जेठानी – देवरानी का नाटक ससुराल वालों पर पड़ा भारी – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

भाभी , यह क्या आप दिन भर काम करती हैं फिर भी कोई भी आपको कुछ भी बोलकर चला जाता हैं , घरवाले आपकी बिल्कुल भी इज्जत नहीं करते , आपको इन सबकी बातों का बिल्कुल भी बुरा नहीं लगता क्या ?? मेघा अपनी जेठानी सुलोचना से बोली !! सुलोचना बोली – मेघा , ना … Read more

बहू ने ना बोलना सीख लिया है – प्रतिमा श्रीवास्तव :

Moral Stories in Hindi रजनी के मुंह से कभी भी किसी काम के लिए ना निकलता ही नहीं था। बड़े ही खुशी से हर किसी के काम को करती थी।उसे लगता था की सब अपने ही तो हैं कितने हक से मुझे कुछ कहते हैं वरना आजकल तो कोई किसी से मतलब ही कहां रखता … Read more

दिखावटी रोना – सुदर्शन सचदेवा : लघुकथा

सावित्री के घर आज खूब रौनक थी , क्योकि काशवी की शादी तय हो गई थी | रिश्तेदार आ जा रहे थे, कहीं हंसी ठिठोली और कहीं मस्ती में झूम रहे थे | सावित्री भी सबके साथ हंसते हुए तैयारियों में व्यस्त थी – पर कभी कभी दूसरे कमरे में जा कर रो देती थी … Read more

नासमझी अच्छी – शुभ्रा बैनर्जी :

Moral Stories in Hindi “बबलू ,आज शाम को बुआ आ रही है।साथ में फूफाजी और बेटी कविता भी आ रहें हैं‌।बाजार से सब्जियां तो मैं ले आऊंगी।तू मिठाई लेते आना बेटा। दर्जी के यहां से पापा के कपड़े भी लेते आना।”बबलू ने सिर हिला कर हामी भर दी। नैना का दिल फट जाता था,बेटे को … Read more

देर आये दुरुस्त आये – संगीता अग्रवाल

” बेटा साक्षी कहाँ चल दी सुबह सुबह ?” सास सरिता अपनी बहू से बोली। ” मम्मी जी वो चाची जी ने बुलाया है उनकी बेटी का सिंधारा जायेगा तो बोली आकर गुंजिया बना दियो तो बस वही बनाने जा रही हूँ !” साक्षी बोली। “पर बेटा तुम्हे तो कल बुखार था अब आज घंटों … Read more

#ससुराल वाले बड़ी बहू को इंसान नहीं समझते –  प्रतिमा श्रीवास्तव :

 Moral Stories in Hindi बड़ी बहू मतलब बहुत बड़ी जिम्मेदारी और बहुत बड़ा समर्पण।हे भगवान अगले जन्म में मोहे बड़ी बहू ना कीजो। गुड्डन अब सबकी इच्छाओं पर खरी उतरते – उतरते थक गई थी।घर क्या परिवार में भी कुछ हो तो यही सुनने को मिलता की तुम बड़ी बहू हो तो जो कुछ भी … Read more

बहु ने ना कहना सीख गई है – खुशी :

 Moral Stories in Hindi नीरू एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की थी। परिवार में दो बेटियां नीतू और नीरू थी पिता अनिल और मां अंजली थे।नीरू के परिवार में सब एक दूसरे की मदद करते मिलके काम करते। नीरू के लिए नितिन का रिश्ता आया।नितिन के परिवार में मां शांति पिता श्यामलाल और शादी शुदा बहन … Read more

एक आंख से रोवे एक आंख से हंसे – गीता अस्थाना :

महिम बाबू अपने बेटों की शिक्षा और उन्हें सुयोग्य बनाने के उद्देश्य से गांव छोड़कर शहर में आए। उनके दो अपने बेटे थे सुरेन्द्र और महेंद्र। तीसरा उन दोनों से छोटा वीरेंद्र,जो उनके भाई का था , उसके बाल्यकाल में ही उनका निधन हो गया था। जीवनयापन के उद्देश्य से उन्होंने गोलघर मार्केट में एक … Read more

रिश्ते दिल से बनते हैं, हैसियत से नहीं – ज्योति आहूजा : Moral stories in hindi

इंदौर की धूप उस दिन कुछ नरम थी, जैसे आसमान ने भी शहर पर अपना हाथ फेर दिया हो। छोटे मगर सलीके से सजे घर में रीना और अर्जुन की दुनिया बसी थी। शादी को सात साल हो चुके थे, दो प्यारे बच्चे, दोनों की अच्छी नौकरियां, और धीरे-धीरे बनाई हुई एक ऐसी ज़िंदगी जिसमें … Read more

अब बहू ने ना कहना सीख लिया है – मधु वशिष्ठ :

 Moral Stories in Hindi तुम्हारी सारी तैयारी पूरी हो गई ना? दवाइयां रख लेना। कमरों के ताले लगाकर बैग बाहर निकाल कर रख दो। मनोज अभी आता ही होगा, हमको यात्रा वाली बस तक छोड़ आएगा।  चाबी उसको दे देना। रात को तो वह घर पर रुकेगा ही ना? वर्मा जी ने शीला जी से … Read more

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