अपनों का दिया दंश – शिव कुमारी शुक्ला 

निशी बेटा कब आ रही हो फोन उठाते ही बुआ की आवाज सुनाई दी। बस बुआ जितनी जल्दी हो सके निकलने की कोशिश करती हूं। हां बेटा जल्दी आ जा भाई की शादी में आकर थोड़ा हाथ बंटा शापिंग भी करनी है। हां बुआ आती हूं। हां सब आना समीर को भी साथ ले आना। … Read more

मैं माफ़ी नहीं मांगूंगी – लक्ष्मी त्यागी

तुम्हें बस एक बार माफ़ी मांगनी है, रागिनी !इसमें इतना मुश्किल क्या है?” — माँ की आवाज़ अब भी उसके कानों में गूंज रही थी। किन्तु रागिनी जानती थी, यह ‘माफ़ी ’ सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि उसकी इज़्ज़त की कब्र  होगी। रागिनी एक तेज़, आत्मसम्मान वाली लड़की है। कॉलेज में उसकी पहचान उसकी ईमानदारी … Read more

अपनत्व की छांव – सुदर्शन सचदेवा 

 ज़रा सुनो ! अवनि एक कप चाय बना दो न, बस वैसे ही जैसे तुम अपने लिए बनाती हो। ये आवाज़ थी सावित्री देवी की — घर की बड़ी और समझदार सास की। रसोई में नन्हे-नन्हे कदमों से भागती बहू “अवनि” ने जवाब दिया — “जी माँ, बस दो मिनट में।” उसके स्वर में घबराहट … Read more

क्या सारी जिम्मेदारी बहुओं की ही है – मंजू ओमर

वेदिका बहू तुमने सारी तैयारी सही से कर ली है न, कोई चीज रह तो नहीं गई है। हां मम्मी  जी , हां बेटा ध्यान रखना देखो ननद की गोद भराई की रस्म है सबकुछ ठीक से होना चाहिए।ये जिम्मेदारी तो घर की बहू की ही होती है ये ध्यान रखना। क्या वेदिका तुम अभी … Read more

अपनत्व की छांव – अमिता कुचया

रीतू अपनी सास कमला जी से कहती है -मां जी अब आप कामवाली लगा लो। तो चौंकते हुए वो  बहू रीतू से बोली- क्या….ये क्या बोल रही है, और क्यों बोल रही है!! तुझे तो पता ही है कि कामवाली रखना तेरे बाऊजी को बिलकुल पसंद ना है।  ये सुनकर रीतू कहने लगी ,मम्मी जी … Read more

अपनत्व की छांव – के आर अमित 

बरसात के छोटी-छोटी फुहार सूरज की किरणों के साथ मिलकर आँगन में रेशमी धागों जैसे चमक रही थी। गाँव  हरिपुर के लगभग हर घर में आज भी वही पुराने मिट्टी के आँगन नीम के पेड़ और कच्ची दीवारों पर गोबर की लिपाई में मौसम की महक दिखाई देती थी। उसी गाँव के एक किनारे पर … Read more

मेरा साहिल – बालेश्वर गुप्ता

   देखो साहिल,मैंने तुम्हें अलग से इसलिये बुलाया है, क्लास में तुम्हे मेरा कहा अपमान लगता।मैं समझता हूं कि तुम डिलीवर कर सकते हो,पर तुम बिल्कुल ही लापरवाह होते जा रहे हो।होम वर्क तक पूरा नही होता तुम्हारा।       नीची नजर किये साहिल इतना ही बोला, सर मैं कोशिश करूंगा।       साहिल तुम्हारा हाई स्कूल है, तुम प्रथम … Read more

मैं तो पराए घर से आई हुं ! – स्वाती जैंन

मम्मी जी , आप ही करिए अपनी बेटी के बेटे का काम , मुझसे कोई उम्मीद मत रखिए , आखिर इसकी नानी आप हैं , फिर क्यूं कब से चिल्ला रही हैं कि शिविन के लिए टिफिन बना दो , शिविन आपका नातिन हैं तो आप ही टिफिन बना लिजिए उसका झल्ला कर बोली राखी … Read more

अपनत्व की छांव – उमा वर्मा

आज वह खत्म हो गई ।कृष्णा ही नाम था उसका ।साँवली सलोनी ।देखने में ठीक ठाक ।एक ही बहन दो भाई ।बड़े भाई की शादी हो चुकी थी ।छोटे की शादी होनी तय हुई ।कृष्णा के माता-पिता ने शर्त रख दिया कि आप भी अपना बेटा देंगे तभी बात बन सकती है ।बात बन गई … Read more

पूजाघर मे कैसा भेदभाव – संगीता अग्रवाल 

“रसोईघर मेरे लिए पूजाघर के समान है बहू इसलिए ध्यान रखना कभी यहां बिना नहाए मत घुसना क्योंकि यहां खाना नहीं प्रसाद बनता है !” दिव्या की शादी के बाद की पहली रसोई पर ही उसकी सास सीता देवी ने उससे कहा। ” जी मांजी मैं ध्यान रखूंगी इस बात का और आपको शिकायत का … Read more

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