अस्तित्व – लतिका श्रीवास्तव

प्रतिदिन की भांति फिर थानेदार साब अपने कई साथियों के साथ डंडा फटकारते आ गये। ओए रामू …सबको पेशल चाय दे और सब जगह सलोनी लगा रौबदार आवाज कानों में जाते ही यंत्रवत रामू के कांपते हाथ चाय के पतीले की ओर बढ़ गए थे। जल्दी चाय बना एक काम भी ढंग से नहीं होता।तब … Read more

जब घी सीधी उंगली से नहीं निकलता तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती हैं !! – स्वाती जैंन

बहु , यह कैसा बेढ़ंगा खाना बनाया हैं तुमने ?? दाल- सब्जी में तो कुछ स्वाद ही नहीं हैं , दाल में नमक कम हैं और सब्जी में मिर्च ज्यादा हैं !!मेरे बेटे सन्नी को तो मेरे हाथो का खाना बहुत स्वाद लगता हैं , तुम्हारे हाथों में वह स्वाद नहीं !! अब क्या करूं … Read more

दूरियां नज़दीकियाँ बन गई – संगीता अग्रवाल

” मां मैं सोच रहा हूं एक घर खरीद लूं।” संदीप ऑफिस से आते ही अपनी मां जया जी से बोला। ” पर बेटा ये घर है तो सही फिर दूसरे घर की क्या जरूरत है?” जया जी हैरानी से बोली। ” वो मां बात ऐसी है की शालिनी ( संदीप की पत्नी ) को … Read more

शर्म नहीं गर्व हूं मैं –  सुनीता माथुर

प्रगति, जागृति, रचना तीनों ही लड़कियों के कारण ज्योति को घर में सास के बहुत ताने सुनते पड़ते थे सास हमेशा यही ताने मारती कि——– एक बेटा होता घर का बारिस होता कम से कम—– वंश का नाम तो——- बना रहता! लेकिन——— बहू के तो तीन लड़कियां हो गईं यह सब सुनकर ज्योति दुःखी तो … Read more

मिताली – गीता अस्थाना

——— शिवेंद्र ने ट्रेन के कोच में भरी पैसेंजर के बीच तेज़ आवाज़ में कहा, ‘ कब तुमने मुझे रुपए दिए ‘ उनकी तेज़ आवाज़ से भयभीत सी होकर नीचे देखने लगी। उसकी आंखों में आंसू आ गए। रात्रि का सफर था, सो वह अपने बर्थ पर जाकर लेट गई। काफी देर तक वह जागती … Read more

गर्व – खुशी

नीला एक जिम्मेदार और लाडली बेटी थी पिता आशय और आरजू दोनो की मुराद मांगी बेटी जिस पर दोनों जान छिड़कते थे।नीला का जन्म शादी के 12 साल बाद हुआ।आशय और आरजू दोनो कॉलेज में प्रोफेसर थे।आशय हिंदी पढ़ाते थे और आरजू pshycology । आरजू और आशय की लव मैरिज थी दोनो एक ही कॉलेज … Read more

तू बेमिसाल है – विभा गुप्ता 

 ” बस..बहुत हो चुका तेरा गाना-बजाना..स्कूल से आकर चुपचाप रसोई में जाकर अपनी माँ से खाना पकाना सीख… रंग देखकर तो कोई भी लड़का तुझे पसंद नहीं करेगा,कम से कम घर का कामकाज सीख लेगी तो शायद कोई ढ़ंग का परिवार मिल जाए…।” निधि के घर में घुसते ही उसकी दादी उस पर फट पड़ी … Read more

एक मां की चुप्पी को उसकी कमजोरी मत समझना – स्वाती जैंन

दरवाजे की बेल बजी वैसे ही तान्या बोली -लो आ गई तुम्हारी मां पार्क से , आज ऐसी डांट लगाना रोहित कि तुम्हारी मां पार्क जाना ही भूल जाए !! रोहित ने दरवाजा खोला और यशोदा जी से बोला – मां यह बार – बार पार्क घूमने क्यों चली जाती हो ?? घर में कितने … Read more

आखिर कब तक? – परमा दत्त झा

गोविंद सिर झुकाकर बैठा था जबकि मां बहन भाई सभी सबाल की बौछार कर रहे थे। खासकर छोटे भाई की पत्नी (बहुरिया)का रोकर बुरा हाल था। हुआ यह कि छोटी बहन रानी का विवाह एक एन आर आई लड़के से ठीक किया।लड़का स्वजातीय है और अमेरिका की किसी प्रतिष्ठित कंपनी में काम करता है। करीब … Read more

कलह – लक्ष्मी त्यागी

शांतपुर—नाम के विपरीत, अब वह गाँव शांत नहीं रहा था। चौधरी देवेंद्र सिह जी की हवेली के भीतर उठी एक छोटी-सी ‘कलह’ ने पूरे गाँव की नींद छीन ली थी।  चौधरी देवेंद्र सिंह, उम्र साठ के पार, गाँव के सबसे सम्मानित व्यक्ति माने जाते थे। उनके दो बेटे—राघव और विवेक—एक ही छत के नीचे रहते … Read more

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