बहू हो, तो थोड़ा मेहमानदारी भी सीखो। – दिव्या सक्सेना
“रीवा, आज तुम ऑफिस से जल्दी आ जाना… मेरे भाई-भाभी आ रहे हैं।”किचन में चाय का पैन चढ़ाते हुए विशाल ने ऐसे कहा जैसे बारिश की सूचना दे रहा हो—सामान्य, निर्विकार। रीवा ने प्लेटों में फल रखते हुए गर्दन घुमा कर देखा। “आज? तुम्हें कल याद आया? और तुमने मुझे अभी बताया?” “अरे बस… अचानक … Read more