मातृत्व – करुणा मलिक
नीलम अपनी बालकनी में खड़ी थी, हाथ में चाय का कप था जो अब ठंडा हो चुका था। उसकी नज़रें दूर कहीं शून्य में टिकी थीं, लेकिन मन स्मृतियों के बवंडर में फंसा हुआ था। वह सोच रही थी कि कैसे एक ‘सही’ फैसला लेने के चक्कर में जिंदगी उसे उस मोड़ पर ले आई … Read more