अपराधबोध – सीमा सिंघी 

सुनंदाजी की नजर जैसे ही अपनी बहू मीरा की थाली पर पड़ी । वो थाली की ओर देखते हुए तुरंत कड़क आवाज में कहने लगी। देखो बहू मेरे लिए तुमने शाम के लिए  गट्टे की सब्जी रख दी है ना ?? क्योंकि गट्टे की सब्जी मुझे बहुत पसंद है। अपनी सासू मां की कड़क आवाज … Read more

इस गुनाह की माफी नहीं – दीपा माथुर

रीवा स्टेशन पर उतरी तो धुंध अभी टूटी नहीं थी। रात की ठंड जैसे लोहे की पटरियों में छिपकर उसके कपड़ों में उतर रही थी। उसके एक हाथ में छोटा-सा सूटकेस था, दूसरे हाथ में पाँच बरस का आरव— कभी कोट का सिरा पकड़ता, कभी उंगली कसकर थाम लेता, जैसे दुनिया एक अजगर है जो … Read more

प्यार के रंग पीढ़ियों के संग – संगीता त्रिपाठी

  “नानी क्या आपका भी कभी किसी से क्रश था “वन्या उत्सुकता से नानी को देख रही थी,     “ये क्रश क्या होता है लाड़ो..”आँखों में हैरानी लिये नानी ने नातिनी के प्रश्न पर पूछा.       “अरे नानी क्रश मतलब प्यार… क्या आपने किसी से प्यार किया था “         “हाँ… तुम्हारे नाना से..”          “नाना से तो आपकी शादी … Read more

पहला प्यार – अर्चना खण्डेलवाल

आज शिरीष को बाजार में देखा तो देखती ही रह गई, तभी मेरी नजर दुकान पर लगे आइने पर गई, अगले ही पल मैंने अपनी आंखें स्वयं ही फेर ली, अब मैं विवाहित हूं, गले में मंगलसूत्र और माथे पर सजा सिंदूर मुझे ग्लानि महसूस करवा रहे थे, इस तरह विवाह के पश्चात पति को … Read more

मेरा पहला प्यार – संजय सिंह

शाम 4:00 का समय था। राज घर के बाहर जाती धूप में कुर्सी लगाकर चुपचाप बैठा था ।पास में उसका  कुत्ता भी धूप का आनंद ले रहा था ।घर पर कोई नहीं था ।राज को बड़े लाड प्यार से पढ़ा लिखा कर ,काबिल इंसान बनाने में जिस हस्ती का न हाथ था। वह उसकी मां … Read more

पहला प्यार – मधु वशिष्ठ

गांव में राम प्रसाद जी की तबियत दिनों दिन बिगड़ती ही जा रही थी। उनके घर में उनके और उनकी बेटी के सिवाय कोई भी नहीं रहता था। डाक्टर मोहन उनका इलाज किया करता था। एमबीबीएस करने के बाद में कुछ समय डॉ मोहन को गांव में ट्रेनिंग के तौर पर कुछ समय के लिए … Read more

गुणों का रंग – गरिमा चौधरी

** “क्या एक सांवली लड़की की डिग्रियां उसके रंग के आगे फीकी पड़ जाती हैं? और क्या लाखों का पैकेज लेने वाला प्राइवेट नौकरी का बेटा सरकारी चपरासी से भी कमतर है? पढ़िए समाज के उस दोहरे मापदंड की कहानी जिसने दो होनहार दिलों को एक ऐसे कटघरे में खड़ा कर दिया जहाँ फैसला गुणों … Read more

विश्वास की डोर – रमा शुक्ला

** “सुहागरात की वो सेज, जो फूलों से सजी थी, उस पर बैठी दुल्हन कांप रही थी—शर्म से नहीं, बल्कि एक डर से। एक ऐसा डर जो उसके अतीत के साये से जुड़ा था। क्या उसका पति उसका हाथ थामेगा या फिर समाज के तानों से डरकर उसे बीच मझधार में छोड़ देगा? जानिये राघव … Read more

“त्याग की आड़ में” – निधि गुप्ता

** क्या एक माँ का संघर्ष उसके बेटे की खुशियों का ‘आजीवन कारावास’ बन सकता है? क्या अतीत के दुखों की दुहाई देकर वर्तमान की खुशियों का गला घोंटना जायज़ है? जानिये सुमन की कहानी, जिसने ‘फर्ज’ और ‘गुलामी’ के बीच की लकीर खींच दी। — “बेटा! तुम मेरी बहू की उम्र की हो, इसलिए … Read more

नीम की कड़वाहट – नेहा पटेल

** एक बेटे को अपनी पत्नी “राक्षस” लगती थी जो उसकी बूढ़ी माँ को घुटनों के दर्द में भी पैदल चलाती थी। लेकिन जब डॉक्टर ने उस पत्नी के ‘जुल्म’ की असली वजह बताई, तो बेटे के पैरों तले से ज़मीन क्यों खिसक गई? विहान की आँखों में खून उतर आया। उसने अपनी माँ को … Read more

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