने कह दिया, वही पत्थर की लकीर है। इसी झूठे गुरूर के चलते आज से … Read more

 अनमोल खज़ाना

“राघव, पिछले कुछ दिनों से मेरी कमर और पैरों में बहुत तेज़ दर्द रहता है। सुबह उठते ही चक्कर भी आते हैं,” नीता ने आटा गूंथते हुए बहुत ही धीमी और थकी हुई आवाज़ में अपने पति से कहा। राघव, जो आईने के सामने खड़े होकर अपनी टाई की गांठ ठीक कर रहा था, बिना … Read more

एक नया सवेरा

“मां जी, मेरी अपने घर पर तफ्सील से बात हो गई है। मेरे बाबूजी और परिवार वाले इस रिश्ते के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्हें कोई भी आपत्ति नहीं है। बस अब आप किसी तरह काव्या को समझा लीजिए…” अभिनव ने बहुत ही संकोच लेकिन एक गहरे विश्वास के साथ सुभद्रा जी से … Read more

डर – बालेश्वर गुप्ता

      पापा- पापा, अगले शुक्रवार को सुबह सुबह हम सब कश्मीर घूमने के लिए चल रहे हैं,आप वहां के हिसाब से कपड़े रख लेना।मैने वहां सब व्यवस्था कर दी है,यहां से फ्लाइट से श्रीनगर वहां कार बुक कर दी है,होटल बुक हो गये है।       एक सांस में मुन्ना ने बड़े ही उत्साहित रूप में सब कुछ … Read more

बेइंतहा दर्द – मंजू ओमर

मां आपका सूटकेस तैयार है और आपने अपनी दवाइयां रख ली, लेकिन बेटा हम जा कहां रहे हैं, इतना सामान की क्या जरूरत थी हम तो मंदिर में दर्शन करने को जा रहे थे ना, आज वह तेरे पिताजी की वरसी थी तो मैंने सोचा मंदिर में दर्शन कर ले और वहां गरीबों को कुछ … Read more

दो लिफाफे – लतिका श्रीवास्तव 

हॉस्पिटल से घर लौटने के बाद बड़े बेटे संजीव ने पिता श्रीकांत के हाथ में एक मोटा लिफाफा रख दिया। “पापा, इसमें पचास हजार रुपये हैं। आगे दवाइयों और ज़रूरतों में काम आएँगे।” उसी समय छोटे बेटे आशीष ने भी एक छोटा-सा लिफाफा पिता की ओर बढ़ाया। श्रीकांत दोनों लिफाफों को देर तक देखते रहे। … Read more

गलती या महापाप – रिंकी अग्रवाल ‘प्राची’

अम्मा मुझसे अब नहीं चला जाता हांडा लेकर। बारातों में बहुत-बहुत दूर चलना पड़ता है। नाचने गाने में ही लगे रहते हैं रिश्तेदार। आगे ही नहीं बढ़ने देते। पांचवा महीना चल रहा है मेरा। इतना तेज संगीत और कानफोडू डीजे। मुझे तो डर लगता है कही बच्चों को कुछ नुकसान ना हो जाए। गर्भवती पिंकी … Read more

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