अपनों का दिया दंश – शिव कुमारी शुक्ला
निशी बेटा कब आ रही हो फोन उठाते ही बुआ की आवाज सुनाई दी। बस बुआ जितनी जल्दी हो सके निकलने की कोशिश करती हूं। हां बेटा जल्दी आ जा भाई की शादी में आकर थोड़ा हाथ बंटा शापिंग भी करनी है। हां बुआ आती हूं। हां सब आना समीर को भी साथ ले आना। … Read more