बहू हो, तो थोड़ा मेहमानदारी भी सीखो। – दिव्या सक्सेना

“रीवा, आज तुम ऑफिस से जल्दी आ जाना… मेरे भाई-भाभी आ रहे हैं।”किचन में चाय का पैन चढ़ाते हुए विशाल ने ऐसे कहा जैसे बारिश की सूचना दे रहा हो—सामान्य, निर्विकार। रीवा ने प्लेटों में फल रखते हुए गर्दन घुमा कर देखा। “आज? तुम्हें कल याद आया? और तुमने मुझे अभी बताया?” “अरे बस… अचानक … Read more

आंखों का पानी ढलना – सीमा सिंघी

इन दो सालों में राधे और बंसी दोनों भाइयों के बीच बहुत कुछ बदल चुका था। वजह थी एक जमीन का टुकड़ा। जिसे पिता हरि प्रसाद ने दोनों भाइयों में बराबर बराबर बांट दिया था। छोटे भाई बंसी को इससे कोई परेशानी न थी, परेशानी थी तो बस राधे को, उसे यही लगने लगा की … Read more

हर बात के लिए बहु ही दोषी क्यों – कमलेश आहूजा

ठंडी हवाएं चल रहीं थीं पर बारिश थम चुकी थी।रोहन जिद पर अड़ा हुआ था कि मॉल जाना है।रिया बोली -“ऐसा क्या जरूरी काम है?जो बारिश के मौसम में मॉल जाना है,तो मुस्कुराते हुए रोहन बोला-“क्या बताऊँ यार,मैंने दो दिन पहले मूवी के टिकिट बुक कराए थे ये सोचकर कि इस संडे शाम को मॉल … Read more

शहर के नामी बिजनेस – विनीता सिंह

 मैन मोहन हर समय एक शहर से दूसरे काम के सिलसिले में जाते रहते। उन दो बच्चे उनकी पूरी देखभाल उनकी पत्नी मालती जी करती थी ।लेकिन समय के साथ सब कुछ बदल गया। लेकिन मोहन की दिनचर्या उसी प्रकार की थी। बच्चे बड़े हो गए वह दोनों भी अपनी पढ़ाई और सोशल मीडिया में … Read more

अपनों से गैर भले – सुदर्शन सचदेवा

अभी-अभी की ही तो बात है। सुबह ऑफिस के लिए निकलते समय आईने में खुद को देखा तो मानो कोई और चेहरा दिखा—थकी आँखें, बुझा हुआ मन। साक्षी ने मोबाइल उठाया। माँ के पाँच मिस्ड कॉल थे। वह जानती थी—अब पूछताछ नहीं, हिदायतें आएँगी। उसने मोबाइल साइलेंट कर दिया। ऑफिस पहुँचकर भी मन वहीं अटका … Read more

रिश्ते की नई सुबह – संजय अग्रवाल

सुबह सुबह आश्रम के कार्यालय में हम बैठे थे, सावित्री मौसी के बारे में पूरी जानकारी देते। मौसी खामोशी से किनारे बैठी हुई है। मैनेजर ने कहा भाई साब काश ऐसे लोग और हो तो इन बुजुर्गों को कभी भीख न मांगना पड़े। बहुत बुरा लगता है हमें भी, मगर क्या करें नियमो से बंधे … Read more

मायका – शुभ्रा बैनर्जी 

“सुमन! ओ सुमन, मधु आ रही है कल दामाद जी के साथ।सुबोध से कहना, छुट्टी ले ले दो चार दिन की।” सुमित (पति)ने फोन रख दिया था।सुमन समझ नहीं पा रही थी कि बेटी के आने की खुशी क्यों नहीं महसूस हो रही थी उसे? ऐसा नहीं कि मधु पहली बार आ रही थी राखी।पांच … Read more

बंधन मुक्ति – बीना शुक्ला अवस्थी

घर में सुबह से हलचल मची थी जिसका कारण था सबके मोबाइल पर एक मैसेज। भानुजा का मोबाइल भी कमरे में ही रखा था। कहॉ गई भानुजा? किसी को कुछ पता नहीं था, कल रात तक सब कुछ सामान्य था। तीन महीने पहले ब्याह कर आई नववधू अर्चिता भी अचंभित थी।  इन तीन महीनों में … Read more

इतना अभियान सही नहीं – विनीता सिंह

पहाड़ों का जीवन बहुत ज्यादा कठिन होता है। कब पहाड़ गिर जाए कब रास्ते बन्द हो जाए। कुछ पता नहीं ऐसे ही दो पहाड़ियों के बीच में एक गांव था उस गांव में नदी थी उस नहीं के ऊपर एक पुल था पता नहीं कब गिर जाए कहा नहीं जाता।उसी गांव में अरूण नाम का … Read more

आंखों का पानी ढालना – नाज़ मन्नत

श्यामलाल एक कस्बे में रहने वाला व्यक्ति था। वह न तो मेहनती था और न ही ईमानदार, परंतु उसमें एक विशेष गुण अवश्य था—उसे किसी भी बात की लज्जा नहीं आती थी। लोग कहते थे कि उसने तो पूरी तरह आंखों का पानी ढाल दिया है। वह बिना शर्म किए झूठ बोलता, दूसरों का हक … Read more

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