मेरा साथी – एम. पी. सिंह 

वरिष्ठ नागरिक होने का सम्मान अधिकांश लोगों को नसीब नहीं होता, और जिन्हे नसीब होता है, उनके लिए भी चुनौतीयों भरा होता है. मैं आपको अपनी कहानी बताता हूँ.  मैं 70+ का एक रिटायर ऑफिसर हूँ, हॉस्टल के दिनों मैं मैंने एक टाइम पीस (घड़ी) लिया था, जो एलार्म बजाकर मेरे प्रत्येक इम्पोर्टेन्ट कार्य की … Read more

ऑंख भर आना – डाॅ संजु झा

जबसे नीरा ने बेटे की विदेश जाने की बात सुनी है,तब से उसके दिल में  तरह-तरह के ख्याल आने लगें हैं और रह-रहकर उसकी ऑंखें भर जातीं हैं।जिंदगी में बहुत कुछ पा लेने की  होड़ में आज के युवा अपने वतन छोड़कर विदेश जाने से नहीं हिचकते नहीं हैं। मोटी सैलरी , एशो-आराम की जिन्दगी … Read more

एक और मौका… – रश्मि झा मिश्रा

 चंदा पहली ही मुलाकात में बृजेश से प्रभावित हो गई थी… उसे वह लड़का कुछ अलग सा लगा… चंदा ने हर बार की तरह छुट्टी के दिन पिज़्ज़ा ऑर्डर किया था… इस बार डिलीवरी बॉय नया लड़का था… लड़के ने बड़ी विनम्रता से कहा… मैम एक गिलास पानी मिल सकता है क्या…!”  चंदा पानी लेने … Read more

#मैं भी तो एक बेटी हूं – वीणा सिंह

शुभा फोन है सिया का रोहित ने किचेन में मोबाईल ला के दिया… सिया खुशी से चहकती शुभा  से बातें करने लगी…     शादी के बाद  सिया अपना पहला वट सावित्री व्रत करने मायके आ रही थी और मनुहार कर रही थी बुआ तुम आओ ना साथ में व्रत करेंगे खूब मजा आयेगा… शुभा सिया की … Read more

एक और मौका –   सुनीता माथुर 

जब सोम्या ने सुना कि पापा बहुत ज्यादा बीमार हैं और मां भी बीमार हो गईं उनकी देखभाल करने वाला घर पर कोई नहीं है———– भाई तो अमेरिका में अपने परिवार सहित यानी कि भाई शंकर भाभी रीना और—- उनकी 2 साल की एक बेटी बिपाशा अमेरिका में बस गए और पीछे मुड़कर भी नहीं … Read more

बेटी – खुशी

सावित्री एक भरे पूरे परिवार का हिस्सा थी पति राघव तीन बेटे विवेक, विनय और मौलिक तीनों बेटों पर सावित्री को बड़ा गर्व था ।वो सबसे यही कहती मेरे बेटे तो राम लक्ष्मण है तीनों  एक दूसरे के पूरक है। मैं कौशल्या बच्चे फर्माबदार है ये सोच राघव और सावित्री खुश रहते। सावित्री गाहे बगाहे … Read more

मैं भी तो एक बेटी हूं – सुदर्शन सचदेवा

शाम के पाँच बज रहे थे। बारिश की हल्की-हल्की बूँदें छत पर पड़ते हुए एक अजीब-सी बेचैनी पैदा कर रही थीं। डोरबेल बजी, और गीता ने दरवाज़ा खोला। सामने एक लड़की खड़ी थी—भीगी हुई, डर से कांपती, और आँखों में अजीब-सा दर्द। “आंटी… क्या मैं अंदर आ सकती हूँ? मैं… मैं और कहीं नहीं जा … Read more

दूसरा मौका – खुशी

रागिनी और सुबोध दोनो कॉलेज में एक साथ पढ़ते थे।जिधर रागिनी अपने माता पिता की इकलौती संतान थी वहीं सुबोध तीन भाई माता पिता चाचा चाची ऐसा परिवार था।फाइनेंशियली तो दोनों ही सॉलिड थे।पर जहां रागिनी अपने बाप के कारोबार की अकेली वारिस थी पर सुबोध का खानदानी बिज़नेस था जिसमें सब भागीदार थे।सुबोध के … Read more

मैं आपकी बेटी जैसी हूं, मां जी । – आराधना श्रीवास्तव

अरे! सिया बहू भिंडी की सब्जी कैसी बनाई थोड़ा भी कुरकुरी नहीं  बनी पता नहीं क्या सीख कर अपने मायके से आई हो।  सिया जल्दी-जल्दी रसोई समेट रही थी बिजली की तरह दौड़-दौड़ कर कार्य कर रही थी सुबह 5:00 के अलार्म के साथ दिनचर्या शुरू हो जाती है सासू मां शोभा जी को शुगर … Read more

अपमान क्या? – लतिका पल्लवी 

टेलीविजन देखते देखते अचानक गुरुवारी अचानक चिल्लाते हुए बोली तुम क्या जानो अपमान क्या होता है? यह सुनकर उसकी चाची नें कहा अरे!बिटिया क्यों और किस पर चिल्ला रही हो?यहाँ तो कोई नहीं है! कुछ नहीं चाची वो नेता जो टी वीं मे बैठी है उसी की बात को सुनकर गुस्सा आ गया था। गुरुवारी … Read more

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