बंटवारा – रमा शुक्ला
‘रघुनाथ सदन’ के विशाल बरामदे में एक अजीब सी मनहूसियत छाई थी। हवेली के मुखिया, ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह का आज तेरहवीं का दिन था। गांव भर के लोग भोजन करके जा चुके थे। घर के सदस्य अब थके-हारे और उदास चेहरों के साथ दीवान पर बैठे थे। लेकिन यह उदासी किसी अपने को खोने … Read more