कलह – आराधना श्रीवास्तव

रक्षिता की निगाह घड़ी पर गई,  पूरे 10 बज चुके थे ।  वह अपनी मेंज से फाइल समेट जाने के लिए उठी तभी ओबेरॉय टीम लीडर ने आकर कहा…” रक्षिता तुम्हें जो प्रोजेक्ट मिला था, वह अभी तक पूरा नहीं हुआ आज ही प्रोजेक्ट मैनेजर को भेजने की अंतिम तारीख है तुम अभी घर नहीं … Read more

अपनत्व की छांव – खुशी

राधा और मीना दो बहने थी।पिता राजेश और मां रजनी एक छोटा सा खुशहाल परिवार था।राजेश MR था और रजनी स्कूल में अध्यापिका।राधा और मीना दोनो आठवीं में पढ़ती थी।तभी एक सड़क दुर्घटना में उनके माता पिता का देहांत हो गया।उनकी दुनिया उजड़ गई। मामा निरंजन और मामी लक्ष्मी, चाचा राकेश और चाची गरिमा सब … Read more

कलह – टीआर. राहुल कुमार ‘मंदोला’

एक गांव के किनारे पर, पीपल और नीम के साए में एक पुराना घर था। वह घर केवल दीवारों का ढांचा नहीं था, बल्कि एक इतिहास था। मिट्टी की दीवारों में पुरखों की मेहनत की खुशबू थी, बरामदे की खाटों पर हंसी और यादों के निशान थे। सुबह की चाय, शाम की गपशप और त्योहारों … Read more

शर्म नहीं गर्व हूं मैं – रेखा जैन

तुमसे कितनी बार कहा है कि मुझे गरम गरम रोटियां ही पसंद है फिर क्यों ठंडी रोटी ले कर आती हो। एक ही बार में बात समझ नहीं आती है क्या?” आकाश ने रोटी को नीलम के सामने फेंकते हुआ कहा। “मैं गरम ही रोटियां बना कर ला रही हूं लेकिन ठंड इतनी है कि … Read more

जो मायके की ना हुई वह ससुराल वालों की क्या होगी – स्वाती जैंन

भाभी , कितनी चालाकी से फंसाया होगा ना आपने मेरे भैया को तभी तो भैया ने पुरे परिवार के खिलाफ जाकर आपसे शादी की हैं , यह मेंहदी , यह लिपस्टिक , यह चेहरे पर इतनी सारी लिपापोती यही सब करके मेरे भाई को अपने वश में कर लिया होगा ना , सिम्मी अपनी नई … Read more

शर्म नहीं, गर्व हूं, मैं! – लक्ष्मी त्यागी

दामिनी दर्द से कराह  रही थी ,उसकी ससुरालवालों ने, उसे शीघ्र ही अस्पताल पहुँचाया। दामिनी की हालत देखकर उसे तुरंत ही भर्ती कर लिया गया।  उसके पति योगेश परेशान से उस अस्पताल में चक्कर लगा रहे  थे। उसकी सास अस्पताल के मंदिर में हाथ जोड़कर बैठ गयी और भगवान जी से प्रार्थना करने लगी -हे … Read more

मॉं को बच्चों का साथ चाहिए। – अर्चना खण्डेलवाल

मां, मैंने आपके लिए वो सुन्दर सा शॉल भिजवाया था, आप जब नीचे घूमने जाओं तो यही पहनकर जाना, वसु अपनी मां हेमलता जी से कहने लगी, और हां मां मैंने जो आपके लिए स्वेटर भिजवाया है उसे भी पहन लेना, छोटी बेटी कनु भी बोली। इतने में सबसे बड़ा बेटा यश बोला कि मैंने … Read more

ज़हर का घूंट – सुदर्शन सचदेवा

सिया की आँखों में आँसू नहीं थे, बस खामोशी थी। वही सिया, जो कभी हँसी से घर भर देती थी, आज चुपचाप रसोई की खिड़की से बाहर झाँक रही थी। शादी को पाँच साल हुए थे, पर खुशियाँ जैसे किसी पुराने एलबम में कैद हो गई थीं। पति रवि दिन-रात ऑफिस और दोस्तों में व्यस्त, … Read more

अपनत्व की छाँव – सीमा गुप्ता

“मम्मा, आपसे एक बात पूछूं?” मेरी नई नवेली पुत्रवधू आस्था ने मुझसे कहा। उसकी आंखों में जिज्ञासा और स्वर में हल्का सा रोष था। “अरे बेटा! अपनी मां से बात करने के लिए अनुमति की क्या ज़रूरत?” मैंने मुस्कराकर कहा। आस्था ने कहा, “मम्मा, ये बताइए कि आकृति दीदी की ननद के घर दीवाली का … Read more

निरादर – खुशी

लक्ष्मी दो बेटों की मां थी।श्याम और राम उसके पति महेश एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे और लक्ष्मी घर से टिफिन सर्विस का काम करती थी। चारों की जिंदगी अच्छी चल रही थी कम था पर वो संतुष्ट थे।बच्चे भी जिद्दी नहीं थे।पर अचानक उनकी खुशी को नजर लग गई फैक्टरी में हादसा होने … Read more

error: Content is protected !!